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धार भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दोपहर 12 बजे तक पूजा- फिर नमाज

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bhojshala Puja Namaz Timing: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में बसंत पंचमी के मौके पर होने वाली पूजा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद संतुलित फैसला सुनाया है।

अदालत ने स्पष्ट किया है कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष अपनी पारंपरिक पूजा जारी रख सकेगा, वहीं मुस्लिम समुदाय को जुमे की नमाज अदा करने के लिए भी समय और स्थान दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: समय का बंटवारा

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है।

अदालत ने हिंदू पक्ष की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें जुमे की नमाज पर रोक लगाने और पूरे दिन अखंड पूजा करने की अनुमति मांगी गई थी।

कोर्ट ने ‘मध्य मार्ग’ अपनाते हुए समय का बंटवारा किया है:

  • हिंदू पक्ष के लिए: हिंदू समुदाय सुबह से दोपहर 12 बजे तक पूजा और हवन कर सकेगा। इसके बाद शाम 4 बजे से दोबारा पूजन प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

  • नमाज के लिए विशेष व्यवस्था: दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच जुमे की नमाज अदा की जाएगी। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि नमाज के लिए परिसर के भीतर ही एक विशेष क्षेत्र तय किया जाए।

  • अलग रास्ते: नमाज पढ़ने आने वाले लोगों के लिए प्रवेश और निकास के रास्ते अलग रखे जाएंगे ताकि पूजा कर रहे श्रद्धालुओं और नमाजियों के बीच कोई टकराव न हो।

दलीलों में क्या कहा गया?

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती की आराधना के लिए महत्वपूर्ण है और इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा व हवन की परंपरा रही है।

उन्होंने सलाह दी है कि नमाज शाम 5 बजे के बाद कराई जाए।

दूसरी ओर, मस्जिद पक्ष के वकील ने स्पष्ट किया कि जुमे की नमाज का समय धार्मिक रूप से तय होता है और इसे बदला नहीं जा सकता।

हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोपहर 3 बजे तक नमाज संपन्न कर परिसर खाली कर दिया जाएगा।

प्रशासन और ASI की जिम्मेदारी

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अदालत को आश्वस्त किया है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

कोर्ट ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे और दोनों समुदायों के धार्मिक कार्यों में कोई बाधा न आए।

यह फैसला उस विवाद को सुलझाने की कोशिश है जो अक्सर बसंत पंचमी और शुक्रवार के एक ही दिन पड़ने पर खड़ा हो जाता है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

धार प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए ऐतिहासिक सुरक्षा घेरा तैयार किया है।

  1. 8 हजार पुलिसकर्मी: धार शहर में करीब 8000 जवानों की तैनाती की गई है। शहर के हर कोने पर सीसीटीवी से नजर रखी जा रही है।
  2. AI और ड्रोन का उपयोग: पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। यह तकनीक भीड़ की संख्या और उनके व्यवहार का विश्लेषण कर रियल-टाइम डेटा कंट्रोल रूम को भेजेगी।
  3. नो-फ्लाई जोन: भोजशाला के 300 मीटर के दायरे को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। यहां बिना अनुमति ड्रोन या पैराग्लाइडर उड़ाना प्रतिबंधित है।
  4. जिग-जैग और वॉच टावर: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए परिसर के बाहर ‘जिग-जैग’ बैरिकेडिंग की गई है ताकि लोग कतारबद्ध होकर ही अंदर जा सकें।

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यातायात और शहर की व्यवस्था

प्रशासन ने भारी वाहनों के लिए विस्तृत डायवर्जन प्लान जारी किया है।

इंदौर नाका, रतलाम नाका और मांडव मार्ग से आने वाले वाहनों को शहर के बाहर ही रोककर वैकल्पिक रास्तों पर मोड़ा गया है।

स्थानीय लोगों के लिए भी सड़कों पर निर्माण सामग्री या टायर रखने पर पाबंदी है ताकि आवाजाही में कोई बाधा न आए।

विवाद का फ्लैशबैक

यह पहली बार नहीं है जब भोजशाला में तनाव की स्थिति बनी हो।

साल 2003, 2006, 2013 और 2016 में भी जब शुक्रवार को बसंत पंचमी पड़ी, तब पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था।

1995 से चली आ रही व्यवस्था के अनुसार, सामान्य दिनों में मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की अनुमति है।

बाकी दिनों में यह पर्यटकों के लिए खुला रहता है।

लेकिन बसंत पंचमी जैसे विशेष अवसर पर दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने आ जाते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला धार्मिक आस्था और सामाजिक सद्भाव के बीच संतुलन बनाने की एक कोशिश है।

प्रशासन का लक्ष्य यह है कि भक्त शांतिपूर्वक मां सरस्वती की आराधना भी कर लें और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए नमाज भी अदा हो जाए।

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