Digvijay Singh on Hidma Encounter: छत्तीसगढ़ में एक कुख्यात नक्सली के एनकाउंटर ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ऑपरेशन पर सवाल उठाए तो बीजेपी विधायक ने शहीद पुलिस इंस्पेक्टर के लिए संवेदना न जताने का आरोप लगाकर जवाब दिया है।
आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता सोनी सोरी ने भी इस ‘मुठभेड़’ को ‘फर्जी’ बताते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
18 नवंबर को हुआ था एनकाउंटर
18 नवंबर को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों ने कुख्यात नक्सली और सीपीआई (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी सदस्य माड़वी हिड़मा को एनकाउंटर में मार गिराया।
हिड़मा पर राज्य सरकार ने 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था और उसे झीरम घाटी हमले समेत कम से कम 26 बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था।
हालांकि, इस ऑपरेशन पर आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता सोनी सोरी ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
एक स्थानीय यूट्यूबर से बातचीत में सोनी सोरी ने इस एनकाउंटर को ‘फर्जी’ और ‘हत्या’ बताया।

उनके मुताबिक, सुरक्षा बलों के दावों और स्थानीय ग्रामीणों के बयानों में बुनियादी अंतर है।
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि घटनास्थल पर कोई नक्सली मौजूद नहीं थे और सामान्य आदिवासियों को निशाना बनाया गया।
उन्होंने सवाल किया कि अगर नक्सलियों को पकड़ने की क्षमता थी, तो सीधे गोलीबारी क्यों की गई?
सोरी ने यह भी आशंका जताई कि इस तरह की घटनाओं में आदिवासी समुदायों को मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है और सामाजिक-न्याय की प्रक्रिया को दरकिनार किया जा रहा है।
दिग्विजय सिंह ने उठाए आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दे
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोनी सोरी के वीडियो को साझा करते हुए इस मामले पर सवाल उठाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वे नक्सली हिंसा के घोर विरोधी हैं, लेकिन उनका मानना है कि नक्सलियों को आत्मसमर्पण कराकर सामाजिक-आर्थिक मुख्यधारा में लाने का प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने इस मौके को दो बड़े मुद्दों से जोड़ा:
- PESA कानून: उन्होंने सवाल किया कि केंद्र सरकार आदिवासी बहुल क्षेत्रों, खासकर बस्तर में PESA (पंचायतों का अधिकार) कानून को पूरी तरह से क्यों नहीं लागू कर रही? साथ ही, उन्होंने बस्तर के खनिज संसाधनों में स्थानीय आदिवासियों की हिस्सेदारी की मांग की।
- मतदाता सूची और SIR: उन्होंने ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के तहत मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर चिंता जताई। उनका सवाल है कि क्या नक्सल प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों के लोगों के पास वे दस्तावेज हैं जिनके आधार पर उनके नाम मतदाता सूची में शामिल हो सकें? उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इन मुद्दों पर गौर करने की अपील की।

बीजेपी विधायक का पलटवार: “शहीद इंस्पेक्टर के लिए एक शब्द नहीं कहा”
दिग्विजय सिंह के बयान पर बीजेपी विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने तीखा हमला बोला है।
उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि दिग्विजय सिंह ने एक खूंखार नक्सली के एनकाउंटर पर सवाल उठाए, लेकिन नरसिंहपुर में नक्सली मुठभेड़ में शहीद हुए इंस्पेक्टर आशीष शर्मा के लिए “मुंह से एक शब्द नहीं निकाला”।
चंद्रवंशी ने आरोप लगाया, “दिग्विजय सिंह हमेशा नक्सलियों और आतंकवादियों के साथ खड़े रहते हैं।”
उन्होंने कहा कि SIR का मुद्दा अलग है और सरकार नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने दिग्विजय सिंह से आग्रह किया कि वे “देश विरोधी मुद्दों पर आतंकवादियों के साथ खड़े होना बंद करें” और आदिवासी हितों की बात करने के बजाय सरकार के काम को देखें।

एक एनकाउंटर, कई सवाल
माड़वी हिड़मा का एनकाउंटर सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सफलता है, लेकिन इसने आदिवासी अधिकारों, सुरक्षा ऑपरेशनों की पारदर्शिता और राजनीतिक विमर्श से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक तरफ सरकार इसे नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी जीत बता रही है, वहीं दूसरी तरफ सवाल उठ रहे हैं कि कहीं यह आदिवासी समुदाय के खिलाफ बढ़ती कठोरता का हिस्सा तो नहीं है।


