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दिल्ली में लापता लड़कियों की खबरें निकलीं ‘पेड प्रमोशन’, पुलिस ने अफवाह फैलाने वालों को दी चेतावनी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Delhi Police on Missing Girls: हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर दिल्ली में लड़कियों और बच्चों के गायब होने की खबरों ने राजधानी के लोगों की नींद उड़ा दी थी।

लेकिन अब दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया है।

पुलिस का कहना है कि यह कोई गंभीर अपराध का ग्राफ नहीं, बल्कि “पेड प्रमोशन” के जरिए फैलाया गया डर है।

आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…

सोशल मीडिया पर क्या था दावा?

जनवरी 2026 से फरवरी 2026 के शुरुआती दिनों में इंटरनेट पर कुछ आंकड़े तेजी से वायरल हुए।

दावा किया गया कि मात्र 36 दिनों के भीतर दिल्ली से 2,884 लोग लापता हो गए, जिनमें से 1,372 महिलाएं और 616 बच्चे थे।

इन पोस्ट्स में यह भी कहा गया कि बरामदगी की दर बहुत कम है, जिससे लोगों में असुरक्षा और दहशत का माहौल बन गया।

माता-पिता अपने बच्चों को बाहर भेजने में डरने लगे और सोशल मीडिया पर इसे एक “संगठित गिरोह” की साजिश बताया जाने लगा।

पुलिस की जांच में क्या निकला?

दिल्ली पुलिस ने जब इन अफवाहों और पोस्ट्स की जांच की, तो एक गहरी साजिश सामने आई।

दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक एक्स (X) हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दिल्ली में लापता लड़कियों की संख्या बढ़ने को लेकर जो ‘हाइप’ बनाई गई, वह सही नहीं थी।

पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों और प्लेटफॉर्म्स ने पैसे लेकर (Paid Promotion) इन खबरों को प्रमोट किया ताकि दहशत फैलाई जा सके।

पुलिस ने सख्त लहजे में कहा, “पैसे के लालच में डर और घबराहट पैदा करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे भ्रामक प्रचार करने वालों के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

क्या कहते हैं असली आंकड़े?

दिल्ली पुलिस के पीआरओ (PRO) संजय त्यागी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि असलियत वायरल खबरों के बिल्कुल उलट है:

  1. मामलों में कमी: जनवरी 2026 में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लापता होने के मामलों में कमी आई है।

  2. डेटा: पिछले 10 सालों से दिल्ली में लापता होने के आंकड़े लगभग 23,000 से 24,000 के बीच स्थिर रहे हैं, जबकि शहर की आबादी लगातार बढ़ी है।

  3. रिकवरी रेट: दिल्ली पुलिस का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। 2016 से अब तक करीब 1.80 लाख लापता लोगों को उनके परिवार से मिलाया गया है, जो लगभग 77% की सफलता दर है।

  4. कोई गिरोह नहीं: पुलिस ने साफ किया कि अभी तक किसी भी जांच में बच्चों के अपहरण या गायब होने के पीछे किसी संगठित गिरोह (Organized Gang) के शामिल होने का सबूत नहीं मिला है।

दिल्ली पुलिस की तैयारी और तकनीक

पुलिस ने जनता को भरोसा दिलाया है कि वे हर मामले को गंभीरता से लेते हैं।

दिल्ली में गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए ‘मिसिंग पर्सन स्क्वॉड’ और ‘एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट’ (AHTU) 24×7 काम कर रही है।

अब कोई भी व्यक्ति न केवल थाने जाकर, बल्कि ऑनलाइन या हेल्पलाइन नंबर 112 के जरिए भी तुरंत रिपोर्ट दर्ज करा सकता है।

बच्चों के मामले में दिल्ली पुलिस ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) के तहत प्राथमिकता से काम करती है।

साफ है कि दिल्ली में स्थिति नियंत्रण में है और जनता को डरने की कोई जरूरत नहीं है।

सोशल मीडिया पर जो डर फैलाया गया, वह काफी हद तक प्रायोजित (Sponsored) था।

जनता से अपील है कि वे बिना जांचे-परखे किसी भी पोस्ट को शेयर न करें, क्योंकि आपकी एक ‘शेयर’ की गई गलत जानकारी समाज में डर पैदा कर सकती है।

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