Dhar Sterilization Camp: मध्य प्रदेश के धार जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है।
बाग क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में आयोजित एक नसबंदी शिविर में आदिवासी महिलाओं के साथ जो सुलूक हुआ, उसने सरकारी दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
180 से ज्यादा महिलाओं को जानवरों की तरह जमीन पर लिटा दिया गया, जबकि डॉक्टर ने किसी मशीन की तरह चंद घंटों में सैकड़ों ऑपरेशन निपटा दिए।

धूप, प्यास और बेबसी
शुक्रवार को बाग के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में परिवार नियोजन शिविर लगाया गया था।
सुबह 8 बजे से ही दूर-दराज के गांवों से आदिवासी महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ यहां पहुंचने लगी थीं।
नियम कहते हैं कि ऑपरेशन से पहले और बाद में मरीज को पूरा आराम और देखभाल मिलनी चाहिए, लेकिन यहां की हकीकत अलग थी।
अस्पताल में न तो पीने का पानी था और न ही बैठने की जगह। ऑपरेशन के बाद महिलाओं को बेड तक नसीब नहीं हुए।
उन्हें अस्पताल के बाहर तपती धूप में, खुले आसमान के नीचे जमीन पर लिटा दिया गया।
असहनीय दर्द से तड़पती इन महिलाओं को उनके परिजन कपड़ों से हवा करके राहत देने की कोशिश कर रहे थे।

दो मिनट में एक ऑपरेशन
बताया जा रहा है कि बड़वानी से आए प्राइवेट डॉक्टर राकेश डावर दोपहर 3 बजे अस्पताल पहुंचे और बेहद कम समय में 180 से ज्यादा ऑपरेशन कर डाले।
अस्पताल के स्टाफ ने गर्व से दावा किया कि डॉक्टर साहब “मात्र 2 मिनट में एक नसबंदी” कर देते हैं।
डॉक्टरी नियमों के मुताबिक, एक डॉक्टर को एक दिन में अधिकतम 30 ऑपरेशन ही करने चाहिए ताकि संक्रमण का खतरा न रहे और गुणवत्ता बनी रहे।
लेकिन यहां टारगेट पूरा करने की होड़ में महिलाओं की जान जोखिम में डाल दी गई।
इतनी तेज रफ्तार से किए गए ऑपरेशन मेडिकल प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन हैं।

जिम्मेदारों की गैर-मौजूदगी और कार्रवाई
जब यह सब तमाशा चल रहा था, तब मुख्य ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (CBMO) मौके से गायब थे।
मीडिया के पहुंचने पर वे सामने आए और मीटिंग का बहाना बनाने लगे।
हालांकि, मामला तूल पकड़ते ही प्रशासन हरकत में आया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अनीता सिंगारे ने माना है कि नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं।
शुरुआती कार्रवाई के तौर पर बीएमओ को उनके पद से हटाकर जिला मुख्यालय अटैच कर दिया गया है और मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।


