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Ayushman Bharat Scheme: इलाज के लिए कम पड़ रहे हैं 5 लाख, कई परिवारों को खुद उठाना पड़ रहा खर्च

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ayushman Bharat Scheme: सात साल से देश के करोड़ों गरीबों के लिए वरदान साबित हो रही आयुष्मान भारत योजना के सामने एक बड़ी चुनौती है।

योजना के तहत मिलने वाली प्रति परिवार पांच लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा राशि अब कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रही है।

नतीजा यह है कि हजारों परिवारों को अपने प्रियजनों के इलाज के लिए अपनी जेब से हजारों-लाखों रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है।

किन बीमारियों में आ रही है दिक्कत?

लिवर प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण और कैंसर जैसी जटिल और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों में इलाज का खर्च आसानी से पांच लाख रुपये से ऊपर चला जाता है।

योजना में कुछ पैकेजों के खर्चे में बढ़ोतरी जरूर की गई है, लेकिन वह भी इन बीमारियों की वास्तविक लागत के आगे कम पड़ रही है।

पहले जहां मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से अतिरिक्त सहायता मिल जाती थी, वह भी अब बंद हो चुकी है, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

कुछ राज्यों ने अपनाया बेहतर रास्ता, लेकिन कुछ अभी भी पीछे

इस समस्या से निपटने के लिए कुछ राज्यों ने सक्रिय पहल की है:

  • गुजरात ने अतिरिक्त प्रीमियम देकर बीमा कवर को दस लाख रुपये तक बढ़ा दिया है।
  • राजस्थान ने अपनी मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना को इससे जोड़कर लाभार्थियों को 25 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया है।

कुछ अन्य राज्य अपनी अलग योजनाएं भी चला रहे हैं, जिससे लोगों को दोहरा लाभ मिलता है।

मध्य प्रदेश में क्यों है ठहराव?

दुर्भाग्य से, मध्य प्रदेश जैसे राज्य में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

योजना के प्रीमियम (जो अब लगभग 2000 रुपये प्रति परिवार हो गया है) में केंद्र सरकार का योगदान अभी भी 600 रुपये ही है, जिससे राज्य पर वित्तीय बोझ बढ़ता जा रहा है।

शायद यही वजह है कि राज्य सरकार बीमा राशि बढ़ाने पर विचार नहीं कर रही।

आयुष्मान भारत योजना मध्य प्रदेश के सीईओ डॉ. योगेश भरसट ने स्वीकार किया है कि अभी बीमा राशि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

उनके अनुसार, पहले यह परीक्षण (अध्ययन) किया जाएगा कि औसतन कितने परिवारों का खर्चा पांच लाख से अधिक हो रहा है, उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकेगा।

हैरानी की बात यह है कि अभी तक यह जानने का भी कोई प्रयास नहीं हुआ है कि राज्य में कितने लोग इस सीमा से प्रभावित हो रहे हैं।

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निष्कर्ष यह है कि आयुष्मान भारत योजना एक अच्छी पहल है, लेकिन बढ़ती मेडिकल महंगाई और जटिल इलाज के खर्चे को देखते हुए इसमें सुधार की तत्काल आवश्यकता है।

ताकि ‘दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना’ का लाभ वास्तव में हर जरूरतमंद तक कैशलेस और पूर्ण इलाज के रूप में पहुंच सके।

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