Bhopal Nagar Nigam Beef Controversy: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नगर निगम की बजट बैठक इस बार विकास के मुद्दों से ज्यादा हंगामे और व्यक्तिगत आरोपों की भेंट चढ़ गई।
करीब 3500 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट पेश होने से पहले ही सदन में ‘गोमांस’ और ‘भ्रष्टाचार’ के मुद्दों पर जमकर बवाल हुआ।
आलम यह था कि पक्ष और विपक्ष के बीच की तल्खी इतनी बढ़ गई कि बात चाय-नाश्ते और खाने के निजी तानों तक जा पहुंची।
गोमांस कांड और विपक्ष का हमला
बैठक की शुरुआत होते ही प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष शाबिस्ता जकी ने शहर के चर्चित 26 टन गोमांस तस्करी मामले को उठाया।
उन्होंने सीधे तौर पर नगर निगम के अधिकारियों और सत्ता पक्ष को घेरते हुए सवाल किया कि अब तक इस मामले के मुख्य जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जकी का आरोप था कि आरोपी असलम कुरैशी उर्फ ‘असलम चमड़ा’ के खिलाफ निगम ने अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कराई है।

उन्होंने पिछली बैठक में बनी जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक न होने पर भी सवाल उठाए।
इस मुद्दे पर महापौर मालती राय ने सफाई देते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया।
उन्होंने कहा कि जिस स्लॉटर हाउस या टेंडर की बात हो रही है, वह उनके कार्यकाल का नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ये टेंडर उनके महापौर बनने से पहले ही हो चुके थे।
बीजेपी पार्षदों का कड़ा रुख
हैरानी की बात यह रही कि गोमांस के मुद्दे पर केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि बीजेपी के वरिष्ठ पार्षदों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की।
सुरेंद्र बाडिका और विलास राव घड़गे जैसे सीनियर पार्षदों ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
सदन में माहौल तब और गरमा गया जब कांग्रेस पार्षद मोहम्मद सरवर ने मांग रखी कि नगर निगम परिषद को एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजना चाहिए ताकि ‘गाय को राष्ट्रीय पशु’ घोषित किया जा सके।

चाय-नाश्ते पर चली जुबानी जंग
बहस के बीच अजीबोगरीब स्थिति तब बनी जब चर्चा गोमांस से हटकर नगर निगम के खान-पान पर आ गई।
नेता प्रतिपक्ष शाबिस्ता जकी ने सदन में कहा, “मैं नगर निगम की एक चाय तक नहीं पीती हूं।”
इस पर एमआईसी मेंबर सुषमा बाविसा भड़क गईं और उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, “आप झूठ क्यों बोल रही हैं?
आपने यहां खाना खाया है। क्या वे लोग चोर हैं जिन्होंने यहां चाय पी या खाना खाया?”
इस मामूली बात पर दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बहस होती रही।
अधूरे वादे और बजट का गणित
हंगामे के बीच भोपाल ‘शहर सरकार’ ने करीब 3500 करोड़ का बजट पेश करने की तैयारी की है। हालांकि, शहर की जनता के मन में पुराने वादों को लेकर संशय है।
पिछले दो सालों से 7 हेरिटेज गेट बनाने और गीता भवन के निर्माण जैसे बड़े वादे अधूरे पड़े हैं।
एक साल में केवल दो गेटों का भूमिपूजन हो सका है।
पिछले बजट में प्रॉपर्टी टैक्स में 10% और जलकर में 15% की बढ़ोतरी की गई थी, जिससे जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा है, जबकि सुविधाएँ वैसी की वैसी ही हैं।
हेमंत कटारे के गंभीर आरोप
सदन के बाहर कांग्रेस के उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी पर तीखा प्रहार किया।
उन्होंने आरोपी असलम चमड़ा को जमानत मिलने पर तंज कसते हुए कहा कि “बीजेपी वाले सिर्फ नारे लगाते रह गए और उनके नेताओं की मेहरबानी से आरोपी को जमानत मिल गई।”
कटारे ने नगर निगम के एक ‘गर्ग’ सरनेम वाले इंजीनियर की भूमिका पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि करोड़ों के लेन-देन के तार हैदराबाद तक जुड़े हैं।
असलम चमड़ा का ‘चमड़ा उधेड़ने’ की बात करने वाले भाजपाई मित्रों, सच्चाई ये है कि आपके नेताओं की कृपा से उसे जमानत मिल गई और आप सड़क पर नारेबाज़ी करते रह गए!
पूरे खेल की चाबी उस निगम के गर्ग इंजीनियर के पास है, जिसका नाम करोड़ों की लेन-देन में सामने आ रहा है—सिर्फ उसी की निष्पक्ष… pic.twitter.com/Cuv5Bpq2yQ
— Hemant Satyadev Katare (@HemantKatareMP) March 23, 2026
उन्होंने ‘टोपी वाले मंत्री’ की भूमिका की भी जांच की मांग की है।
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