Bhojshala Vasant Panchami Dispute: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला का विवाद एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है।
इस बार विवाद का कारण है 23 जनवरी की तारीख। इस दिन बसंत पंचमी का पर्व है, लेकिन इसी दिन शुक्रवार भी है।
भोजशाला में दशकों से चली आ रही व्यवस्था के अनुसार, मंगलवार और बसंत पंचमी पर हिंदू पूजा करते हैं, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करता है।
मगर जब ये दोनों दिन एक साथ टकराते हैं, तो प्रशासन और न्यायपालिका के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका और हिंदू पक्ष की मांग
‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ ने वकील विष्णु शंकर जैन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है।
इस याचिका में मांग की गई है कि 23 जनवरी को होने वाली जुमे की नमाज पर रोक लगाई जाए ताकि श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के मां सरस्वती की पूजा कर सकें।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि बसंत पंचमी साल में एक बार आने वाला मां सरस्वती का सबसे बड़ा पर्व है, इसलिए उस दिन पूरे समय पूजा का अधिकार हिंदुओं को मिलना चाहिए।
वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत से ‘तत्काल सुनवाई’ का अनुरोध किया है, क्योंकि पर्व में अब बहुत कम समय बचा है।
#BREAKING: In Madhya Pradesh’s Dhar, the Hindu side has approached the Supreme Court in the Bhojshala case, seeking a ban on Muslim prayers (Namaz) on January 23 and requesting permission for Hindus to perform Saraswati Puja on Basant Panchami. They have also demanded strict… pic.twitter.com/J5uTRoXsT7
— IANS (@ians_india) January 18, 2026
ASI के 2003 के आदेश का पेंच
भोजशाला में वर्तमान व्यवस्था भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के एक आदेश पर आधारित है। इस आदेश के तहत:
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मंगलवार: हिंदुओं को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा का अधिकार।
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शुक्रवार: मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज की अनुमति।
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बसंत पंचमी: इस विशेष दिन हिंदुओं को विशेष पूजा की अनुमति दी गई है।
दिक्कत तब आती है जब बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ जाते हैं।
2003 का आदेश इस बात पर स्पष्ट नहीं है कि ऐसी स्थिति में किसे प्राथमिकता दी जाएगी।
यही ‘मौन’ विवाद और असमंजस की मुख्य वजह बना हुआ है।
#WATCH | Ghaziabad, UP: Advocate Vishnu Shankar Jain says, “We have filed a petition in the Supreme Court regarding the Bhojshala Mata Vagdevi (Saraswati) Temple, located in Dhar, Madhya Pradesh. The festival of Vasant Panchami is on the 23rd of this month, and people of the… pic.twitter.com/m2TZWaFNhY
— ANI (@ANI) January 18, 2026
छावनी में तब्दील होगा धार: प्रशासन की तैयारी
विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए मध्य प्रदेश प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।
धार के आईजी अनुराग ने सुरक्षा तैयारियों का जायजा लेते हुए स्पष्ट किया है कि शांति भंग करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।
- भारी सुरक्षा बल: 23 जनवरी को भोजशाला और आसपास के इलाकों में लगभग 8,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे।
- विशेष टुकड़ियां: स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कंपनियां भी तैनात रहेंगी।
- तकनीकी निगरानी: पूरे परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए की जाएगी ताकि किसी भी अप्रिय घटना को तुरंत रोका जा सके।

इतिहास और दावों का टकराव
भोजशाला को लेकर दोनों समुदायों के अपने-अपने ऐतिहासिक दावे हैं।
हिंदू पक्ष इसे 11वीं सदी में राजा भोज द्वारा निर्मित मां सरस्वती का मंदिर और एक प्राचीन विश्वविद्यालय (संस्कृत पाठशाला) मानता है।
उनका कहना है कि यहां की दीवारों पर खुदे संस्कृत के श्लोक इसके मंदिर होने का प्रमाण हैं।
दूसरी ओर, मुस्लिम समुदाय इसे ‘कमल मौला की मस्जिद’ मानता है और उनका दावा है कि वे यहां सदियों से नमाज पढ़ते आ रहे हैं।

पुराना अनुभव और वर्तमान स्थिति
यह पहली बार नहीं है जब ऐसा टकराव हुआ है।
इससे पहले 2003, 2006, 2013 और 2016 में भी बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ी थी।
हर बार प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ी थी और कई बार स्थिति तनावपूर्ण भी हुई।
2016 में प्रशासन ने नमाज के लिए एक अलग समय तय किया था और कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों पक्षों को अपनी रस्में निभाने दी थीं।
भोजशाला विवाद: 23 जनवरी को धार में 8000 सुरक्षाकर्मी रहेंगे तैनात
पूरी खबर : https://t.co/507IHbjhji#BhojshalaDispute #MadhyaPradesh #Dhar #ATCard #AajTakSocial pic.twitter.com/UA38yo9xRN
— AajTak (@aajtak) January 14, 2026
भोजशाला का मुद्दा केवल एक धार्मिक विवाद नहीं है, बल्कि यह आस्था, इतिहास और कानून के पेचीदा मेल का उदाहरण है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं।
क्या कोर्ट कोई ऐसा बीच का रास्ता निकालेगा जिससे दोनों पक्षों की भावनाएं आहत न हों, या फिर प्रशासन को अपनी लाठियों और सुरक्षा घेरे के दम पर शांति कायम रखनी होगी?


