Mohan Yadav invite Digvijay Singh: मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानों के तीर खूब चल रहे हैं।
ताजा मामला कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ, जिसने सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया।
इस विवाद में अब सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की एंट्री ने मामले को और दिलचस्प बना दिया है।

क्या है पूरा मामला?
बीते शनिवार (27 दिसंबर) को दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पुरानी तस्वीर साझा की।
इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीचे जमीन पर बैठे नजर आ रहे हैं और उनके पीछे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे हैं।
दिग्विजय सिंह ने इस पोस्ट में आरएसएस (RSS) के अनुशासन और संगठन की शक्ति की तारीफ करते हुए ‘जय सियाराम’ लिखा।

बस, यहीं से कयासों का दौर शुरू हो गया।
सीएम मोहन यादव का बड़ा प्रस्ताव:
दिग्विजय सिंह के बदले हुए सुरों को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान बड़ा बयान दिया।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “दिग्विजय सिंह जी को बधाई। अगर वे संगठन की शक्ति को समझ रहे हैं, तो उनका भाजपा में स्वागत है।”
सीएम का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोग चर्चा करने लगे कि क्या दिग्विजय सिंह वाकई पाला बदल सकते हैं?

दिग्विजय सिंह की दो-टूक:
जब भोपाल में मीडिया ने दिग्विजय सिंह को सीएम मोहन यादव के इस न्योते के बारे में बताया, तो उनका अंदाज चिर-परिचित था।
उन्होंने तंज कसते हुए सिर्फ इतना कहा— “अरे छोड़िए!” और आगे बढ़ गए।
बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आरएसएस और पीएम मोदी की विचारधारा के घोर आलोचक हैं और रहेंगे।

उन्होंने केवल एक संगठन के तौर पर उनकी कार्यप्रणाली का जिक्र किया था, इसका मतलब यह कतई नहीं कि वे अपनी विचारधारा बदल रहे हैं।
कैलाश विजयवर्गीय का समर्थन:
इस पूरे घटनाक्रम में बीजेपी के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी सीएम मोहन के बयान का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि अगर कोई भाजपा की विचारधारा और संगठन की मजबूती को स्वीकार करता है, तो उसके लिए रास्ते खुले हैं।

हालांकि दिग्विजय सिंह ने भाजपा में जाने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, लेकिन उनकी एक पोस्ट ने यह साबित कर दिया है कि मध्य प्रदेश की राजनीति में ‘दिग्गी राजा’ आज भी एजेंडा सेट करने की ताकत रखते हैं।
फिलहाल, यह मामला ‘तारीफ’ और ‘ऑफर’ के बीच ही सिमट कर रह गया है।
