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40 दिन में हिंदू होने का प्रमाण दे, वरना भगवा चोला उतार दें! CM योगी को अविमुक्तेश्वरानंद का अल्टीमेटम

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Avimukteshwaranand vs Yogi: प्रयागराज के माघ मेले से निकला विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है।

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच ठन गई है।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिनों का ‘अल्टीमेटम’ देते हुए कहा है कि वे अपने ‘हिंदू होने का प्रमाण’ दें, नहीं तो उन्हें ‘नकली और ढोंगी’ माना जाएगा।

CM को 40 दिन का अल्टीमेटम: ‘गो-भक्ति’ का प्रमाण दें

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिन का समय देते हुए कहा कि वे अपने “गो-भक्त होने का प्रमाण” दें। उन्होंने दो मांगें रखीं:

  1. गाय को 11 मार्च तक उत्तर प्रदेश की ‘राज्य माता’ घोषित किया जाए।
  2. उत्तर प्रदेश से गोमांस (BEEF) के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

अपने हिंदू होने का प्रमाण दीजिए

शंकराचार्य ने आंकड़े देते हुए कहा कि भारत से होने वाले कुल गोमांस निर्यात का लगभग 40-50% हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश से जाता है।

उनका कहना था, “अगर आप यह प्रमाण नहीं दे पाते, तो समझा जाएगा कि आप नकली हिंदू, कालनेमि, पाखंडी और ढोंगी हैं। सिर्फ दिखावे के लिए आपने गेरुआ वस्त्र धारण किया है।”

उन्होंने चेतावनी दी, “या तो अपने हिंदू होने का प्रमाण दीजिए, नहीं तो यह भगवा चोला उतार दीजिए।”

शंकराचार्य की आगे की रणनीति

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी आगे की रणनीति भी स्पष्ट कर दी है:

  1. लखनऊ में महासभा: उन्होंने कहा कि 10-11 मार्च को लखनऊ में देश भर के संत, महंत और आचार्य एकत्र होंगे। वहां यह तय किया जाएगा कि “कौन असली हिंदू है और कौन नकली हिंदू।”

  2. अगले माघ मेले की चेतावनी: उन्होंने कहा कि अगले साल के माघ मेले में वह पहले दिन से ही पहुंच जाएंगे और मौनी अमावस्या को ससम्मान स्नान करेंगे। उन्होंने इशारा दिया कि उस समय स्थिति क्या होगी, यह प्रशासन के रवैये पर निर्भर करेगा।

  3. नकली हिंदुओं का पर्दाफाश: उनका आरोप है कि जो लोग खुद को साधु, योगी और भगवाधारी कहते हैं, वही हिंदुओं के साथ छल कर रहे हैं। अब उन “नकली हिंदुओं” का पर्दाफाश करने का समय आ गया है। उन्होंने प्रशासन पर ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाने का भी आरोप लगाया।

‘दोबारा स्नान कराने की कोई योजना नहीं’- प्रशासन 

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी ने दावा किया था कि प्रशासन उनसे माफी मांगने और दोबारा स्नान कराने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, प्रयागराज प्रशासन ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि न तो स्वामी जी को दोबारा स्नान कराने का कोई प्रस्ताव है, और न ही ऐसी कोई योजना बनाई जा रही है।

उनका कहना है कि मेले में सुरक्षा और व्यवस्था सबसे बड़ी प्राथमिकता है और सभी फैसले उसी के मद्देनजर लिए गए।

Avimukteshwaranand vs Yogi

हाईकोर्ट पहुंचा मामला 

जहां एक ओर सड़क पर विरोध जारी है, वहीं दूसरी ओर यह लड़ाई अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गई है।

शंकराचार्य की ओर से याचिका दाखिल कर मौनी अमावस्या की घटना की निष्पक्ष जांच (CBI जांच तक की मांग) और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

हालांकि, प्रशासन अब भी किसी भी विशेष स्नान प्रोटोकॉल या माफी से इनकार कर रहा है।

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क्या हुआ था मौनी अमावस्या को?

18 जनवरी को मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर शंकराचार्य अपने शिष्यों और बटुकों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे।

आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने उनकी पालकी को रोका और उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की की।

शिष्यों का दावा है कि उनके साथ मारपीट हुई और अपमानजनक व्यवहार किया गया।

इस घटना से आहत होकर शंकराचार्य वहीं धरने पर बैठ गए और 11 दिनों तक अपने शिविर के अंदर कदम नहीं रखा।

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ऐसे बढ़ा विवाद

विवाद तब और गहरा गया जब प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से उनके ‘शंकराचार्य’ होने का प्रमाण पत्र मांग लिया।

यह पहली बार था जब किसी सरकार ने धर्मगुरु से उनकी पदवी का सबूत मांगा।

शंकराचार्य ने प्रमाण दे तो दिया, लेकिन इसी बात ने उनकी नाराजगी को आग दे दी।

उन्होंने कहा, “मुझसे प्रमाण मांगा गया, मैंने दे दिया। अब मेरी बारी है।”

Avimukteshwaranand vs Yogi

धर्म और राजनीति के बीच फंसा भक्त

इस पूरे विवाद ने संत समाज को भी दो हिस्सों में बांट दिया है।

एक पक्ष मुख्यमंत्री के साथ खड़ा है, तो दूसरा शंकराचार्य के अपमान को सनातन धर्म का अपमान बता रहा है।

फिलहाल, सबकी नजरें उन 40 दिनों पर टिकी हैं, जो शंकराचार्य ने सरकार को दिए हैं।

क्या यूपी सरकार गोमांस निर्यात पर कोई कड़ा फैसला लेगी, या यह टकराव और बढ़ेगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।

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