Homeन्यूजबिना स्नान किए ही माघ मेले से वापस लौटे अविमुक्तेश्वरानंद, 11 दिन...

बिना स्नान किए ही माघ मेले से वापस लौटे अविमुक्तेश्वरानंद, 11 दिन के धरने के बाद छोड़ा प्रयागराज

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Avimukteshwaranand Leaves Magh Mela: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज के माघ मेले को अचानक छोड़ दिया है।

28 जनवरी, बुधवार सुबह वो काशी के लिए रवाना हो गए।

उन्होंने कहा कि उनका मन इतना दुखी है कि वह बिना स्नान किए ही प्रयागराज से जा रहे हैं।

उन्होंने प्रशासन पर माघ मेले में अपने और शिष्यों के अपमान का आरोप लगाया और कहा कि जब तक दोषी माफी नहीं मांगते, वह स्नान नहीं करेंगे।

‘युवाओं को दिखानी होगी औकात’

प्रयागराज से जाते समय शंकराचार्य ने युवाओं से अपील करते हुए कहा,

“जिन्होंने सनातनी प्रतीकों का अपमान किया है, उन्हें उनकी औकात दिखानी होगी। अगर सनातनी चाहेंगे, तो हम शांत नहीं बैठेंगे। इस अन्याय के प्रतिकार के लिए आगे भी आंदोलन किया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि वह पीछे सत्य की गूंज और कई सवाल छोड़कर जा रहे हैं, जो पूरे विश्व में गूंजेंगे।

माघ मेले के बाकी स्नानों में नहीं लेंगे हिस्सा

माघ मेला 15 फरवरी तक चलेगा और अभी दो मुख्य स्नान बाकी हैं- माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) और महाशिवरात्रि (15 फरवरी)।

शंकराचार्य के मेला छोड़ने के फैसले का मतलब है कि वह इन दोनों स्नानों में भी शामिल नहीं होंगे।

विवाद की वजह से उन्होंने मेला 18 दिन पहले ही छोड़ दिया है।

उनके जाने के बाद उनके शिविर को हटाने का काम शुरू हो गया है।

कहा- ‘दिखावे का सम्मान नहीं चाहिए’

शंकराचार्य ने बताया कि मंगलवार को प्रशासन की ओर से उन्हें एक पत्र भेजा गया था।

इसमें कहा गया था कि उन्हें पूरे सम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराया जाएगा।

लेकिन शंकराचार्य ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

उन्होंने कहा, “जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पाता। असली सम्मान तब होता है जब गलती मानकर सच्चे मन से माफी मांगी जाए। प्रस्ताव में माफी नहीं मांगी गई। अगर मैं प्रस्ताव मान लेता, तो मेरे और भक्तों के अपमान का मुद्दा दब जाता।”

Avimukteshwaranand vs Prayagraj Administration, Shankaracharya Padvi Vivad

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

पूरा मामला 18 जनवरी, मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ।

शंकराचार्य स्नान के लिए पालकी में जा रहे थे, तभी पुलिस ने उनकी पालकी रोक दी। इस पर विवाद हो गया।

शंकराचार्य के शिष्यों का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की की, शिखा पकड़कर घसीटा और अपमान किया।

इस घटना के बाद शंकराचार्य ने अपने शिविर के बाहर ही धरना शुरू कर दिया और 11 दिन तक शिविर के अंदर नहीं गए।

इस दौरान प्रशासन ने उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिसका उन्होंने जवाब दिया।

सीएम योगी पर भी साधा निशाना

विवाद तब और बढ़ गया जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ शब्द का इस्तेमाल किया।

जवाब में शंकराचार्य ने सीएम योगी की तुलना कालनेमि और मुगल बादशाह औरंगजेब से कर दी।

उन्होंने कहा, “जो मुगलों के समय हुआ था, वही आज हो रहा है। इन 11 दिनों में हमारी प्रतिष्ठा की हत्या का प्रयास हुआ। अगर यह स्थानीय प्रशासन करता तो बात अलग थी, लेकिन इसके पीछे यूपी सरकार है।”

संत समाज दो हिस्सों में बंटे

इस विवाद ने संत समाज को दो हिस्सों में बांट दिया है।

समर्थन में: द्वारका पीठ के शंकराचार्य सदानंद महाराज और पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद का साथ दिया। उनका कहना है कि यह सत्ता का अहंकार है।

Falahari Baba, Uma Bharti, resignation, Magh Mela, Prayagraj,

विरोध में: चित्रकूट के जगद्गुरु रामभद्राचार्य और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष खींद्र पुरी ने कहा कि संगम तक पालकी ले जाने का कोई नियम नहीं है और शंकराचार्य को अमर्यादित भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए था।

मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला

मारपीट के मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत की है।

शिकायत में कहा गया है कि मेला प्रशासन और पुलिस ने शंकराचार्य के धार्मिक काफिले को रोका, जबकि अन्य संतों और अखाड़ों को स्नान की अनुमति दी गई।

यह भेदभावपूर्ण है। शिकायत में निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

Shankaracharya Avimukteshwaranand, Prayagraj, Magh Mela 2026, Magh Mela Controversy, CM Yogi, Shankaracharya, Avimukteshwaranand leaves Prayagraj, up news, cm yogi, Shankaracharya Controversy

शंकराचार्य के इस कदम से माघ मेले में एक बड़ी राजनीतिक और धार्मिक बहस शुरू हो गई है।

उनके समर्थक इसे सनातन परंपरा और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं, जबकि प्रशासन का पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है।

अब देखना है कि यह विवाद आगे किस रूप में सामने आता है और सनातनी समाज इसका क्या जवाब देता है।

मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें-

शंकराचार्य विवाद: फलाहारी बाबा ने CM योगी को खून से लिखा लेटर, एक और अफसर ने दिया इस्तीफा

अविमुक्तेश्वरानंद को तीनों शंकराचार्यों का समर्थन! शिष्यों की पिटाई से नाराज PCS अफसर का इस्तीफा

‘अविमुक्तेश्वरानंद तो अभी जगद्गुरु भी नहीं, रथ पर स्नान शास्त्र विरुद्ध’- माघ मेला विवाद पर बोले रामभद्राचार्य

3 दिन से धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रशासन का नोटिस, 24 घंटे में ‘शंकराचार्य’ पदवी का प्रमाण मांगा

- Advertisement -spot_img