Bhojshala Maha Aarti Friday: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला परिसर में आज एक नया इतिहास लिखा गया।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा बीते 15 मई को भोजशाला को ‘मंदिर’ घोषित किए जाने के बाद आज पहला शुक्रवार था।
सालों से चली आ रही परंपरा के उलट, इस शुक्रवार को भोजशाला परिसर के भीतर जुमे की नमाज अदा नहीं की गई।
इसके विपरीत, हिंदू समाज और भोज उत्सव समिति के बैनर तले सुबह से ही वहां पूजा-अर्चना और महाआरती का दौर शुरू हो गया।

पूरे परिसर में मां वाग्देवी (सरस्वती जी) की विशेष प्रतिमा स्थापित कर दर्शन-पूजन किया गया।
इस ऐतिहासिक बदलाव को देखते हुए पूरे धार शहर में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं और करीब 2000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
क्या है पूरा मामला और शुक्रवार को क्या हुआ?
दरअसल, धार की भोजशाला को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था।
हिंदू पक्ष इसे राजा भोज द्वारा बनवाया गया मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता रहा है।

एएसआई (ASI) की पुरानी व्यवस्था के मुताबिक, यहां मंगलवार को हिंदू पूजा करते थे और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते थे।
लेकिन हाल ही में हाईकोर्ट ने इसे मंदिर घोषित कर दिया।
कार सेवकों का सम्मान
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद आज पहला शुक्रवार था।
हिंदू संगठनों के लिए यह दिन किसी बड़े उत्सव जैसा रहा।
सुबह सूर्योदय के साथ ही बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु भोजशाला परिसर में जुटने लगे।

सुबह ठीक 9 बजे मां वाग्देवी की भव्य महाआरती की गई।
दोपहर में यहां एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें उन कारसेवकों के परिवारों का सम्मान किया गया जिन्होंने साल 2003 के भोजशाला आंदोलन में अपनी जान गंवाई थी।
मुस्लिम पक्ष का रुख: कोर्ट पर भरोसा, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
दूसरी तरफ, हाईकोर्ट के इस एकतरफा फैसले से मुस्लिम समाज में गहरी निराशा है।
कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने कहा कि इस परिसर में पिछले 700 सालों से जुमे की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से होती आ रही थी।
इस परंपरा के अचानक बंद होने से समाज दुखी है।
हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उनका समाज पूरी तरह से कानून और संविधान के दायरे में रहकर अपनी लड़ाई लड़ेगा।
विरोध स्वरूप मुस्लिम समाज के लोगों ने आज काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की।
शहर काजी वकार सादिक के आह्वान पर प्रशासन की गाइडलाइन का सम्मान करते हुए यह नमाज भोजशाला या दरगाह परिसर में न होकर, स्थानीय मोहल्लों और घरों में पढ़ी गई।
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे शहर की शांति और भाईचारे को किसी भी कीमत पर बिगड़ने नहीं देना चाहते।
उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) से न्याय की पूरी उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, लेकिन आज सुनवाई नहीं
हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए मुस्लिम पक्ष गुरुवार रात करीब 8:30 बजे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया और एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की।
हालांकि, शुक्रवार को इस याचिका को कोर्ट के सामने मेंशन (त्वरित सुनवाई के लिए अनुरोध) नहीं किया जा सका।

याचिकाकर्ता के वकील मनीष गुप्ता ने पुष्टि की है कि मेंशन न होने के कारण शुक्रवार को इस मामले में तुरंत कोई सुनवाई या स्टे मिलने की संभावना खत्म हो गई।
अब सभी की निगाहें आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: अभूतपूर्व पहरे में धार शहर
चूंकि शुक्रवार का दिन बेहद संवेदनशील माना जा रहा था, इसलिए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा की ऐसी चक्रव्यूह तैयार की कि परिंदा भी पर न मार सके।
कलेक्टर राजीव रंजन मीना और पुलिस अधीक्षक (SP) सचिन शर्मा खुद मोर्चा संभाले हुए हैं।
2000 से ज्यादा जवान तैनात: शहर के हर कोने, संवेदनशील इलाकों और मुस्लिम बहुल बस्तियों में भारी पुलिस बल लगाया गया है।

विशेष सुरक्षा एजेंसियां: रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), पैरामिलिट्री फोर्स, स्पेशल टास्क फोर्स (STF), एसडीएफ और घुड़सवार पुलिस की 8 विशेष कंपनियों को सुरक्षा में उतारा गया है।
सोशल मीडिया पर तीसरी आंख: पुलिस की एक स्पेशल साइबर टीम सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म (फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स) पर पैनी नजर रख रही है ताकि कोई भी भड़काऊ पोस्ट या अफवाह न फैला सके।
प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि माहौल बिगाड़ने वालों पर सीधे रासुका (NSA) जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आंदोलन के शहीदों का सम्मान और भावुक पल
दोपहर के वक्त भोजशाला परिसर के बाहर और निर्धारित स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी।
यहां साल 2003 के भोजशाला आंदोलन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में मारे गए तीन स्थानीय लोगों को ‘बलिदानी’ मानते हुए उनके परिजनों के पैर पूजे गए और उन्हें सम्मानित किया गया।
वही, इस मामले के मुख्य याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी भी धार पहुंचे, जहां श्रद्धालुओं ने उनका जोरदार स्वागत किया।
कुलदीप तिवारी ने प्रशासन से मांग की है कि परिसर के अंदर से मुगलकालीन मेहराब और अयातुल्ला कुर्सी जैसी चीजों को भी तुरंत हटाया जाए।

“अभी मुक्ति अधूरी है…” – हिंदू संगठनों का संकल्प
भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने आज के दिन को एक ऐतिहासिक जीत बताया।
उन्होंने कहा कि साल 1305 ईस्वी में मुगल आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी ने इस पवित्र मंदिर पर अवैध कब्जा करके इसे अपवित्र कर दिया था।
इसके खिलाफ हिंदू समाज ने 721 साल तक लंबा संघर्ष किया है, जिसका सुखद परिणाम आज देखने को मिल रहा है।

वहीं समिति के एक अन्य प्रमुख सदस्य गोपाल शर्मा ने कहा कि यह खुशी तो है, लेकिन यह मुक्ति अभी अधूरी है।
जब तक भोजशाला का पूरा प्राचीन वैभव और स्वरूप राजा भोज के काल जैसा भव्य नहीं हो जाता, तब तक हमारा शांतिपूर्ण सत्याग्रह और प्रयास जारी रहेगा।

फिलहाल, धार शहर में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और शांतिपूर्ण बनी हुई है।
प्रशासन दोपहर से लेकर शाम के समय को सबसे ज्यादा संवेदनशील मानकर पल-पल की मॉनिटरिंग कर रहा है, क्योंकि शाम को दरगाह क्षेत्र में उर्स का कार्यक्रम भी होना है।
दोनों ही पक्षों के जिम्मेदार नागरिक शहर में अमन-चैन बनाए रखने की लगातार अपील कर रहे हैं।
