Tarique Rahman Bangladesh PM: बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो रही है।
लगभग दो दशकों के लंबे इंतजार और निर्वासन के बाद, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने सत्ता के गलियारों में जोरदार वापसी की है।
साल 2026 के आम चुनावों में मिली इस प्रचंड जीत ने न केवल शेख हसीना के 15 साल पुराने शासन को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि देश को 35 साल बाद एक पुरुष प्रधानमंत्री देने की तैयारी भी कर ली है।
इस जीत के महानायक बनकर उभरे हैं— तारिक रहमान।

चुनावी नतीजे: आंकड़ों की जुबानी
गुरुवार को हुए मतदान के बाद जो नतीजे सामने आए, उन्होंने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया।
कुल 299 सीटों में से BNP ने अकेले 209 सीटों पर कब्जा जमाया है, जो बहुमत के आंकड़े (150) से कहीं ज्यादा है।
वहीं, जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन ने 70 सीटों पर जीत दर्ज की है।
यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि 2008 से 2024 तक देश की कमान शेख हसीना की आवामी लीग के पास थी।
20 साल बाद BNP का यह कमबैक दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़ी हलचल है।

तारिक रहमान: निर्वासन से प्रधानमंत्री की कुर्सी तक
तारिक रहमान BNP पार्टी के चेयरपर्सन और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं।
तारिक रहमान पिछले 17 सालों से लंदन में रहकर निर्वासन का जीवन काट रहे थे।
उन पर भ्रष्टाचार से लेकर राजनीतिक साजिशों तक के कई आरोप लगे, लेकिन 2025 के अंत में उनकी स्वदेश वापसी ने BNP कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी।
उन्होंने दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर ही भारी मतों से जीत हासिल की।
अब उनका प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा है।

एक शक्तिशाली परिवार: विरासत में मिली राजनीति
तारिक रहमान के रगों में राजनीति दौड़ती है। उनका परिवार बांग्लादेश के इतिहास के सबसे प्रभावशाली परिवारों में से एक है। आइए जानते हैं उनके बारे में…
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पिता (जियाउर रहमान): ये बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख थे। उन्होंने ही BNP की स्थापना की थी। 1981 में उनकी हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद वे एक शहीद नायक के रूप में याद किए जाते हैं।
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मां (खालिदा जिया): जियाउर रहमान की मृत्यु के बाद उन्होंने पार्टी संभाली और दो बार देश की प्रधानमंत्री बनीं। वे बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं।

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पत्नी (डॉ. जुबैदा रहमान): पेशे से चिकित्सक जुबैदा ने हमेशा खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखा है, लेकिन वे तारिक के लिए एक मजबूत स्तंभ रही हैं।
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बेटी (जैमा रहमान): जैमा ने विदेश से कानून की पढ़ाई की है। हालांकि वे अभी राजनीति में नहीं हैं, लेकिन बांग्लादेश के युवाओं के बीच वे काफी लोकप्रिय हैं।

BNP के वो वादे जिन्होंने जनता का दिल जीता
तारिक रहमान की जीत के पीछे उनके वे वादे हैं, जो सीधे आम जनता की जरूरतों से जुड़े थे।
पार्टी ने अपने घोषणापत्र में ‘नए बांग्लादेश’ का खाका खींचा है:
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बुलेट ट्रेन का सपना: ढाका को देश के अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ने के लिए हाई-स्पीड रेल नेटवर्क बनाने का वादा किया गया है।
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महिला सशक्तिकरण: महिलाओं के लिए ‘फैमिली कार्ड’ और पोस्ट-ग्रेजुएशन तक मुफ्त शिक्षा का प्रावधान।
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अल्पसंख्यकों की सुरक्षा: बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के लिए विशेष सुरक्षा कानून बनाने की बात कही गई है, ताकि उनकी संपत्ति और पूजा स्थल सुरक्षित रहें।
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प्रशासनिक सुधार: न्यायपालिका को सरकार के नियंत्रण से मुक्त करना और भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना उनकी प्राथमिकता है।
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संतुलित विदेश नीति: तारिक रहमान ने साफ किया है कि बांग्लादेश किसी भी देश का ‘प्रॉक्सी’ नहीं बनेगा और अपनी संप्रभुता का सम्मान करते हुए सबके साथ रिश्ते रखेगा।

दुनिया ने किया स्वागत: मोदी, शरीफ और अमेरिका की बधाई
तारिक रहमान की जीत पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश के साथ खड़ा है।
उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई।
I convey my warm congratulations to Mr. Tarique Rahman on leading BNP to a decisive victory in the Parliamentary elections in Bangladesh.
This victory shows the trust of the people of Bangladesh in your leadership.
India will continue to stand in support of a democratic,…
— Narendra Modi (@narendramodi) February 13, 2026
वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी फोन कर उन्हें बधाई दी।
अमेरिका ने भी इस चुनाव को ऐतिहासिक बताते हुए भविष्य में सुरक्षा और खुशहाली के साझा लक्ष्यों पर साथ काम करने का भरोसा जताया है।
विवादों का साया और चुनौतियां
भले ही आज तारिक रहमान जीत का जश्न मना रहे हैं, लेकिन उनका सफर कांटों भरा रहा है।
2004 के ग्रेनेड हमले और भ्रष्टाचार के मामलों में सजायाफ्ता होने के कारण उनके विरोधियों ने हमेशा उन्हें घेरा है।
अब प्रधानमंत्री के रूप में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की चरमराई अर्थव्यवस्था को संभालना, राजनीतिक प्रतिशोध की भावना को रोकना और एक निष्पक्ष शासन देना होगा।

जश्न और जूलूस निकालने से क्यों रोका
जीत के तुरंत बाद तारिक रहमान ने जो पहला काम किया, वह था अपने कार्यकर्ताओं को शांत रखना।
उन्होंने निर्देश दिया कि कहीं भी जीत का जुलूस न निकाला जाए और न ही किसी तरह का जश्न मनाया जाए।
उन्होंने जुमे की नमाज के बाद देश की शांति के लिए दुआ करने की अपील की।
उनका यह कदम दर्शाता है कि वे अपनी छवि को एक गंभीर और जिम्मेदार राजनेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
बांग्लादेश के लिए यह एक नए सवेरे जैसा है।
35 साल बाद किसी पुरुष प्रधानमंत्री का पद संभालना और एक पुराने राजनीतिक घराने की वापसी यह बताती है कि जनता बदलाव चाहती थी।
अब देखना यह होगा कि तारिक रहमान अपने चुनावी वादों को कितनी जल्दी पूरा कर पाते हैं।


