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भोपाल का ‘आधुनिक’ कत्लखाना बना विवाद की वजह: 26 टन गोमांस मिलने से मचा हड़कंप

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bhopal Slaughter House Case: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर गोवंश की सुरक्षा और मांस तस्करी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

शहर के जिंसी इलाके में हाल ही में 35 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुए नगर निगम के ‘आधुनिक स्लॉटर हाउस’ से निकले एक ट्रक में भारी मात्रा में गोमांस होने की पुष्टि हुई है।

इस घटना ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि शहर में सांप्रदायिक और राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ा दी है।

क्या है पूरा मामला?

बीती बुधवार की रात, पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ठीक सामने हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मांस से लदे एक ट्रक को रोका।

कार्यकर्ताओं का दावा था कि इस ट्रक में गोमांस भरकर उसे हैदराबाद और मुंबई के रास्ते विदेश भेजने की तैयारी थी।

ट्रक में लगभग 26 टन मांस पैकेटों में बंद था।

प्राथमिक जांच और लैब रिपोर्ट के बाद यह पुष्टि हुई कि जब्त किया गया मांस गोमांस ही है।

मामला सामने आते ही नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया।

जिस आधुनिक स्लॉटर हाउस से यह ट्रक निकला था, उसे निगम ने आनन-फानन में सील कर दिया है।

इसके संचालक असलम कुरैशी (जो असलम चमड़ा के नाम से भी जाना जाता है) को पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है।

विवादित ठेकेदार को कैसे मिला काम?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी लापरवाही नगर निगम की कार्यप्रणाली पर दिख रही है।

आरोपी ठेकेदार असलम कुरैशी पिछले 30 सालों से शहर में मृत पशुओं को उठाने का काम कर रहा है।

तीन साल पहले भी उस पर गंभीर आरोप लगे थे, जब भोपाल से 25 किलोमीटर दूर जीवदया गोशाला के पास मृत गायों के शवों का अंबार मिला था।

उस वक्त जांच में पाया गया था कि ठेकेदार ने नियमों को ताक पर रखकर शवों को खुले में फेंक दिया था।

हैरानी की बात यह है कि जिस व्यक्ति का रिकॉर्ड दागदार था, उसे ही नगर निगम की ‘मेयर इन काउंसिल’ (MIC) ने 35 करोड़ के नए आधुनिक स्लॉटर हाउस के संचालन का जिम्मा सौंप दिया।

अब कांग्रेस और हिंदूवादी संगठन यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किस रसूख के दम पर उसे यह टेंडर मिला?

राजनीतिक घेराव और प्रदर्शन

शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के माता मंदिर स्थित कार्यालय का जोरदार घेराव किया।

प्रदेश महामंत्री अमित शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और मांग की कि केवल स्लॉटर हाउस सील करना काफी नहीं है, बल्कि आरोपी ठेकेदार के घर पर बुलडोजर चलना चाहिए।

कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के राज में राजधानी के बीचों-बीच गोमांस की तस्करी हो रही है और इसमें बड़े अधिकारियों व नेताओं का संरक्षण प्राप्त है।

दूसरी ओर, निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की बात कही है, लेकिन जवाबदेही तय करने के सवाल पर अधिकारी अभी भी गोल-मोल जवाब दे रहे हैं।

अपर आयुक्त हर्षित तिवारी ने केवल इतना कहा कि शवों के निपटान के नियम तय हैं, लेकिन वे नियम धरातल पर कैसे लागू हो रहे थे, इस पर चुप्पी साध ली।

वर्तमान स्थिति

फिलहाल, भोपाल का आधुनिक स्लॉटर हाउस बंद है और पुलिस मांस की पूरी सप्लाई चेन की जांच कर रही है।

यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में मांस कहां से आ रहा था और पैकिंग की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था।

मध्य प्रदेश में जहां 1700 से अधिक गोशालाएं सरकारी अनुदान पर चल रही हैं, वहां राजधानी में ऐसा मामला सामने आना प्रशासन की बड़ी विफलता माना जा रहा है।

जनता और विपक्षी दल अब दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की बाट जोह रहे हैं।

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