Prince Andrew Epstein Files: ब्रिटेन के शाही परिवार के लिए साल 2026 की शुरुआत किसी बुरे सपने जैसी रही है।
किंग चार्ल्स-III के छोटे भाई, जिन्हें ‘प्रिंस एंड्रयू’ के नाम से जाना जाता है, अब कानून की गिरफ्त में हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उनकी गिरफ्तारी उनके 66वें जन्मदिन के मौके पर हुई।
जब वह सैंड्रिंघम स्थित अपने आवास पर जश्न की तैयारी कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

यह गिरफ्तारी केवल एक आरोप के आधार पर नहीं, बल्कि सालों से चल रहे विवादों और हाल ही में उजागर हुई ‘एपस्टीन फाइल्स’ के नए सबूतों का परिणाम मानी जा रही है।
क्या है गिरफ्तारी की मुख्य वजह?
बीबीसी और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एंड्रयू पर मुख्य रूप से ‘सार्वजनिक पद के दुरुपयोग’ (Misconduct in Public Office) का आरोप है।
बताया जा रहा है कि जब एंड्रयू ब्रिटेन के विशेष व्यापार दूत (Trade Envoy) के रूप में काम कर रहे थे, तब उन्होंने अपने पद की गरिमा के खिलाफ जाकर कुख्यात अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ संवेदनशील व्यापारिक दस्तावेज साझा किए थे।
ब्रिटेन के नियमों के अनुसार, ट्रेड एंबेसडर को अपनी यात्राओं और बैठकों की जानकारी बेहद गुप्त रखनी होती है।
🚨L’ex principe Andrea è stato arrestato per aver venduto segreti di Stato a Epstein.
‼️Finalmente un topo fuori dalla fogna.
Ma la fogna è piena.🔥Ora vogliamo l’arresto degli altri pedofili che hanno abusato di bambine indifese.#EpsteinFiles #PrinceAndrew pic.twitter.com/wIxgdXHAY3
— Anonymous Italia 🇮🇹 (@ANONYM0USITALIA) February 19, 2026
आरोप है कि एंड्रयू ने इन नियमों को ताक पर रखकर एपस्टीन के निजी हितों को फायदा पहुंचाया।
लंदन टाइम्स के मुताबिक, पूर्व बोर्ड ऑफ ट्रेड प्रेसिडेंट विंस केबल ने भी इन आरोपों की पुष्टि की है।
वर्जीनिया गिफ्रे की ‘खौफनाक’ यादें
एंड्रयू की गिरफ्तारी के पीछे सबसे बड़ा नाम वर्जीनिया गिफ्रे का है।
वर्जीनिया ने सालों पहले दावा किया था कि जब वह केवल 17 साल की थीं, तब एपस्टीन ने उन्हें प्रिंस एंड्रयू के पास भेजा था।

गिफ्रे ने अपनी किताब ‘नो बॉडीज गर्ल’ (No Body’s Girl) में खुलासा किया था कि एंड्रयू ने उनके साथ तीन अलग-अलग मौकों पर संबंध बनाए—लंदन, न्यूयॉर्क और एपस्टीन के निजी कैरिबियन द्वीप पर।
गिफ्रे का दावा था कि एंड्रयू को लगता था कि उनके साथ यौन संबंध बनाना उनका ‘जन्मसिद्ध अधिकार’ है।
हालांकि, वर्जीनिया गिफ्रे की अप्रैल 2025 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन मरने से पहले उन्होंने अपने संस्मरण में ऐसे कई राज खोले जिसने शाही परिवार की नींव हिला दी।

एपस्टीन फाइल्स और नए सबूत
2025 और 2026 की शुरुआत में जारी हुई ‘एपस्टीन फाइल्स’ ने आग में घी डालने का काम किया।
इन फाइलों में कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आईं जिनमें एंड्रयू को आपत्तिजनक स्थितियों में देखा जा सकता है।
एक तस्वीर में वह पांच नाबालिग लड़कियों के साथ दिख रहे हैं, तो दूसरी तस्वीर में एक महिला के ऊपर झुके हुए नजर आ रहे हैं।
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी इन दस्तावेजों ने ब्रिटिश पुलिस को कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया।

क्या एंड्रयू को होगी उम्रकैद?
ब्रिटिश कानून के तहत, ‘पब्लिक ऑफिस में कदाचार’ एक बेहद गंभीर श्रेणी का अपराध है।
अगर अदालत में यह साबित हो जाता है कि एंड्रयू ने जानबूझकर अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और कानून तोड़ा, तो उन्हें अधिकतम उम्रकैद की सजा भी हो सकती है।
चूंकि यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ा है और इसमें नाबालिगों के शोषण का एंगल भी है, इसलिए कोर्ट का रुख बेहद कड़ा रहने की उम्मीद है।

शाही परिवार से पहले ही कट चुका है पत्ता
किंग चार्ल्स ने अपने भाई के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाई है।
पिछले साल अक्टूबर में ही एंड्रयू से उनका ‘प्रिंस’ का खिताब, सैन्य सम्मान और ‘हिज रॉयल हाइनेस’ (HRH) की उपाधि वापस ले ली गई थी।
उन्हें विंडसर स्थित उनके घर ‘रॉयल लॉज’ को खाली करने का भी आदेश दिया गया था।
अब उन्हें आधिकारिक रूप से केवल ‘एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर’ के नाम से जाना जाता है।
शाही परिवार ने खुद को इस विवाद से पूरी तरह अलग कर लिया है।

उत्तराधिकार की दौड़ में अब भी शामिल
हैरानी की बात यह है कि तमाम विवादों और खिताब छिन जाने के बावजूद, एंड्रयू अब भी ब्रिटेन के सिंहासन की दौड़ (Line of Succession) में 8वें नंबर पर बने हुए हैं।
तकनीकी रूप से, जब तक संसद कानून बनाकर उन्हें इस सूची से नहीं हटाती, तब तक वह उत्तराधिकारी बने रहेंगे।
हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए इसकी संभावना शून्य है कि वह कभी राजा बन पाएंगे।

एंड्रयू की गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह आधुनिक युग में राजशाही की नैतिकता पर भी एक बड़ा सवाल है।
क्या कानून एक ‘पूर्व राजकुमार’ के साथ वही बर्ताव करेगा जो एक आम नागरिक के साथ होता है?
पूरी दुनिया की नजरें अब लंदन की अदालत के फैसले पर टिकी हैं।


