Avimukteshwaranand Case: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर नाबालिग बच्चों (बटुकों) के यौन शोषण के मामले में एक नया अपडेट सामने आया है।
बुधवार को प्रयागराज के तेज बहादुर सप्रू (बेली) अस्पताल में दो डॉक्टरों के एक विशेष पैनल ने बच्चों का परीक्षण और एक्स-रे किया था।
पुलिस सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस मेडिकल रिपोर्ट में बच्चों के साथ कुकर्म (यौन शोषण) होने की पुष्टि हुई है।
हालांकि, पुलिस प्रशासन अभी इस पर खुलकर बोलने से बच रहा है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट में बड़ा दावा#Shankaracharya #avimukteshwaranand pic.twitter.com/MBrSqFMQze
— NewsBook24 (@newsbook24hindi) February 26, 2026
थाना प्रभारी महेश मिश्र का कहना है कि मामला अदालत में है, इसलिए वे ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते हैं।
यह रिपोर्ट शुक्रवार को कोर्ट में पेश की जाएगी, जो इस केस की दिशा तय करने में सबसे अहम सबूत साबित हो सकती है।
पीड़ित बटुक का बयान और गंभीर आरोप
पहली बार इस मामले में एक पीड़ित बच्चा मीडिया के सामने आया।
उसने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में रोंगटे खड़े कर देने वाले दावे किए।
बच्चे का कहना है कि वह आश्रम में पढ़ाई करने गया था, लेकिन वहां उसका शोषण किया गया।

बच्चे ने सीधे तौर पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद का नाम लिया है।
बच्चे के मुताबिक, 16 जनवरी को माघ मेले के दौरान भी उसके साथ गलत काम हुआ।
उसने यह भी आरोप लगाया कि आश्रम के कुछ सेवादार (प्रकाश और अरविंद) बाहर से बच्चों को लाते थे, जिनका बाद में यौन शोषण किया जाता था।
वकील को बम से उड़ाने की धमकी
इस हाई-प्रोफाइल केस में कानून की लड़ाई लड़ रहे शंकराचार्य के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी को जान से मारने की धमकी मिली है।
बुधवार देर रात उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया, जिसमें वाराणसी कचहरी और उन्हें बम से उड़ाने की बात कही गई थी।
श्रीनाथ त्रिपाठी न केवल इस केस की पैरवी कर रहे हैं, बल्कि वे बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य भी हैं।
इस धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और धमकी देने वाले नंबर की जांच की जा रही है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी को जान से मारने की धमकी मिली है। त्रिपाठी के मोबाइल पर बुधवार देर रात ढाई बजे धमकी भरा मैसेज आया। लिखा था- वाराणसी की कचहरी को बम से उड़ा देंगे, तुम्हे भी। pic.twitter.com/8el9DYt2rx
— Khabarchi (@realkhabarchi) February 26, 2026
शंकराचार्य का पलटवार: “यह एक गहरी साजिश है”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उन्होंने कहा कि यह उत्तर प्रदेश शासन और उनके विरोधियों की एक सोची-समझी साजिश है।
शंकराचार्य के मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:
- बच्चों से संपर्क ही नहीं: उन्होंने दावा किया कि वे बच्चे कभी उनके पास रहे ही नहीं। जब बच्चे उनके पास थे ही नहीं, तो शोषण का सवाल ही नहीं उठता।
- शिकायतकर्ता पर सवाल: उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज खुद जांच के घेरे में होने चाहिए, क्योंकि बच्चे उन्हीं के संरक्षण में थे।
- कानूनी कार्रवाई: शंकराचार्य ने पॉक्सो एक्ट की धारा 22 के तहत आशुतोष महाराज के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने का केस भी किया है।
Shankaracharya Avimukteshwarananda : खुद पर लगे आरोपों पर खुलकर बोले अविमुक्तेश्वरानंद | POCSO | FIR#SwamiAvimukteshwaranandCaseControversy #UPPolice #FIR #POCSOCase #BreakingNews #PunjabKesariTv pic.twitter.com/R3A2pVv0Ah
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मामले की पृष्ठभूमि (Timeline)
यह विवाद अचानक शुरू नहीं हुआ। इसकी जड़ें जनवरी 2026 के माघ मेले से जुड़ी हैं:
- 18 जनवरी: माघ मेले में शंकराचार्य और प्रशासन के बीच तीखी बहस हुई थी।
- 24 जनवरी: जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस में यौन शोषण की शिकायत की।
- 13-21 फरवरी: बच्चों को कोर्ट में पेश किया गया और उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में FIR दर्ज हुई।
- वर्तमान स्थिति: पुलिस की टीमें वाराणसी में डेरा डाले हुए हैं।
- शंकराचार्य ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी दी है, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है।
Hypocrisy and opportunism:
When Shinde was the Chief Minister, he gave Shankaracharya Avimukteshwaranand the status of a state guest and invited him to the Varsha bungalow.
He performed puja and rituals with him.Today, that same Shankaracharya is being subjected to police… pic.twitter.com/3Cvk50ZiQI
— Sanjay Raut (@rautsanjay61) January 22, 2026
यह मामला केवल धार्मिक गुरु पर लगे आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली, बच्चों की सुरक्षा और न्यायपालिका की भूमिका भी दांव पर है।
एक तरफ जहां मेडिकल रिपोर्ट कुकर्म की बात कह रही है, वहीं दूसरी तरफ शंकराचार्य इसे अपनी छवि खराब करने का षड्यंत्र बता रहे हैं।
सच क्या है, यह तो अदालत में पेश होने वाले सबूत और पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट ही तय करेगी।


