Ethiopia Volcano Eruption: अफ्रीका के इथियोपिया में स्थित हेली गुब्बी (Haley Gubbi) ज्वालामुखी में लगभग 12,000 साल बाद रविवार को जोरदार विस्फोट किया।
इस विस्फोट से उठा राख और जहरीली गैसों का गुबार लगभग 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और हवाओं के साथ सफर करता हुआ 4300 किलोमीटर दूर भारत की राजधानी दिल्ली समेत उत्तरी भारत के कई इलाकों में पहुंच गया।
इस दुर्लभ घटना ने न सिर्फ वैज्ञानिकों को चौंकाया है, बल्कि इसने भारत में हवाई यातायात को भी प्रभावित किया है, जिसके चलते एअर इंडिया की 11 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
Ethiopia witnessed a massive volcanic eruption this morning from Mount Haile Gobi, part of the Erta Ale range in the remote Danakil region. Lava and ash spewed high into the sky as authorities monitored potential risks to nearby communities.#Ethiopia #Volcano #HaileGobi pic.twitter.com/Vd7bE5bKWB
— Al-Estiklal English (@alestiklalen) November 24, 2025
क्या हुआ था इथियोपिया में?
इथियोपिया का ‘हेली गुब्बी’ ज्वालामुखी दरअसल एक ‘शील्ड ज्वालामुखी’ है जो देश के अफार (Afar) क्षेत्र में स्थित है।
इस इलाके को अक्सर ‘पृथ्वी का नर्क’ कहा जाता है क्योंकि यहां का तापमान कई बार 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
यह इलाका पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट वैली का हिस्सा है, जहां पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटें लगातार एक-दूसरे से अलग हो रही हैं।
इसी भूगर्भीय हलचल के कारण यहां ज्वालामुखीय गतिविधियां आम हैं, लेकिन हेली गुब्बी का इतने लंबे अंतराल के बाद फटना एक असाधारण घटना मानी जा रही है।
विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इससे निकली राख और सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) गैस का विशाल बादल वायुमंडल की दूसरी परत स्ट्रैटोस्फीयर में 15 किमी की ऊंचाई तक पहुंच गया।
यह बादल लाल सागर को पार करते हुए यमन और ओमान तक फैल गया।
Ethiopia’s Hayli Gubbi volcano just woke up after 10,000+ years of sleep.
First historic eruption: 15 km ash plume drifting across the Red Sea right now.
Nature reminding everyone—who needs missiles when you’ve got magma? #HayliGubbi #EthiopiaVolcano #RedSea pic.twitter.com/zdHd7EvC7p— OmiVerseGlobal (@omiverseglobal) November 24, 2025
4300 किमी का सफर: राख दिल्ली तक कैसे पहुंची?
यह सबसे हैरान करने वाला पहलू है। इथियोपिया से दिल्ली की सीधी दूरी लगभग 4500 किलोमीटर है।
इतनी दूरी तय करने का श्रेय जाता है वायुमंडल में चलने वाली तेज हवाओं यानी ‘जेट स्ट्रीम’ को।
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जेट स्ट्रीम का रोल: जेट स्ट्रीम पश्चिम से पूर्व की ओर 100 से 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली अत्यंत शक्तिशाली हवाओं का एक चैनल है, जो समुद्र तल से लगभग 8 से 12 किमी की ऊंचाई पर स्थित है। चूंकि ज्वालामुखी की राख बहुत ऊंचाई (15 किमी) तक पहुंच गई थी, यह इन्हीं जेट स्ट्रीम की चपेट में आ गई।
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राख की यात्रा का रास्ता: इसकी यात्रा का सफर कुछ यूं रहा:
- 23 नवंबर: विस्फोट के बाद राख का बादल लाल सागर पार कर यमन और ओमान पहुंचा।
- अगला पड़ाव: फिर यह अरब प्रायद्वीप से होता हुआ अरब सागर के ऊपर से गुजरा और पाकिस्तान की ओर बढ़ा।
- भारत में प्रवेश: यह राख का बादल भारत में सबसे पहले राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर इलाके से दाखिल हुआ।
- दिल्ली पर पहुंच: सोमवार रात करीब 11 बजे तक यह बादल राजस्थान, हरियाणा होता हुआ दिल्ली-एनसीआर के आसमान पर छा गया। मौसम विभाग के अनुसार, यह राश 15,000 फीट से लेकर 45,000 फीट की ऊंचाई के बीच फैली हुई थी।
The Hayli Gubbi volcano in Ethiopia’s north-eastern #Afar region has erupted for the first time in nearly 12,000 years, sending thick plumes of smoke up to 14 km into the sky, and across the #RedSea towards #India, one of the busiest air traffic regions. pic.twitter.com/BhJgeXd9oW
— Slovenia in Ethiopia (@SLOinETH) November 25, 2025
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उपग्रह चित्रों और विभिन्न मॉडल्स की मदद से इस राख के बादल की मूवमेंट पर पैनी नजर रखी।
हवाई यातायात पर असर, उड़ानें रद्द
ज्वालामुखी की राख हवाई जहाजों के लिए अत्यंत खतरनाक होती है।
इसमें मौजूद कांच और चट्टान के सूक्ष्म कण विमान के इंजन को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे इंजन फेल भी हो सकता है।
इसके अलावा, राख से विमान की खिड़कियां धुंधली हो सकती हैं और नेविगेशन सिस्टम प्रभावित हो सकता है।
इस खतरे को देखते हुए भारतीय विमानन नियामक DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने सभी एयरलाइन्स और एयरपोर्ट्स के लिए तत्काल दिशा-निर्देश जारी किए:
- एयरलाइन्स को राख वाले इलाकों के ऊपर उड़ान भरने से बचने को कहा गया।
- उड़ान मार्गों और योजना में बदलाव करने के निर्देश दिए गए।
- अगर किसी विमान को राख के संपर्क में आने का संदेह हो (जैसे इंजन की परफॉर्मेंस में गिरावट, केबिन में धुंआ या बदबू), तो तुरंत रिपोर्ट करने को कहा गया।
#WATCH | New Delhi | Visuals from Indira Gandhi International Airport.
