AI Summit Congress Protest: राजधानी दिल्ली का भारत मंडपम, जहाँ देश-विदेश के दिग्गज ‘इंडिया AI समिट’ के लिए जुटे थे, शुक्रवार को अचानक राजनीति का अखाड़ा बन गया।
मामला अब कोर्ट तक पहुँच चुका है और दिल्ली पुलिस ने इसमें ‘अंतरराष्ट्रीय साजिश’ का एंगल जोड़कर सनसनी फैला दी है।
क्या है पूरा विवाद?
शुक्रवार को जब समिट चल रही थी, तभी भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कुछ कार्यकर्ता सुरक्षा घेरा तोड़कर अंदर पहुँच गए और अचानक ‘शर्टलेस’ (बिना शर्ट के) होकर नारेबाजी करने लगे।

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके से चार बड़े पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया।
इनमें कृष्णा हरि (राष्ट्रीय सचिव), कुंदन यादव (बिहार सचिव), अजय कुमार (यूपी उपाध्यक्ष) और नरसिम्हा यादव (राष्ट्रीय समन्वयक) शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस का चौंकाने वाला दावा
शनिवार को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने जो दलीलें दीं, उन्होंने सबको हैरान कर दिया।
पुलिस ने कहा कि यह कोई सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसके पीछे नेपाल के ‘जेन-जी’ (Gen-Z) आंदोलन जैसी बड़ी साजिश की बू आ रही है।

पुलिस का आरोप है कि
- यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को धूमिल करने के लिए किया गया।
- इसके लिए मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए पहले से प्लानिंग की गई थी।
पुलिस ने आरोपियों के डिजिटल डेटा की जांच के लिए 5 दिन की कस्टडी मांगी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।

कांग्रेस और बचाव पक्ष की दलील
दूसरी ओर, आरोपियों के वकील रुपेश सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
उनका कहना है कि यह एक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध था, जिसे बीजेपी राजनीतिक रंग दे रही है।
उन्होंने तर्क दिया कि 7 साल से कम सजा वाले मामलों में रिमांड की जरूरत नहीं होती, फिर भी पुलिस ने कस्टडी ली है।

कांग्रेस का कहना है कि युवा सिर्फ बेरोजगारी और नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, जिसे ‘साजिश’ कहना गलत है।
देशभर में बढ़ा तनाव: इंदौर में पत्थरबाजी
इस घटना की आग दिल्ली से निकलकर दूसरे राज्यों तक पहुँच गई है।
मध्य प्रदेश के इंदौर में जब बीजेपी कार्यकर्ता कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन करने उतरे, तो दोनों गुटों में हिंसक झड़प हो गई।

स्थिति इतनी बिगड़ी कि पत्थरबाजी शुरू हो गई और पुलिस को लाठीचार्ज के साथ वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल करना पड़ा।
ऐसा ही हाल पुडुचेरी में भी देखने को मिला, जहाँ दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए।

फिलहाल चारों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं।
आने वाले 5 दिनों में पुलिस उनके मोबाइल फोन और चैट्स खंगालेगी ताकि यह पता चल सके कि क्या वाकई इसके पीछे कोई विदेशी साजिश थी या यह सिर्फ एक राजनीतिक विरोध था।


