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बिहार ज्वेलर्स एसोसिएशन ने हिजाब, नकाब और हेलमेट पर लगाया प्रतिबंध, RJD और BJP में छिड़ी जुबानी जंग

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bihar jewelry shop hijab ban: बिहार के सोना व्यवसायियों ने अपनी सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है।

उत्तर प्रदेश के झांसी की तर्ज पर अब बिहार ज्वेलर्स एसोसिएशन ने भी राज्य भर की ज्वेलरी दुकानों में हिजाब, नकाब, घूंघट और हेलमेट पहनकर आने वाले ग्राहकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है।

बुधवार, 7 जनवरी 2026 को लिया गया यह फैसला अब राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर चुका है।

सुरक्षा कारणों से लिया गया निर्णय

ऑल इंडिया गोल्ड एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा के अनुसार, हाल के दिनों में बिहार में सर्राफा दुकानों में लूटपाट और चोरी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं

। अपराधी अक्सर अपनी पहचान छिपाने के लिए नकाब, हेलमेट, मफलर या मास्क का सहारा लेते हैं।

सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद अपराधियों के चेहरे ढके होने के कारण पुलिस उन्हें पकड़ने में नाकाम रहती है।

एसोसिएशन का कहना है कि यह नियम किसी विशेष धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है।

दुकानों के बाहर स्पष्ट रूप से पोस्टर लगाए जा रहे हैं कि सुरक्षा के मद्देनजर ग्राहकों को अपना चेहरा ‘आइडेंटिफाई’ यानी पहचान कराना अनिवार्य होगा।

इसमें महिलाओं से हिजाब या घूंघट हटाने और पुरुषों से हेलमेट या मुरेठा (साफा) उतारने का अनुरोध किया जा रहा है।

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ज्वेलर्स की राय: सुरक्षा सर्वोपरि

राज्य के विभिन्न शहरों से ज्वेलर्स ने इस फैसले का समर्थन किया है:

  • गया: स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि जब पुलिस पहचान पूछती है, तो हमारे पास कोई जवाब नहीं होता। पहचान जाहिर करना सबकी सुरक्षा के हित में है।
  • कटिहार: मुस्लिम समुदाय से आने वाले ज्वेलरी शॉप मालिकों ने भी इसे सुरक्षा के लिहाज से सही कदम बताया है।
  • समस्तीपुर: हालांकि कुछ व्यापारियों को डर है कि इससे कारोबार पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन वे मानते हैं कि चोरी की वारदातों को रोकने के लिए यह जरूरी है।

राजनीतिक गलियारों में उबाल

जैसे ही यह खबर सामने आई, बिहार की राजनीति गरमा गई।

विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है।

राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि सुरक्षा के नाम पर विशेष रूप से हिजाब और नकाब को निशाना बनाया जा रहा है, जो असंवैधानिक है। उन्होंने इसे भाजपा और आरएसएस के एजेंडे का हिस्सा बताया।

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वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि अपराधियों से निपटने के लिए यह कदम जरूरी है।

भाजपा प्रवक्ता अरविंद सिंह ने तीखे लहजे में कहा कि “यह भारत है, कोई इस्लामिक देश नहीं।”

उन्होंने तर्क दिया कि ज्वेलर्स का दर्द वही समझ सकता है जिसकी दुकान लूटी गई हो।

AIMIM ने भी इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला कदम बताया है।

कानूनी और व्यावहारिक पक्ष

कानूनी विशेषज्ञों और सुरक्षा जानकारों का मानना है कि निजी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपनी सुरक्षा के लिए नियम बनाने का अधिकार है।

हालांकि, इसे लागू करते समय इस बात का ध्यान रखना होगा कि ग्राहकों की गरिमा को ठेस न पहुंचे।

अधिकांश दुकानों ने अब महिला गार्ड तैनात करने की योजना बनाई है जो महिला ग्राहकों की पहचान सुनिश्चित कर सकेंगी।

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बिहार में लिया गया यह फैसला सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच एक नई बहस को जन्म दे चुका है।

जहां एक तरफ सर्राफा व्यापारी अपनी जान-माल की रक्षा के लिए इसे अनिवार्य बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक दल इसे धार्मिक चश्मे से देख रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि आम जनता इस बदलाव को किस तरह स्वीकार करती है।

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