Naxal surrender in Dantewada: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है।
राज्य सरकार के ‘लोन वर्राटू’ (घर वापसी) अभियान से प्रभावित होकर 63 नक्सलियों ने एक साथ हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है।
सुरक्षा बलों के सामने सामूहिक रूप से हथियार डालने वाले इन नक्सलियों में 18 महिलाएं भी शामिल हैं।
यह घटना बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक मानी जा रही है।
What prompted 63 Maoists to surrender in Dantewada under Chhattisgarh’s ‘Puna Margam’ campaign? Raipur/Dantewada, Jan 9 (NationPress) In a remarkable advancement for anti-Naxal
initiatives and peace endeavors in Chhattisgarh’s Bastar area, 63 Maoist… https://t.co/euzAVu6Lgn pic.twitter.com/odoL83TXFm— NationPress (@np_nationpress) January 9, 2026
बड़े चेहरों ने किया सरेंडर
आत्मसमर्पण करने वाले इस समूह में सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण नाम मोहन कड़ती का है।
मोहन, पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का सचिव था और संगठन में उसकी तूती बोलती थी।
उसने अपनी पत्नी के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरेंडर करने वाले इन सभी नक्सलियों पर कुल मिलाकर 1 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था।
इतने बड़े स्तर पर नेतृत्व करने वाले नक्सलियों का पीछे हटना, नक्सली संगठन के बुनियादी ढांचे के लिए एक गहरा आघात है।
#WATCH | Dantewada, Chhattisgarh | 63 wanted Naxals surrender before Dantewada Police. pic.twitter.com/nX54cLBng5
— ANI (@ANI) January 9, 2026
क्या है ‘लोन वर्राटू’ अभियान?
स्थानीय गोंडी भाषा में ‘लोन वर्राटू’ का अर्थ होता है “घर वापस आइए”।
दंतेवाड़ा पुलिस द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य उन भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना है, जो किसी न किसी कारणवश नक्सली विचारधारा से जुड़ गए थे।
पुलिस गांव-गांव जाकर नक्सलियों के परिवारों से संपर्क करती है और उन्हें विश्वास दिलाती है कि समर्पण करने पर उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान मिलेगा।
#WATCH | Dantewada, Chhattisgarh | Dantewada SP Gaurav Rai says, “We are running a campaign in the Bastar Division, as part of the rehabilitation program of the Chhattisgarh government, which appeals to the Naxalites to surrender and join the mainstream. Today, 63 Naxals have… https://t.co/lnGcepGp6O pic.twitter.com/yvlExKU8q8
— ANI (@ANI) January 9, 2026
रणनीति और सफलता के कारण
इस सामूहिक आत्मसमर्पण के पीछे सुरक्षा बलों की बहुआयामी रणनीति रही है:
- सघन सर्च ऑपरेशन: जंगलों में लगातार दबाव के कारण नक्सलियों का छिपना मुश्किल हो गया है।
- पुनर्वास नीति: सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद और रोजगार की गारंटी ने नक्सलियों को सोचने पर मजबूर किया है।
- विकास का प्रभाव: सुदूर गांवों तक सड़कों और बिजली का पहुंचना नक्सलियों के प्रभाव को कम कर रहा है।
बाहरी राज्यों के नक्सली भी शामिल
हैरानी की बात यह है कि सरेंडर करने वालों में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ से बाहर के राज्यों के नक्सली भी शामिल हैं।
इससे यह साफ होता है कि अब नक्सली आंदोलन के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा है और वे समझ चुके हैं कि बंदूक के दम पर बदलाव संभव नहीं है।
In a major boost to anti-Naxal operations, 63 Maoist cadres, including 36 with bounties worth ₹1.19 crore, surrendered before security forces in Chhattisgarh’s Bastar region. The surrender took place at the DRG office in Dantewada.#Chhattisgarh #Bastar #Maoists #AntiNaxalOps… pic.twitter.com/YTdPhOawFA
— Orissa POST Live (@OrissaPOSTLive) January 9, 2026
आगे की राह
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरेंडर करने वाले इन सभी पूर्व-नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास योजना का पूरा लाभ दिया जाएगा।
उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करने के साथ-साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे मेहनत की कमाई से अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से दंतेवाड़ा के युवाओं में एक सकारात्मक संदेश जाएगा और आने वाले समय में और भी नक्सली हथियार छोड़ सकते हैं।


