Vijay Mewada Murder Case: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों एक सनसनीखेज हत्याकांड और उसके बाद उपजे तनाव की चपेट में है।
होटल संचालक विजय मेवाड़ा की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीसरे मुख्य आरोपी, आसिफ उर्फ ‘आसिफ बम’ का शॉर्ट एनकाउंटर कर दिया है।

कैसे हुआ एनकाउंटर
घटना बुधवार की है जब पुलिस फरार आरोपी आसिफ को गिरफ्तार कर थाने ले जा रही थी।
पुलिस के मुताबिक, जब आरोपी को रातीबड़ इलाके के पास से ले जाया जा रहा था, तब उसने अचानक एक पुलिसकर्मी की पिस्टल छीन ली और पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।
खुद के बचाव और आरोपी को भागने से रोकने के लिए पुलिस ने जवाबी फायरिंग की।

इस मुठभेड़ में आसिफ के पैर में गोली लगी है।
घायल अवस्था में उसे तुरंत भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका इलाज चल रहा है।
पुलिस अब उसे कोर्ट में पेश करने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।

हत्या की खौफनाक रात
यह पूरा विवाद भोपाल के अशोका गार्डन थाना क्षेत्र के प्रभात पेट्रोल पंप के पास शुरू हुआ था।
बताया जा रहा है कि विजय मेवाड़ा और आरोपियों के बीच किसी मामूली बात को लेकर कहासुनी हुई थी।
देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने विजय पर धारदार हथियार (गुप्ती) से हमला कर दिया।
हमलावरों ने विजय के पेट और छाती पर कई वार किए।

खून से लथपथ विजय को स्थानीय लोग हमीदिया अस्पताल ले गए, लेकिन घाव इतने गहरे थे कि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी।
पुलिस ने इस मामले में पहले ही दो आरोपियों, फरमान और इमरान को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन आसिफ फरार था।
पुलिस ने उस पर 30 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था।

सड़कों पर आक्रोश, पुलिस ने भांजी लाठियां
विजय मेवाड़ा की हत्या के बाद भोपाल के हिंदू समाज और विभिन्न संगठनों में भारी नाराजगी है।
बुधवार को बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और आरोपियों के एनकाउंटर व उनके अवैध मकानों को जमींदोज करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री निवास (CM House) की ओर कूच किया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अपराधियों में कानून का खौफ खत्म हो गया है, इसलिए अब ‘बुलडोजर न्याय’ ही एकमात्र रास्ता है।
जब प्रदर्शनकारी पॉलिटेक्निक चौराहे पर पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की।
माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और प्रदर्शनकारियों को लाठियां चलाकर खदेड़ दिया।
हालांकि, पुलिस ने बाद में परिजनों के पांच प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने की अनुमति दी।

मंत्री विश्वास सारंग का कड़ा रुख
क्षेत्रीय विधायक और मंत्री विश्वास कैलाश सारंग भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे।
उन्होंने कलेक्टर को फोन पर सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अपराधियों के खिलाफ ढिलाई न बरती जाए और तुरंत बुलडोजर की कार्रवाई की जाए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “ऐसी कार्रवाई करो कि अपराधियों की आने वाली पीढ़ियां भी याद रखें।”
मंत्री के इस आदेश के बाद प्रशासन ने शहर के बदमाशों की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है।

फिलहाल, भोपाल के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात है और हाई अलर्ट घोषित किया गया है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
