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जेपी हॉस्पिटल में टेबलेट में फफूंद के बाद अब माउथवॉश में निकला कीड़ा, मचा हड़कंप- जांच शुरू

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Insect in mouthwash JP Hospital: राजधानी भोपाल के जय प्रकाश (जेपी) जिला अस्पताल से स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की डराने वाली तस्वीरें सामने आई हैं।

महज 9 दिनों के भीतर अस्पताल से मिलने वाली दवाओं में खराबी के दो बड़े मामले सामने आए हैं, जिसने सरकारी दावों और दवाओं की क्वालिटी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

पहला मामला 3 जनवरी को प्रकाश में आया जब सतीश सेन नामक मरीज को अस्पताल से ऐसी गोलियां दी गईं, जिन पर स्पष्ट रूप से फफूंद (Fungus) लगी थी।

यह ‘डिक्लोफेनाक’ (दर्द निवारक) टैबलेट थी।

अभी यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि 6 जनवरी को मनीष नामक एक अन्य युवक ने शिकायत दर्ज कराई कि अस्पताल से मिले माउथवॉश (क्लोरहेक्सिडिन) की बोतल के अंदर एक कीड़ा तैर रहा था।

प्रशासन की कार्रवाई 

इन घटनाओं के बाद शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनीष शर्मा ने एक 5 सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया।

इस टीम में खाद्य एवं औषधि विभाग (Food and Drug Dept) के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

यह दल अस्पताल के ड्रग स्टोर और फार्मेसी के पूरे स्टॉक की बारीकी से जांच कर रहा है।

हालांकि, इस मामले में प्रशासन का रवैया थोड़ा बचावकारी नजर आ रहा है।

CMHO का कहना है कि जिस बैच की फफूंद वाली दवा की शिकायत की गई है, उसका स्टॉक तो दिसंबर में ही खत्म हो गया था।

दूसरी ओर, अस्पताल के जिम्मेदार सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है और मीडिया के सवालों से बचते नजर आ रहे हैं।

नमी और स्टोर की बदहाली

जांच के दौरान स्टोर रूम के कर्मचारियों ने एक चौंकाने वाली बात बताई।

अस्पताल परिसर और ड्रग स्टोर की दीवारों पर भारी नमी (Moisture) रहती है।

कर्मचारियों का दावा है कि उन्होंने कई बार इस बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया है, क्योंकि नमी की वजह से दवाएं खराब होने का खतरा बना रहता है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

चिंता का विषय

मध्य प्रदेश पहले ही जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौत का दंश झेल चुका है।

ऐसे में राजधानी के मुख्य अस्पताल में इस तरह की लापरवाही प्रदेश की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करती है।

वर्तमान में जांच टीम सैंपल लेकर लैब भेज रही है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही असली स्थिति साफ हो पाएगी।

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