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गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ‘चीनी रोबोट’ ने AI समिट में किया भारत को शर्मिंदा, कांग्रेस का सरकार पर वार

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Galgotias University Robot Controversy: दिल्ली में आयोजित हाई-प्रोफाइल AI इम्पैक्ट समिट में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक ‘रोबोटिक डॉग’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

दावा किया गया कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीन के बने-बनाए रोबोट को अपना बताकर पेश किया, जिसके बाद सरकार ने उन्हें वेन्यू से बाहर होने का आदेश दे दिया।

इसके बाद गलगोटिया के स्टाफ ने AI एक्सपो में स्टॉल खाली किया।

विवाद की शुरुआत?

18 फरवरी को दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर एक बड़ा कार्यक्रम चल रहा था।

यहां गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपना एक स्टॉल लगाया था, जहां एक रोबोटिक कुत्ता (Robot Dog) आकर्षण का केंद्र बना हुआ था।

यूनिवर्सिटी ने इसे ‘ओरियन’ नाम दिया। विवाद तब शुरू हुआ जब यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ।

वीडियो में वह कथित तौर पर इसे यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की खोज बता रही थीं।

सोशल मीडिया और ‘एक्स’ ने खोली पोल

जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर आया, टेक एक्सपर्ट्स ने तुरंत पहचान लिया कि यह कोई नया आविष्कार नहीं है।

यह असल में चीन की मशहूर कंपनी ‘Unitree Robotics’ का Go2 मॉडल है।

यह रोबोट बाजार में करीब 2 से 3 लाख रुपये में आसानी से उपलब्ध है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ ने तो इस पर ‘कम्युनिटी नोट’ भी डाल दिया, जिसमें लिखा गया कि यूनिवर्सिटी का दावा भ्रामक है।

सरकार का सख्त रुख

न्यूज एजेंसी और सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही यह पता चला कि एक विदेशी प्रोडक्ट को भारतीय इनोवेशन के रूप में पेश किया जा रहा है, आयोजकों ने इसे ‘मेक इन इंडिया’ की भावना के खिलाफ माना।

खबर आई कि यूनिवर्सिटी को एक्सपो एरिया खाली करने का आदेश दे दिया गया।

 Galgotias University Robot Controversy

यूनिवर्सिटी का पक्ष: “यह चलता-फिरता क्लासरूम है”

विवाद बढ़ता देख यूनिवर्सिटी ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने साफ़ किया कि:

  • उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि यह रोबोट उन्होंने खुद बनाया है।
  • यह रोबोट छात्रों को नई तकनीक सिखाने के लिए एक ‘एजुकेशनल टूल’ के तौर पर खरीदा गया है।
  • प्रोफेसर नेहा सिंह ने अपनी सफाई में कहा कि “जोश और उत्साह” में शायद बात सही ढंग से नहीं कही जा सकी और वह इसकी जिम्मेदारी लेती हैं।

यूनिवर्सिटी का कहना है कि वे ऐसी तकनीकें बाहर से इसलिए लाते हैं ताकि भारतीय छात्र उन्हें देखकर उनसे बेहतर चीजें भारत में बना सकें।

कांग्रेस का आरोप:

इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने इसे भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया।

मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का मजाक बनवाया है।

चीनी रोबोट को ‘अपना’ बताकर दिखाने से चीनी मीडिया को हम पर हंसने का मौका मिला है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह समिट सिर्फ एक “पीआर तमाशा” बनकर रह गई है, जहां भारतीय टैलेंट को बढ़ावा देने के बजाय विदेशी सामान का दिखावा हो रहा है।

क्या है यूनिट्री Go2 रोबोट?

यह चीन की कंपनी यूनिट्री द्वारा बनाया गया एक बहुत ही फुर्तीला रोबोट है। इसकी खूबियाँ कुछ इस प्रकार हैं:

  • 4D LiDAR: इसकी मदद से यह अंधेरे में भी देख सकता है और बाधाओं को पहचान कर सीढ़ियां चढ़ सकता है।

  • AI क्षमता: यह वॉयस कमांड पर काम करता है और खुद से फैसले लेने में सक्षम है।

  • कीमत: भारत में इसकी कीमत 2 से 3 लाख रुपये के बीच है।

यह पूरा विवाद इस बात की ओर इशारा करता है कि ‘इनोवेशन’ और ‘उपयोग’ के बीच एक बारीक रेखा होती है।

शिक्षा के लिए विदेशी तकनीक का इस्तेमाल करना गलत नहीं है, लेकिन उसे अपनी खोज बताकर पेश करना ‘एकेडमिक ईमानदारी’ पर सवाल खड़े करता है।

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