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भोपाल में भी ‘जहरीले’ पानी का संकट: 22 वार्डों की 5 लाख आबादी पर मंडरा रहा दूषित पानी का खतरा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bhopal contaminated water: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 17 लोगों की जान जा चुकी है।

अब राजधानी भोपाल के खानूगांव क्षेत्र में भी ऐसा ही खतरा मंडरा रहा है।

दरअसल, खानूगांव की पार्षद रेहाना सुल्तान के प्रतिनिधि मोहम्मद जहीर ने एक चौंकाने वाला वीडियो सार्वजनिक किया है।

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि सीवेज का गंदा पानी सीधे उस कुएं में मिल रहा है, जिससे करीब 2000 लोगों को पीने के पानी की सप्लाई की जाती है।

अधिकारियों की बेरुखी और जनता का आक्रोश

पार्षद प्रतिनिधि का आरोप है कि पिछले 15 दिनों से इस समस्या की लिखित शिकायत नगर निगम को की जा रही है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।

स्थिति इतनी खराब हो गई है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों का फोन उठाना तक बंद कर दिया है।

लोग मजबूरन गंदा पानी पी रहे हैं, जिससे इलाके में हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।

स्थानीय निवासी अब नगर निगम के खिलाफ बड़े प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

भोपाल के 22 वार्ड ‘डेंजर जोन’ में

सिर्फ खानूगांव ही नहीं, बल्कि भोपाल के 22 वार्ड ऐसे हैं जो इस समय खतरे के निशान पर हैं।

नगर निगम की जांच में सामने आया है कि पुराने भोपाल के कई इलाकों में पानी की पाइपलाइन और सीवेज लाइन एक साथ बिछी हुई हैं।

लगभग 400 किलोमीटर लंबी यह लाइनें लोहे की हैं और अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं।

जंग लगने के कारण इनमें जगह-जगह लीकेज हैं, जिनसे सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा है।

प्रमुख प्रभावित क्षेत्र:

शहर के 5 जोन में पानी की पाइप लाइन पुरानी हो चुकी है।

यह इलाके हैं जोन 3 के बाबू जगजीवन राम, नारियल खेड़ा, गीतांजलि

जोन 4 के जेपी नगर, मोतीलाल नेहरू, इब्राहिम गंज,

जोन-5 के रॉयल मार्केट, बाग मुंशी हुसैन, शाहजहांनाबाद, लाल बहादुर शास्त्री, मोती मस्जिद, इस्लामपुर,

जोन 16 के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, राजीव गांधी, भोपाल मेमोरियल, भानपुर 

जोन-17 के बड़वाई, छोला, रूसल्ली, करोंद और नवीबाग जैसे इलाकों में ज्यादा परेशानी है।

इसके अलावा देवकी नगर, अंबेडकर नगर और चौकसे नगर में भी लीकेज सबसे ज्यादा होते हैं।

सुधार के लिए 500 करोड़ की जरूरत

नगर निगम के अनुसार, शहर के कुल 2.71 लाख नल कनेक्शनों में से करीब 75 हजार पाइपलाइनों को तुरंत बदलने की जरूरत है।

इस पूरे ढांचे को ठीक करने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का बजट चाहिए।

हालांकि, अमृत-2 योजना के तहत 750 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह रफ्तार धीमी जान पड़ती है।

निगम का दावा और जमीनी हकीकत

हैरानी की बात यह है कि नगर निगम का कहना है कि उन्होंने शहर भर से 1000 पानी के सैंपल लिए हैं और सभी ‘पास’ हुए हैं।

लेकिन खानूगांव के वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों की शिकायतें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।

वर्तमान में शहर को रोजाना 450 मिलियन लीटर पानी सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन अगर पाइपलाइन का लीकेज और सीवेज का रिसाव बंद नहीं हुआ, तो यह बड़ी आबादी के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

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