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CM नीतीश कुमार ने किया राज्यसभा जाने का ऐलान, आखिर क्या है इस्तीफे की असली वजह?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

CM Nitish Kumar Rajya Sabha: बिहार की राजनीति में 5 मार्च को ऐसा भूचाल आया है जिसने न केवल पटना से दिल्ली तक के गलियारों को हिला दिया है, बल्कि जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर भी एक बड़ा विद्रोह पैदा कर दिया है।

10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही समय बाद, नीतीश कुमार का अचानक मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने का फैसला हर किसी के लिए चौंकाने वाला है।

आइए इस पूरे घटनाक्रम को समझते हैं कि आखिर बिहार की सत्ता में यह ‘पर्दे के पीछे’ का खेल क्या है और इसके पीछे कौन-कौन से कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं।

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नीतीश कुमार का पोस्ट

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद सोशल मीडिया (X) पर इस बात की पुष्टि की कि वे राज्यसभा जाना चाहते हैं।

उन्होंने लिखा कि वे अपने संसदीय जीवन के दौरान संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) और बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) का सदस्य बनने का सपना देखते थे।

इसी इच्छा को पूरा करने के लिए वे राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए नामांकन दाखिल कर रहे हैं।

इस तरह वे चारों सदनों का अनुभव रखने वाले गिने-चुने नेताओं में शामिल होना चाहते हैं।

लेकिन राजनीति में जो दिखता है, वह हमेशा सच नहीं होता।

जानकारों का मानना है कि 75 वर्ष की आयु में इस तरह का अचानक फैसला लेना महज ‘इच्छा’ नहीं, बल्कि एक गहरी राजनैतिक मजबूरी या सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

इस्तीफे के पीछे की असली वजह क्या है?

नीतीश कुमार के इस अचानक आए फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीन तरह की चर्चाएं सबसे तेज हैं:

  1. स्वास्थ्य संबंधी कारण

चर्चा है कि 75 वर्षीय नीतीश कुमार पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और वे अब केंद्र की शांत राजनीति में जाना चाहते हैं।

2. पुत्र निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। चर्चा है कि नीतीश के दिल्ली जाने के बदले निशांत को बिहार में उपमुख्यमंत्री का पद दिया जा सकता है।

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3. भाजपा का दबाव या ‘ऑपरेशन लोटस’

विपक्षी दल आरजेडी और कांग्रेस का आरोप है कि यह नीतीश की इच्छा नहीं बल्कि भाजपा का दबाव है। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी ने नीतीश को ‘कैद’ कर लिया है और जबरन उन्हें राज्यसभा भेजकर बिहार की सत्ता पर पूरी तरह कब्जा करना चाहती है।

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4. पार्टी के भीतर ‘भीतरघात’ और शराब माफिया का एंगल

JDU के नाराज कार्यकर्ताओं ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि ललन सिंह, संजय झा, विजय चौधरी और ललन सराफ जैसे करीबियों ने नीतीश कुमार को गुमराह किया है।

कुछ कार्यकर्ताओं ने तो यहां तक आरोप लगाया कि बिहार में ‘शराबबंदी’ खत्म करने के लिए शराब माफियाओं के साथ करोड़ों की डील हुई है, और यह तभी संभव है जब नीतीश कुमार पद से हटें।

5. 2026 का राज्यसभा चुनाव समीकरण

नीतीश कुमार के साथ-साथ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी राज्यसभा जा रहे हैं। इससे साफ है कि केंद्र और राज्य के बीच शक्ति संतुलन को नए सिरे से परिभाषित किया जा रहा है।

जदयू (JDU) में बगावत और आक्रोश

जैसे ही नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर फैली, पटना स्थित जदयू कार्यालय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।

पार्टी कार्यकर्ता इस फैसले से बेहद नाराज हैं।

  • कार्यकर्ताओं का हमला: नाराज कार्यकर्ताओं ने अपने ही पार्टी के एक विधायक की गाड़ी पर हमला कर दिया और तोड़फोड़ की।

नेताओं के खिलाफ नारेबाजी: कार्यकर्ताओं का गुस्सा पार्टी के बड़े नेताओं जैसे ललन सिंह, संजय झा और विजय चौधरी पर फूट रहा है।

कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इन नेताओं ने ‘शराब माफिया’ के साथ मिलकर नीतीश कुमार को पद से हटाने की साजिश रची है ताकि राज्य में दोबारा शराबबंदी खत्म की जा सके।

  • जदयू नेता राजीव रंजन पटेल मीडिया के सामने फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने कहा कि पूरा बिहार इस फैसले से मर्माहत है।

विपक्ष का प्रहार

आरजेडी सांसद मनोज झा ने इस पूरी घटना की तुलना वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के ‘अपहरण’ से की है।

वहीं, पप्पू यादव ने एक अलग ही दांव चलते हुए लालू यादव और चिराग पासवान से अपील की है कि वे सब मिलकर नीतीश के बेटे निशांत कुमार को बिना शर्त मुख्यमंत्री पद के लिए समर्थन दें, ताकि भाजपा को सत्ता से दूर रखा जा सके।

आगे क्या होगा?

नीतीश कुमार जल्द ही राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे।

उसी समय बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर भी अंतिम मुहर लगने की संभावना है।

फिलहाल, पटना की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पूरे राज्य की नजरें राजभवन और विधानसभा पर टिकी हैं।

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