Avimukteshwaranand vs Yogi: प्रयागराज के माघ मेले से निकला विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है।
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच ठन गई है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिनों का ‘अल्टीमेटम’ देते हुए कहा है कि वे अपने ‘हिंदू होने का प्रमाण’ दें, नहीं तो उन्हें ‘नकली और ढोंगी’ माना जाएगा।
CM को 40 दिन का अल्टीमेटम: ‘गो-भक्ति’ का प्रमाण दें
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिन का समय देते हुए कहा कि वे अपने “गो-भक्त होने का प्रमाण” दें। उन्होंने दो मांगें रखीं:
- गाय को 11 मार्च तक उत्तर प्रदेश की ‘राज्य माता’ घोषित किया जाए।
- उत्तर प्रदेश से गोमांस (BEEF) के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
VIDEO | Varanasi: Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati says, “… Cow slaughter is continuously taking place in his state. Therefore, we have told him (UP CM Yogi Adityanath) to first stop the export of cow meat from his state and, second, declare cow as the state… pic.twitter.com/Wvg2Z3nSjG
— Press Trust of India (@PTI_News) January 30, 2026
अपने हिंदू होने का प्रमाण दीजिए
शंकराचार्य ने आंकड़े देते हुए कहा कि भारत से होने वाले कुल गोमांस निर्यात का लगभग 40-50% हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश से जाता है।
उनका कहना था, “अगर आप यह प्रमाण नहीं दे पाते, तो समझा जाएगा कि आप नकली हिंदू, कालनेमि, पाखंडी और ढोंगी हैं। सिर्फ दिखावे के लिए आपने गेरुआ वस्त्र धारण किया है।”
उन्होंने चेतावनी दी, “या तो अपने हिंदू होने का प्रमाण दीजिए, नहीं तो यह भगवा चोला उतार दीजिए।”
Varanasi, Uttar Pradesh: On the Prayagraj bathing controversy, Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati says, “The point is, there is a way to apologize. An apology is an apology—it requires asking for forgiveness. They were trying to entice us, saying ‘You take your… pic.twitter.com/Z9vph2pPGC
— IANS (@ians_india) January 30, 2026
शंकराचार्य की आगे की रणनीति
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी आगे की रणनीति भी स्पष्ट कर दी है:
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लखनऊ में महासभा: उन्होंने कहा कि 10-11 मार्च को लखनऊ में देश भर के संत, महंत और आचार्य एकत्र होंगे। वहां यह तय किया जाएगा कि “कौन असली हिंदू है और कौन नकली हिंदू।”
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अगले माघ मेले की चेतावनी: उन्होंने कहा कि अगले साल के माघ मेले में वह पहले दिन से ही पहुंच जाएंगे और मौनी अमावस्या को ससम्मान स्नान करेंगे। उन्होंने इशारा दिया कि उस समय स्थिति क्या होगी, यह प्रशासन के रवैये पर निर्भर करेगा।
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नकली हिंदुओं का पर्दाफाश: उनका आरोप है कि जो लोग खुद को साधु, योगी और भगवाधारी कहते हैं, वही हिंदुओं के साथ छल कर रहे हैं। अब उन “नकली हिंदुओं” का पर्दाफाश करने का समय आ गया है। उन्होंने प्रशासन पर ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाने का भी आरोप लगाया।
Varanasi, Uttar Pradesh: Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati says, “Regarding the apology, the fact is that when we left Prayag, we had already clearly explained everything that had happened. Every detail was outlined in writing. Even after arriving here, during our… pic.twitter.com/4g3HBLcIT4
— IANS (@ians_india) January 30, 2026
‘दोबारा स्नान कराने की कोई योजना नहीं’- प्रशासन
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी ने दावा किया था कि प्रशासन उनसे माफी मांगने और दोबारा स्नान कराने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, प्रयागराज प्रशासन ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि न तो स्वामी जी को दोबारा स्नान कराने का कोई प्रस्ताव है, और न ही ऐसी कोई योजना बनाई जा रही है।
उनका कहना है कि मेले में सुरक्षा और व्यवस्था सबसे बड़ी प्राथमिकता है और सभी फैसले उसी के मद्देनजर लिए गए।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला
जहां एक ओर सड़क पर विरोध जारी है, वहीं दूसरी ओर यह लड़ाई अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गई है।
शंकराचार्य की ओर से याचिका दाखिल कर मौनी अमावस्या की घटना की निष्पक्ष जांच (CBI जांच तक की मांग) और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
हालांकि, प्रशासन अब भी किसी भी विशेष स्नान प्रोटोकॉल या माफी से इनकार कर रहा है।

क्या हुआ था मौनी अमावस्या को?
18 जनवरी को मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर शंकराचार्य अपने शिष्यों और बटुकों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे।
आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने उनकी पालकी को रोका और उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की की।
शिष्यों का दावा है कि उनके साथ मारपीट हुई और अपमानजनक व्यवहार किया गया।
इस घटना से आहत होकर शंकराचार्य वहीं धरने पर बैठ गए और 11 दिनों तक अपने शिविर के अंदर कदम नहीं रखा।

ऐसे बढ़ा विवाद
विवाद तब और गहरा गया जब प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से उनके ‘शंकराचार्य’ होने का प्रमाण पत्र मांग लिया।
यह पहली बार था जब किसी सरकार ने धर्मगुरु से उनकी पदवी का सबूत मांगा।
शंकराचार्य ने प्रमाण दे तो दिया, लेकिन इसी बात ने उनकी नाराजगी को आग दे दी।
उन्होंने कहा, “मुझसे प्रमाण मांगा गया, मैंने दे दिया। अब मेरी बारी है।”

धर्म और राजनीति के बीच फंसा भक्त
इस पूरे विवाद ने संत समाज को भी दो हिस्सों में बांट दिया है।
एक पक्ष मुख्यमंत्री के साथ खड़ा है, तो दूसरा शंकराचार्य के अपमान को सनातन धर्म का अपमान बता रहा है।
फिलहाल, सबकी नजरें उन 40 दिनों पर टिकी हैं, जो शंकराचार्य ने सरकार को दिए हैं।
क्या यूपी सरकार गोमांस निर्यात पर कोई कड़ा फैसला लेगी, या यह टकराव और बढ़ेगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।


