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बालाघाट में इलाज-पानी को तरसते मासूम: 31 बच्चों की मौत पर बिफरे CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके, बड़े आंदोलन का ऐलान

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Abhijit Dipke Balaghat Visit: मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला इस समय एक भीषण स्वास्थ्य संकट के दौर से गुजर रहा है।

जिले के बैहर और बिरसा ब्लॉक की अडोरी, मछुरदा, बोंदारी और कोरका जैसी दूरस्थ आदिवासी पंचायतों में पिछले तीन महीनों के भीतर 31 से अधिक मासूम बच्चों की जान जा चुकी है।

खसरा, मलेरिया, निमोनिया, कुपोषण और दूषित पानी से फैल रहे संक्रामक रोगों के कारण स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है।

इस गंभीर मामले की जमीनी हकीकत जानने और पीड़ित परिवारों से मिलने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके खुद शनिवार को बालाघाट पहुंचे।

“सरकार और अफसर मासूमों की मौत के जिम्मेदार”

बालाघाट पहुंचे अभिजीत दीपके ने सीधे तौर पर राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि आदिवासी इलाकों में रहने वाले लोग आज भी प्राथमिक और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

दीपके ने कड़े शब्दों में कहा:

एक तरफ देश में 7.8% ग्रोथ रेट का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ हमारे मूल निवासी झीरिया का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। सिर्फ एयरपोर्ट, संसद और पीएम आवास को चमकाने से देश विश्वगुरु नहीं बनेगा। देश को असली मायने में विश्वगुरु बनाना है, तो इन आदिवासी इलाकों के बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर इलाज और सुरक्षित पानी देना होगा।”

उन्होंने इस संकट के लिए राज्य के आदिवासी विकास मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और संबंधित सचिवों को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता ने आलीशान भवनों और हेलीकॉप्टरों में घूमने के लिए नहीं चुना है।

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झीरिया का पानी और ठप पड़ा राशन: बीमारियों की मुख्य वजह

बालाघाट का यह इलाका मुख्य रूप से ‘बैगा’ जनजाति का निवास स्थान है, जिसे सरकार द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) का दर्जा प्राप्त है।

इसके बावजूद जमीनी स्तर पर सुविधाएं कागजों तक ही सीमित हैं।

* दूषित पेयजल: करोड़ों रुपये की ‘नल-जल योजना’ के बावजूद कई गांवों तक नल का पानी नहीं पहुंचा है।

हैंडपंपों से पीला और दूषित पानी निकल रहा है, जिससे तंग आकर ग्रामीण और बच्चे गड्डों (झीरिया) का पानी पीने को मजबूर हैं।

* गंभीर कुपोषण और ठप राशन: बालाघाट में 5 साल तक के लगभग 17% बच्चे पहले से ही कुपोषण का शिकार हैं।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले 6 महीनों से इन प्रभावित आदिवासी इलाकों में ‘टेक होम राशन’ (पोषण आहार) का वितरण बंद था।

 * अस्पतालों पर भारी दबाव: जिला और स्थानीय अस्पतालों की हालत यह है कि 50 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में 400 से अधिक बच्चों का इलाज चल रहा है।

सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन के अनुसार, रोजाना 5 से 10 नए बच्चे भर्ती हो रहे हैं।

हाईकोर्ट का सख्त रुख और आंदोलन की चेतावनी

इस पूरे मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर बेंच) ने भी कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और बालाघाट कलेक्टर से जवाब तलब किया है।

पीड़ित गांवों के दौरे पर निकले अभिजीत दीपके ने कहा कि प्रशासन इस मामले में अब तक किसी भी अधिकारी पर जवाबदेही तय करने में नाकाम रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेपी (CJP) आदिवासी युवाओं के साथ मिलकर बालाघाट में एक बड़ा जनांदोलन खड़ा करेगी और जब तक पीड़ित परिवारों को न्याय और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

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