After Ethiopia’s Hayli Gubbin volcano erupted on Sunday, the Directorate General of Civil Aviation (DGCA) issued an advisory to airlines asking them to avoid altitudes and regions affected by ash clouds. pic.twitter.com/ytEEIsw7xH
— ANI (@ANI) November 24, 2025
इसके परिणामस्वरूप, एअर इंडिया को अपनी 11 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कुल 19 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुईं, जिनमें अकासा एयर, इंडिगो और KLM जैसी एयरलाइन्स की उड़ानें शामिल थीं।
क्या दिल्ली के प्रदूषण पर पड़ेगा असर? क्या सावधानियां बरतें?
यह सवाल हर दिल्लीवासी के मन में उठ रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों और IMD का मानना है कि आम जनजीवन पर इसका कोई गंभीर असर नहीं होगा। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
- ऊंचाई: राख का बादल बहुत ऊंचाई (15,000-45,000 फीट) पर है। सतह पर इसके कणों के गिरने की मात्रा नगण्य या बहुत कम रहने की संभावना है।
- अस्थायी प्रकृति: मौसम विभाग ने स्पष्ट किया कि यह राख का बादल मंगलवार शाम लगभग 7:30 बजे तक भारत से निकलकर चीन की ओर बढ़ जाएगा।
हालांकि, राख में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) गैस से हल्की धुंध छा सकती है और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है।
#WATCH | Delhi: On ash clouds from Ethiopia’s Hayli Gubbi volcano eruption reaching India, Mrutyunjay Mohapatra, Director General of Meteorology, IMD, says, “The impact of this volcanic ash is being seen only in the upper troposphere, and it is affecting the flight operations. It… pic.twitter.com/GbCWpv0gcQ
— ANI (@ANI) November 25, 2025
फिलहाल, आम लोगों के लिए कोई विशेष एहतियात बरतने की सलाह नहीं दी गई है।
हालांकि, संवेदनशील लोग (जैसे अस्थमा या सांस के मरीज) सामान्य सावधानी बरत सकते हैं:
- घर से बाहर निकलते समय मास्क पहन सकते हैं।
- अनावश्यक रूप से बाहर समय बिताने से बच सकते हैं।
- अगर आंखों या सांस में तकलीफ महसूस हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
वैज्ञानिक दृष्टि से क्यों है यह घटना महत्वपूर्ण?
हेली गुब्बी ज्वालामुखी का फटना सिर्फ एक खबर ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए एक दुर्लभ अध्ययन का अवसर भी है।
- दुर्लभ घटना: कोई ज्वालामुखी हजारों सालों की निष्क्रियता के बाद अचानक क्यों और कैसे सक्रिय होता है, इसे समझना भू-विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि होगी।
- टेक्टोनिक गतिविधि का संकेत: यह विस्फोट इस बात का संकेत दे सकता है कि अफार रिफ्ट वैली में भूगर्भीय हलचलें बढ़ रही हैं और मैग्मा के भंडार में कुछ बड़े बदलाव हो रहे हैं।
- भविष्य की भविष्यवाणी: इस घटना के अध्ययन से वैज्ञानिकों को भविष्य में इसी तरह के लंबे समय से सोए हुए ज्वालामुखियों के व्यवहार का पूर्वानुमान लगाने में मदद मिल सकती है।
Ethiopian Volcano Hayli Gubbi Erupted
1,709 ft volcano with First ever eruption ever recorded today, explosive ash plume 6–9 miles high, drifting toward Yemen/Oman https://t.co/lhKxFF1qsa pic.twitter.com/bmAcgip0wD
— DisasterAlert (@DisasterAlert2) November 24, 2025
इथियोपिया के हेली गुब्बी ज्वालामुखी का विस्फोट प्रकृति की अद्भुत शक्ति और पृथ्वी की गतिशीलता का एक जीवंत उदाहरण है।
हालांकि इसने भारत में हवाई यातायात को कुछ समय के लिए प्रभावित किया, लेकिन भारतीय अधिकारियों द्वारा समय रहते की गई तैयारी और जारी की गई चेतावनियों के कारण कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई।


