Communal Tension हाल ही में देश के तीन प्रमुख राज्यों—मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना—से सांप्रदायिक तनाव की खबरें सामने आई हैं।
इन घटनाओं के पीछे मुख्य कारण जुलूस, तेज संगीत और कुछ शरारती तत्वों की हरकतें रहीं।
आइए जानतेेे हैं कि आखिर क्या हुआ था:
कर्नाटक: पत्थरबाजी और पुलिस पर हमला
कर्नाटक के बागलकोट जिले के किला ओनी इलाके में शिवाजी जयंती के मौके पर एक भव्य जुलूस निकाला जा रहा था।
इसी दौरान दो समुदायों के बीच कहासुनी हो गई, जिसने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया। देखते ही देखते पथराव शुरू हो गया।
इस झड़प में न केवल आम लोग, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी घायल हुए। यहाँ तक कि जिले के एसपी (SP) को भी चोटें आईं।
स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया।
वहीं बेलगावी में एक स्वतंत्रता सेनानी की प्रतिमा पर स्याही फेंकने की घटना ने भी तनाव को हवा दी।
हैदराबाद: संगीत और वीडियो पर विवाद
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के अंबरपेट इलाके में भी माहौल तब गर्माया जब रमजान की नमाज और शिवाजी जयंती का जुलूस एक ही समय पर आसपास थे।
मस्जिद के पास से गुजर रहे जुलूस में बज रहे तेज संगीत को लेकर विवाद शुरू हुआ।
इसी बीच एक यूट्यूबर मस्जिद का वीडियो बना रहा था, जिस पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी शुरू हो गई।
गनीमत यह रही कि पुलिस ने तुरंत दखल दिया और मामले को शांत कराया।
फिलहाल वहाँ शांति है और पुलिस स्थिति पर नजर रखे हुए है।
जबलपुर: अफवाहों पर लगाम
मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी ऐसी ही तनावपूर्ण स्थिति देखी गई। हालांकि, प्रशासन की मुस्तैदी के कारण कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई।
कलेक्टर और एसपी ने खुद मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक स्थल को नुकसान नहीं पहुँचा है और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।
इन सभी घटनाओं में एक बात सामान्य रही—छोटी सी बात या गलतफहमी ने बड़े तनाव का रूप ले लिया।
प्रशासन अब सीसीटीवी फुटेज और वीडियो के जरिए दोषियों की पहचान कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।


