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भोपाल में OlA-रैपिडो की प्राइवेट बाइक्स पर RTO का शिकंजा: 10 हजार में से सिर्फ 300 ही वैध, जानें आपकी राइड पर क्या पड़ेगा असर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

RTO Action on Bike Taxi: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अगर आप रोज ओला या रैपिडो से बाइक टैक्सी बुक करके दफ्तर या कॉलेज जाते हैं, तो यह खबर आपके काम की है।

आने वाले दिनों में आपको बाइक टैक्सी मिलने में परेशानी हो सकती है या फिर कैंसिलेशन की समस्या बढ़ सकती है।

भोपाल परिवहन विभाग (RTO) ने एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स पर प्राइवेट (व्हाइट) नंबर प्लेट वाली बाइकों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है।

RTO का साफ कहना है कि सड़कों पर सिर्फ वही बाइक टैक्सी चल सकेंगी, जिनके पास कमर्शियल (येलो) नंबर प्लेट और वैध दस्तावेज होंगे।

10 हजार बाइक्स मैदान में, लेकिन वैध सिर्फ 300

भोपाल शहर में इस समय लगभग 10 हजार से अधिक दोपहिया वाहन ओला और रैपिडो जैसे ऐप के जरिए बाइक टैक्सी के रूप में चलाए जा रहे हैं।

चिंता की बात यह है कि आरटीओ के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक शहर में कमर्शियल नंबर वाली अधिकृत बाइक टैक्सी की संख्या महज 200 से 300 के आसपास ही है।

यानी रोजाना हजारों की संख्या में ऐसी प्राइवेट बाइक्स यात्रियों को ढो रही हैं, जिनके पास इसके लिए जरूरी कानूनी इजाजत नहीं है।

टैक्सी यूनियनों की हड़ताल और RTO का फैसला

यह पूरा मामला भोपाल में 18 और 19 अगस्त को हुई टैक्सी चालकों की हड़ताल से जुड़ा है।

टैक्सी यूनियन कल्याण समिति के वरिष्ठ राष्ट्रीय सचिव नफीस उद्दीन और अन्य यूनियन पदाधिकारियों ने इस हड़ताल के दौरान एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी और गैर-कानूनी संचालन का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था।

टैक्सी यूनियनों का तर्क है कि जो चालक नियम मानकर कमर्शियल गाड़ियां चलाते हैं, उन्हें हर साल भारी टैक्स, परमिट फीस, वाहन फिटनेस टेस्ट और कमर्शियल इंश्योरेंस का खर्च उठाना पड़ता है।

दूसरी ओर, प्राइवेट नंबर प्लेट वाले लोग बिना ये औपचारिकताएं पूरी किए सवारियां ढो रहे हैं।

इससे नियम का पालन करने वाले कमर्शियल टैक्सी और ऑटो चालकों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा था।

RTO जितेंद्र शर्मा ने यूनियनों की मांगों का संज्ञान लेते हुए साफ कर दिया है कि एग्रीगेटर कंपनियों को सिर्फ वैध कमर्शियल वाहनों को ही जोड़ने की अनुमति है।

यात्रियों और राइडर्स पर क्या असर पड़ेगा?

* रजिस्टर चालकों के लिए जोखिम: अगर कोई प्राइवेट बाइक चालक सवारी ले जाते हुए पाया गया, तो RTO उसका चालान कर सकता है और वाहन जब्त भी हो सकता है।

* राइड्स की कमी: RTO की सख्ती से प्राइवेट बाइक चालक सड़कों पर निकलने से कतराएंगे, जिससे ऐप पर उपलब्ध बाइक्स की संख्या में बड़ी गिरावट आ सकती है। Peak hours में राइड मिलने में समय लग सकता है।

* सेवा पूरी तरह बंद नहीं होगी: बाइक टैक्सी सर्विस पूरी तरह से बंद नहीं होगी। जिन चालकों के पास कमर्शियल नंबर, परमिट और बीमा मौजूद है, वे अपनी सेवाएं जारी रख सकेंगे।

विभाग का कहना है कि नियमों का पालन कराना सुरक्षा और निष्पक्ष व्यापार दोनों के लिहाज से बेहद जरूरी है।

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