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बालाघाट में विधवा बेटी का पुनर्विवाह कराने पर पिता को समाज से बाहर किया, 25,000 जुर्माना भी लगाया

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Widow Remarriage Controversy Balaghat: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने एक बार फिर समाज की संकीर्ण सोच को उजागर कर दिया है।

लांजी तहसील के मंडई टेकरी गांव में एक पिता को अपनी विधवा बेटी का घर फिर से बसाना इतना भारी पड़ गया कि समाज के ठेकेदारों ने उन्हें जाति से बाहर कर दिया और भारी जुर्माना भी लगाया है।

क्या है पूरा मामला?

73 वर्षीय बुजुर्ग मानिक सोनवाने की बेटी ममता की शादी साल 2022 में हुई थी।

लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; शादी के महज ढाई महीने बाद ही बीमारी के कारण ममता के पति का निधन हो गया।

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22 साल की उम्र में ममता विधवा हो गई और अपने मायके लौट आई।

पिता मानिक ने अपनी जवान बेटी के उजड़े हुए भविष्य को सँवारने का फैसला किया।

लगभग तीन साल के इंतजार के बाद, उन्होंने 8 जनवरी 2026 को ममता का पुनर्विवाह महाराष्ट्र के रामटेक निवासी रोशन केकवेदे के साथ पूरे रीति-रिवाज से संपन्न कराया।

समाज की ‘अजीब’ आपत्ति और फरमान

मानिक सोनवाने का आरोप है कि समाज के कुछ पदाधिकारियों ने उन्हें सलाह दी थी कि वह अपनी बेटी को “भगा दें” या वह चोरी-छिपे शादी कर ले।

लेकिन ममता और उसके पिता ने ईमानदारी का रास्ता चुना।

ममता का कहना था कि उसने कोई पाप नहीं किया है, इसलिए वह घर से भागकर नहीं बल्कि सम्मान के साथ विदा होगी।

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यही ईमानदारी समाज के ठेकेदारों को नागवार गुजरी।

16 जनवरी को समाज की एक बैठक बुलाई गई, जहां बुजुर्ग पिता को अपमानित किया गया और उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

साथ ही, परिवार को 10 साल के लिए जाति से बहिष्कृत कर दिया गया।

हद तो तब हो गई जब शादी में शामिल होने वाले अन्य रिश्तेदारों पर भी 2-2 हजार रुपये का दंड लगाया गया।

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दोहरे मापदंडों का आरोप

परिवार का कहना है कि समाज के नियम केवल बेटियों और गरीबों के लिए हैं।

घर की बहुओं का आरोप है कि अगर कोई पुरुष दूसरे समाज की लड़की ब्याह कर लाता है, तो समाज उसे स्वीकार कर लेता है।

लेकिन जब घर की बेटी को दूसरे समाज में सम्मानजनक तरीके से विदा किया जाता है, तो उसे ‘अपराध’ मान लिया जाता है।

परिवार का सवाल है—”क्या अपनी बेटी की उजड़ी जिंदगी संवारना गुनाह है?”

प्रशासन की दस्तक और कानूनी कार्रवाई

सामाजिक बहिष्कार की इस प्रताड़ना से तंग आकर मानिक सोनवाने ने जिला कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान न्याय की गुहार लगाई।

कलेक्टर मृणाल मीना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लांजी एसडीएम कमलचंद्र सिंहसार को तुरंत जांच के आदेश दिए हैं।

एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में सामाजिक बहिष्कार या वसूली का मामला सही पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज किया जाएगा।

फिलहाल प्रशासन दोनों पक्षों की काउंसलिंग और समझाइश के माध्यम से मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पीड़ित परिवार अब किसी भी कीमत पर अपनी गरिमा से समझौता करने को तैयार नहीं है।

क्षेत्रीय विधायक ने भी परिवार का समर्थन करते हुए समाज के इस फैसले को पूरी तरह गलत करार दिया है।

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