Digvijaya Singh Indore High Court- मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को इंदौर हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका की पैरवी करते हुए गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि मस्जिदों के बाहर लाउडस्पीकर और डीजे बजाकर लोगों को उकसाया जा रहा है, लेकिन पुलिस और प्रशासन इस मामले में मूक दर्शक बना हुआ है।
सिंह ने यह बातें हाईकोर्ट के डबल बेंच के सामने करीब 20 मिनट तक चली बहस के दौरान अपने तर्कों में रखीं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हो रहा: दिग्विजय सिंह
याचिका की सुनवाई के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित कराना है।
उन्होंने कोर्ट से कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने उपद्रव, धार्मिक रैलियों और जुलूसों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन इनका पालन नहीं हो रहा है।”

उन्होंने सवाल उठाया कि हिंसा के पीड़ितों को मुआवजा कैसे मिलेगा और वे किस पुलिस अधिकारी से संपर्क करें, इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है।
राम मंदिर निर्माण फंड के नाम पर हुई हिंसा का जिक्र
दिग्विजय सिंह ने अपनी याचिका में दिसंबर 2020 में इंदौर, उज्जैन और मंदसौर में हुई घटनाओं का विशेष तौर पर जिक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के लिए धन संग्रह के दौरान कुछ संगठनों ने अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया और उन्हें धमकाया गया।
सिंह ने स्पष्ट किया, “हम राम मंदिर के पवित्र निर्माण कार्य का समर्थन करते हैं, लेकिन दान स्वैच्छिक होना चाहिए। दान देने के लिए अल्पसंख्यक वर्ग पर दबाव या धमकी नहीं दी जानी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि धन संग्रह रैलियों के दौरान आयोजकों ने सुनियोजित तरीके से हिंसा फैलाई, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।

मॉब लिंचिंग रोकने और नोडल अधिकारी नियुक्त करने की मांग
पूर्व सीएम ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के तीन महत्वपूर्ण फैसलों को लागू करने की मांग की है।
इनमें भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा (मॉब लिंचिंग) पर रोक लगाना और धार्मिक रैलियों व जुलूसों के दौरान शांति बनाए रखना शामिल है।
सिंह ने सुझाव दिया कि हर जिले में एक नोडल पुलिस अधिकारी और एक टास्क फोर्स बनाई जाए, जिसका काम खुफिया जानकारी जुटाना और नफरत फैलाने वाले भाषणों (हेट स्पीच) पर नजर रखना हो।
शासन का जवाब और दिग्विजय सिंह की प्रतिक्रिया
याचिका के जवाब में शासन की ओर से दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है और याचिका में बताए गए मामलों में जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
इस पर दिग्विजय सिंह ने जवाब दिया कि अगर ऐसा है तो शासन को इस बारे में एक स्टेटस रिपोर्ट जारी करनी चाहिए या फिर एक न्यायमित्र (अमिकस क्यूरी) नियुक्त किया जाना चाहिए, ताकि सही जानकारी कोर्ट तक पहुंच सके।

‘मेरे खिलाफ दर्ज केस राजनीतिक हैं’
बहस के दौरान शासन पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि दिग्विजय सिंह की यह याचिका स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि उनके खिलाफ खुद 11 एफआईआर दर्ज हैं।
इस पर सिंह ने स्पष्ट करते हुए कहा, “मैं 55 साल से सार्वजनिक जीवन में हूं और कई रैलियों-आयोजनों में शामिल होता हूं, इसीलिए ये केस हुए हैं। इनमें से कोई भी केस भ्रष्टाचार या सांप्रदायिक मामले से जुड़ा हुआ नहीं है। ये सभी राजनीतिक केस हैं, जो जनहित के मुद्दे उठाने के कारण दर्ज किए गए हैं।”
सभी पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले को ‘सुनवाई के बाद सुरक्षित’ रख लिया है।
अब अदालत जल्द ही इस पर अपना फैसला सुनाएगी।


