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बिजनेसमैन दिलीप गुप्ता के ठिकानों पर EOW की रेड: 35 करोड़ के निवेश घोटाले का मामला

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Dilip Gupta EOW Raid: मध्य प्रदेश की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने भोपाल के कारोबारी दिलीप गुप्ता के कार्यालय और निवास स्थान पर शुक्रवार सुबह छापेमारी की।

यह कार्रवाई उन पर निवेशकों से लगभग 35.37 करोड़ रुपये हड़पने के आरोप में दर्ज मामले की जांच के तहत की गई।

छापे एमपी नगर जोन-2 स्थित कार्यालय और चूना भट्टी इलाके में उनके घर पर हुई।

ईओडब्ल्यू की टीम फिलहाल जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है।

क्या है पूरा मामला?

दिलीप गुप्ता और उनकी कंपनियों मेसर्स डीजी माइंस एंड मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स श्री मां सीमेंटेक प्राइवेट लिमिटेड पर आरोप है कि उन्होंने निवेशकों को झूठे लालच देकर उनसे भारी रकम ऐंठी।

आरोपों के मुताबिक, उन्होंने अपनी कंपनी के 10 रुपये के शेयर को 12 हजार 972 रुपये में बेचकर निवेशकों को बड़े पैमाने पर धोखा दिया।

ईओडब्ल्यू का कहना है कि गुप्ता ने बंद बैंक खातों के चेक भी जारी किए और ऊंचे मुनाफे का झांसा देकर निवेशकों से उनकी पारिवारिक संपत्तियां भी गिरवी रखवा लीं।

निवेशकों पर कैसे पड़ा असर?

इस मामले की शिकायत भोपाल निवासी विनीत जैन और उनकी मां लता जैन ने की थी।

उन्होंने ईओडब्ल्यू को बताया कि दिलीप गुप्ता ने उन्हें भारी मुनाफे का लालच देकर आईसीआईसीआई बैंक से 2.75 करोड़ रुपये और पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस से 4.45 करोड़ रुपये का लोन लेने के लिए प्रेरित किया।

इस पूरी राशि को उन्होंने गुप्ता की कंपनियों में निवेश कर दिया। जैन का आरोप है कि गुप्ता ने फर्जी चेक और कागजात तैयार करके उनके साथ धोखाधड़ी की।

ईडी भी कर रही है जांच

इस मामले ने अब और बड़ा रूप ले लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी 31 अक्टूबर को इस मामले में एक और मामला दर्ज किया है।

ईडी अब पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून) के तहत जांच कर रही है।

जांच एजेंसी डीजी माइंस एंड मिनरल्स कंपनी के शेयरों की खरीद-फरोख्त और अमरूद की फसल से हुई कथित डेढ़ करोड़ रुपये की आमदनी पर भी गौर करेगी।

फर्म से जुड़े कुछ अन्य लोगों को भी जांच के दायरे में लिया जा सकता है।

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