Bhopal Illegal Colonies Action: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अवैध कॉलोनाइजरों और भूमाफियाओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए एक बड़ा अभियान छेड़ा है।
महज 48 घंटों के भीतर प्रशासन ने शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में 11 अवैध कॉलोनियों के खिलाफ पुलिस में FIR दर्ज कराई है।
इस कार्रवाई ने उन लोगों के बीच हड़कंप मचा दिया है जो कृषि भूमि को बिना डायवर्जन और अनुमति के आवासीय प्लॉट बनाकर बेच रहे हैं।
धोखे का जाल: सुविधाओं के नाम पर ठगी
भोपाल के बाहरी इलाकों जैसे परवलिया सड़क, सूखीसेवनिया और ईंटखेड़ी जैसे क्षेत्रों में भूमाफियाओं ने एक खास पैटर्न पर काम किया है।
इन लोगों ने सीधे-साधे किसानों के साथ मिलकर उनकी कृषि भूमि पर कागजी कॉलोनी काट दी।
खरीदारों को बिजली, पानी, चौड़ी सड़कें, सीवेज सिस्टम, खेल के मैदान और मंदिर जैसी मूलभूत सुविधाओं का लालच दिया गया।
मासूम जनता ने अपने जीवन भर की कमाई इन प्लॉटों में लगा दी, लेकिन उन्हें बदले में केवल रजिस्ट्री मिली।
आज ये लोग सड़क और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए तहसील और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
कार्रवाई की सुई किसानों पर क्यों?
इस पूरे अभियान में एक पेचीदा पहलू सामने आया है।
दर्ज की गई अधिकांश FIR में जमीन मालिक किसानों को आरोपी बनाया गया है।
इसके पीछे की मुख्य वजह “एग्रीमेंट का खेल” है। असल कॉलोनाइजर चालाकी से जमीन अपने नाम नहीं कराते।
वे किसानों के साथ केवल एक अनुबंध (Agreement) करते हैं और प्लॉट बेचकर मुनाफा कमा लेते हैं।
सरकारी दस्तावेजों में जमीन अब भी किसान के नाम होती है, जिसके कारण कानूनी कार्रवाई की आंच सीधे किसान तक पहुंचती है, जबकि असली मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे सुरक्षित बच निकलते हैं।
प्रशासन की रणनीति: चलेगा बुलडोजर
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देशानुसार, केवल एफआईआर पर ही कार्रवाई नहीं रुकेगी।
प्रशासन अब नगर निगम और पुलिस बल के साथ मिलकर इन अवैध कॉलोनियों में बने अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की तैयारी कर रहा है।
अवैध रूप से बनाई गई सड़कें, बाउंड्री वॉल और गेटों को तोड़ने के लिए पुलिस बल की मांग की गई है।
प्रशासन ने कुल 113 अवैध कॉलोनियों को चिह्नित किया है, जिनमें से 12 नई कॉलोनियों पर केस दर्ज करने की फाइल तैयार हो चुकी है।
कानून क्या कहता है?
मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 61-घ (3) के तहत बिना अनुमति अवैध कॉलोनी का निर्माण करना एक गंभीर अपराध है।
इसमें दोषी पाए जाने पर 3 से 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
यह एक ऐसा अपराध है जिसमें पुलिस को आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए वारंट की आवश्यकता नहीं होती।
आम जनता को सलाह
भोपाल प्रशासन की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन चुनौती यह है कि असली कॉलोनाइजरों तक कैसे पहुंचा जाए।
जब तक निवेश के पीछे छिपे सफेदपोश भूमाफिया नहीं पकड़े जाएंगे, तब तक किसानों की बलि चढ़ती रहेगी।
आम जनता के लिए भी यह एक सबक है कि किसी भी सस्ते प्लॉट के झांसे में न आएं।
जमीन खरीदने से पहले टीएनसीपी (T&CP) और रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन की जांच अवश्य करें।


