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घुसपैठ रोकने के लिए BSF का खतरनाक प्लान: जहरीले सांप, बिच्छू और मगरमच्छ से होगा घुसपैठियों का सामना

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Snakes and Crocodiles in Border: भारत और बांग्लादेश की सीमा पर घुसपैठ एक पुरानी और बड़ी चुनौती रही है।

लेकिन अब सीमा सुरक्षा बल (BSF) इस समस्या से निपटने के लिए एक ऐसा तरीका अपनाने पर विचार कर रहा है, जिसे सुनकर दुश्मन के पसीने छूट जाएंगे।

कटीले तारों और आधुनिक कैमरों के साथ-साथ अब सरहद पर जहरीले सांप, बिच्छू और मगरमच्छ भी पहरेदारी करते नजर आ सकते हैं।

BSF के सूत्रों के मुताबिक, इस ‘डिटरेंस-फर्स्ट’ (यानी डर पैदा कर घुसपैठ रोकने) प्लान के तहत उन इलाकों को सुरक्षित किया जाएगा जहां फेंसिंग या बाड़ लगाना लगभग नामुमकिन है।

क्यों पड़ी इस प्लान की जरूरत?

भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 5,000 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है।

इसमें से लगभग 180 किलोमीटर का इलाका ऐसा है जो नदियों, नालों और गहरे दलदलों से भरा हुआ है।

पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में गंगा, पद्मा, फेनी, इच्छामती और मुहुरी जैसी नदियां बहती हैं।

इन नदियों का आधा हिस्सा भारत में है और आधा बांग्लादेश में।

चूंकि इन दलदली और पानी वाले रास्तों पर बाड़ (Fencing) नहीं लगाई जा सकती, इसलिए घुसपैठिये और तस्कर अक्सर इन्हीं रास्तों का फायदा उठाकर सीमा पार करने की कोशिश करते हैं।

रात के अंधेरे और घने जंगलों के बीच जवानों के लिए भी इन इलाकों में हर इंच पर नजर रखना मुश्किल होता है।

इसी चुनौती का तोड़ निकालने के लिए BSF इस ‘नेचुरल डिफेंस’ पर विचार कर रही है।

कैसे काम करेगा यह ‘खौफनाक’ प्लान?

BSF की योजना है कि संवेदनशील दलदली इलाकों और नदी के किनारों पर ऐसे जीवों को छोड़ा जाए जो घुसपैठियों के मन में दहशत पैदा कर सकें।

  • जहरीले सांप और बिच्छू: दलदली घास और झाड़ियों वाले रास्तों में सांपों की मौजूदगी घुसपैठियों के कदम रोकने के लिए काफी होगी।
  • मगरमच्छ: नदी वाले इलाकों, जहां से तैरकर घुसपैठ की जाती है, वहां मगरमच्छों की तैनाती एक प्राकृतिक दीवार का काम करेगी।

BSF का मानना है कि जब घुसपैठियों को पता होगा कि सीमा पार करते ही उनका सामना केवल जवानों से ही नहीं, बल्कि जानलेवा जीवों से भी होगा, तो वे ऐसी हिम्मत करने से पहले सौ बार सोचेंगे।

फिलहाल प्रस्ताव पर चर्चा जारी

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी इस योजना पर कोई आधिकारिक आदेश (Official Order) जारी नहीं हुआ है।

फिलहाल यह विचार के स्तर पर है और इसके कानूनी व व्यावहारिक पहलुओं पर मंथन किया जा रहा है।

वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरण नियमों को ध्यान में रखते हुए इस प्लान की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

चुनौतियां और सुरक्षा

बीएसएफ हमेशा से ही घुसपैठ और तस्करी को रोकने में सफल रही है, लेकिन तकनीक और बल के साथ-साथ अब ‘मनोवैज्ञानिक दबाव’ को भी हथियार बनाने की तैयारी है।

अगर यह योजना धरातल पर उतरती है, तो यह दुनिया भर में सीमा सुरक्षा का एक सबसे अनोखा उदाहरण होगा।

पश्चिम बंगाल के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए BSF की यह रणनीति आने वाले समय में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

अब देखना यह है कि इस ‘नेचुरल सिक्योरिटी गार्ड्स’ वाले प्लान को हरी झंडी कब मिलती है।

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