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भोपाल-लखनऊ वंदे भारत का इंतजार और बढ़ा, 3 साल में भी नहीं बनी 700 मीटर की पिट लाइन

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bhopal Lucknow Vande Bharat हाल ही में दिल्ली रूट के लिए भोपाल आई 20 कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के नए रैक को 15 दिनों के इंतजार के बाद वापस वाराणसी भेज दिया गया।

इसका मुख्य कारण रानी कमलापति कोचिंग डिपो में 700 मीटर लंबी नई पिट लाइन का तैयार न होना है।

पिट लाइन वह जगह होती है जहां ट्रेन के नीचे के हिस्सों जैसे ब्रेक सिस्टम, इलेक्ट्रिकल वायरिंग और सेफ्टी उपकरणों की बारीकी से जांच की जाती है।

चूंकि वंदे भारत एक हाई-टेक ट्रेन है, बिना उचित मेंटेनेंस सुविधा के इसे चलाना सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा है।

लागत हुई दोगुनी, कछुआ चाल से काम

मई 2023 में शुरू हुआ यह निर्माण कार्य अब तक अधूरा है।

हैरानी की बात यह है कि जिस रानी कमलापति स्टेशन को पीपीपी मॉडल पर महज 4 साल में भव्य रूप दे दिया गया, वहां एक पिट लाइन 3 साल में भी पूरी नहीं हो सकी।

इस देरी की वजह से प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई है।

वर्तमान में इस पर 14.34 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

हालांकि, अधिकारी दावा कर रहे हैं कि 95% काम पूरा हो चुका है और मार्च 2026 तक फिनिशिंग वर्क निपटा लिया जाएगा, लेकिन यात्रियों का भरोसा अब टूटने लगा है।

प्रस्तावित थीं लखनऊ और पटना वंदे भारत

योजना के अनुसार, नवंबर 2024 में भोपाल से लखनऊ और पटना के लिए वंदे भारत शुरू होनी थी।

पटना रूट के लिए ट्रायल की तारीखें भी तय थीं, लेकिन पिट लाइन के अभाव में सब कुछ ठप पड़ गया।

अब 2026 की शुरुआत हो चुकी है, और भोपालवासी अब भी केवल पुरानी ट्रेनों के भरोसे हैं।

क्यों है यह ट्रेन जरूरी?

सलाहकार समिति के सदस्य मुकेश अवस्थी के अनुसार, भोपाल-लखनऊ वंदे भारत शुरू होने से पुष्पक और कुशीनगर एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों पर भारी दबाव कम होगा।

यह न केवल यात्रियों का समय बचाएगी, बल्कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी को एक नया आयाम देगी।

जब तक सिविल और इलेक्ट्रिकल काम (जो क्रमशः गुना और भोपाल की निजी कंपनियों को सौंपे गए हैं) पूरे नहीं होते, तब तक आधुनिक सफर का यह सपना अधूरा ही रहेगा।

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