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बागेश्वर धाम में होगी 300 बेटियों की शादी, धीरेंद्र शास्त्री देंगे 90 लाख की सौगात

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bageshwar Dham Mass Wedding: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बागेश्वर धाम एक बार फिर मानवता और सेवा की मिसाल पेश करने जा रहा है।

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 300 निर्धन और अनाथ बेटियों का कन्यादान करेंगे।

यह आयोजन केवल एक सामूहिक विवाह नहीं, बल्कि एक भव्य उत्सव की तरह मनाया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश की कई हस्तियां और साधु-संत शामिल होंगे।

बेटियों को मिलेगा ‘भविष्य का सुरक्षा कवच’

इस बार बागेश्वर धाम ने बेटियों की विदाई को यादगार बनाने के लिए खास इंतजाम किए हैं।

हर जोड़े को दहेज के रूप में घरेलू उपयोग का सारा सामान तो दिया ही जा रहा है, साथ ही उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 30,000 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी दी जा रही है।

कुल 300 जोड़ों के लिए यह राशि करीब 90 लाख रुपये है।

यह FD 5 साल बाद मैच्योर होगी, जिससे उन परिवारों को आर्थिक मजबूती मिलेगी।

इसके अलावा, जयमाला की थाली में सिर्फ फूल नहीं, बल्कि सोने और चांदी के गहने भी होंगे।

हर बेटी को सोने की नथ, चांदी की पायल, बिछिया और गृहस्थी के लिए सोफा, डबल बेड, अलमारी, गैस चूल्हा, मिक्सर जैसे 2 लाख रुपये तक के सामान दिए जाएंगे।

कैसे हुआ बेटियों का चयन?

इस सामूहिक विवाह के लिए बागेश्वर धाम को 13 राज्यों से 1500 से अधिक प्रार्थना पत्र मिले थे।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि पात्र बेटियों की संख्या बहुत अधिक थी, लेकिन संसाधनों को देखते हुए 300 का चयन किया गया है।

चयन प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और जमीनी रही। 600 सेवादारों की एक टीम ने एक महीने तक गांव-गांव जाकर सर्वे किया।

पड़ोसियों और स्थानीय प्रतिनिधियों से जानकारी ली गई कि परिवार वाकई जरूरतमंद है या नहीं।

चयनित बेटियों में 60 ऐसी हैं जिनके माता-पिता दोनों नहीं हैं, जबकि 138 के पिता और 28 की मां नहीं हैं।

इसमें दिव्यांग बेटियां और गरीब परिवारों की लड़कियां भी शामिल हैं।

नेपाल से भी आएगी दुल्हन

बागेश्वर धाम की महिमा नेपाल तक पहुंच चुकी है। इस बार विवाह के लिए चुने गए जोड़ों में एक जोड़ा पड़ोसी देश नेपाल का भी है।

इस दुल्हन को करीब 4 साल के इंतजार के बाद बागेश्वर धाम के सामूहिक विवाह में शामिल होने का मौका मिला है।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से भी जोड़े यहां शादी के बंधन में बंधेंगे।

तीन दिनों का कार्यक्रम और वीआईपी मेहमान

शादी का यह उत्सव 13 फरवरी से शुरू होकर 15 फरवरी (महाशिवरात्रि) तक चलेगा।

  • 13 फरवरी: सभी जोड़ों का आगमन होगा। सुबह से ही हल्दी, तेल और मंडप की रस्में शुरू हो जाएंगी।
  • 14 फरवरी: यह दिन संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम रहेगा।
  • 15 फरवरी: महाशिवरात्रि के दिन मुख्य समारोह होगा। भव्य पंडाल में जयमाला होगी, फेरे होंगे और फिर बेटियों की विदाई की जाएगी।

इस आयोजन के लिए दमोह से आए 300 विशेष सेवादार हर जोड़े की मदद के लिए तैनात रहेंगे।

मेहमानों के खाने-पीने से लेकर रहने तक की पूरी व्यवस्था अलग-अलग पंडालों में की गई है।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री के कार्यालय में तैयारियों का अंबार लगा है, जहां वीवीआईपी मेहमानों को आईपैड से लिस्ट चेक कर निमंत्रण पत्र भेजे जा रहे हैं।

‘ये अब बालाजी की बेटियां हैं’

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भावुक होते हुए कहा कि ये बेटियां अब मेरी या उनके परिवार की नहीं, बल्कि ‘बागेश्वर बालाजी’ की बेटियां हैं।

इनका विवाह किसी राजा की बेटी की तरह धूमधाम से किया जाएगा।

देश के बड़े-बड़े संत और विद्वान इन बेटियों को आशीर्वाद देने पहुंचेंगे।

धाम के मैनेजमेंट के अनुसार, विदाई के समय हर बेटी की आंखों में खुशी के आंसू हों और वे सम्मान के साथ अपने ससुराल जाएं, यही हमारा लक्ष्य है।

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