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अडाणी को अमेरिकी अदालत से बड़ी राहत: रिश्वत और धोखाधड़ी का केस खारिज, जानें 2,100 करोड़ के इस मामले में क्या-क्या हुआ

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Gautam Adani US Case Dismissed: भारतीय उद्योगपति और अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ी राहत की खबर सामने आई है।

अमेरिका की एक अदालत ने गौतम अडाणी और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रहे बहुचर्चित रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के मामले को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गारौफिस ने न्याय विभाग (DoJ) की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें इस केस को बंद करने का अनुरोध किया गया था।

कोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद गौतम अडाणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

उन्होंने लिखा कि वह न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरी निष्ठा, विनम्रता और सम्मान रखते हुए अमेरिकी अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हैं।

इस फैसले के साथ ही पिछले लगभग दो वर्षों से अडाणी समूह पर लटक रही कानूनी और वित्तीय अनिश्चितताओं की तलवार हट गई है।

क्या था पूरा मामला और भारत का मामला अमेरिका कैसे पहुंचा?

इस मामले का मुख्य केंद्र बिंदु भारत में सोलर पावर (सौर ऊर्जा) के ठेके हासिल करना था।

हालांकि, यह केस अमेरिकी न्यायाधिकार क्षेत्र के तहत इसलिए आया क्योंकि इसमें अमेरिका के निवेशकों और वित्तीय संस्थानों का पैसा शामिल था।

अडाणी समूह की प्रमुख कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी ने सितंबर 2021 में अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूंजी जुटाने के उद्देश्य से 75 करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के बॉन्ड जारी किए थे।

इन बॉन्ड्स में से लगभग 17.5 करोड़ डॉलर (करीब 1,450 करोड़ रुपये) का निवेश अमेरिका के संस्थागत निवेशकों द्वारा किया गया था।

अमेरिकी जांच एजेंसियों का आरोप था कि बॉन्ड जारी करते समय और निवेशकों से पैसा जुटाते समय अडाणी ग्रुप ने कंपनी के व्यावसायिक जोखिमों और रिश्वत रोकने के आंतरिक तंत्र के बारे में पूरी और पारदर्शी जानकारी नहीं दी।

अमेरिकी नियमों के अनुसार, यदि कोई विदेशी कंपनी अमेरिकी निवेशकों से धन जुटाती है और उन्हें तथ्य छिपाकर या गुमराह करके निवेश कराती है, तो उस पर अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों और वायर फ्रॉड (इलेक्ट्रॉनिक धोखाधड़ी) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

इसी आधार पर यह मामला अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) और न्याय विभाग के पास पहुंचा।

अडाणी और सहयोगियों पर लगाए गए प्रमुख आरोप

अमेरिकी अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में दाखिल किए गए दस्तावेज के अनुसार, अडाणी और उनके सहयोगियों पर तीन प्रमुख बिंदुओं के तहत आरोप तय किए गए थे:

* सोलर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए रिश्वत की योजना: आरोप था कि वर्ष 2020 से 2024 के बीच गौतम अडाणी, उनके भतीजे सागर अडाणी और अडाणी ग्रीन एनर्जी के पूर्व सीईओ विनीत एस. जैन ने भारत में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा की आपूर्ति के सरकारी ठेके प्राप्त करने के लिए भारतीय अधिकारियों को लगभग 25 करोड़ डॉलर (तकरीबन 2,100 करोड़ रुपये) की रिश्वत देने या उसका वादा करने की योजना बनाई।

* 16,800 करोड़ रुपये के संभावित मुनाफे का अनुमान: अमेरिकी जांच में यह भी दावा किया गया था कि इन सोलर कॉन्ट्रैक्ट्स के माध्यम से अडाणी ग्रुप को अगले 20 वर्षों के दौरान लगभग 2 अरब डॉलर (लगभग 16,800 करोड़ रुपये) का शुद्ध लाभ होने का अनुमान था।

* जांच प्रक्रिया में बाधा डालने की साजिश: मामले में सिर्फ अडाणी परिवार ही नहीं, बल्कि विदेशी निवेश फंड्स और निजी कंपनियों के कुछ अधिकारियों पर भी जांच से खिलवाड़ करने का आरोप लगा।

सिरिल कैबेनेस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रुपेश अग्रवाल जैसे अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने ग्रैंड ज्यूरी, एफबीआई (FBI) और SEC की जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक संदेशों और ईमेल रिकॉर्ड्स को मिटाने का प्रयास किया और जांचकर्ताओं के समक्ष गलत बयानबाजी की।

अडाणी समूह ने पहले दिन से ही इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था और कहा था कि कंपनी ने हमेशा कॉर्पोरेट गवर्नेंस और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पूरी निष्ठा से पालन किया है।

केस से जुड़े प्रमुख नाम और उनकी भूमिकाएँ

इस हाई-प्रोफाइल मामले में गौतम अडाणी और सागर अडाणी के अलावा कई अन्य कॉरपोरेट अधिकारियों के नाम भी सामने आए थे:

* विनीत एस. जैन: अडाणी ग्रीन एनर्जी के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)। इन पर अडाणी बंधुओं के साथ मिलकर निवेशकों से जानकारी छिपाने और योजना में सहयोग करने का आरोप था।

* सिरिल कैबेनेस: कनाडा के प्रमुख पेंशन व निवेश फंड CDPQ के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी। इन पर कथित तौर पर रिश्वत की योजना की जानकारी रखने और इसे छिपाने का आरोप लगाया गया था।

* सौरभ अग्रवाल और दीपक मल्होत्रा: CDPQ के पूर्व कर्मचारी, जिन पर जांच अधिकारियों को भ्रमित करने और सबूतों से छेड़छाड़ करने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा।

* रुपेश अग्रवाल: एज़्योर पावर (Azure Power) के पूर्व अधिकारी, जिनका नाम भी इस मामले के तार जोड़ते हुए शामिल किया गया था।

मामले की Timeline 

  • सितंबर 2021: अडाणी ग्रीन एनर्जी ने $750 मिलियन के अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड जारी किए, जिनमें $175 मिलियन अमेरिकी निवेशकों से मिले।
  • 20 नवंबर 2024: अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) और SEC ने न्यूयॉर्क की अदालत में गौतम अडाणी और अन्य के खिलाफ रिश्वतखोरी व धोखाधड़ी का आपराधिक मामला दर्ज किया।
  • 18 मई 2026: अमेरिकी न्याय विभाग ने रुख बदलते हुए अदालत को सूचित किया कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता और केस वापस लेने की याचिका दायर की।
  • 04 जुलाई 2026; न्याय विभाग ने अपनी दलील में कहा कि मामला मुख्यतः भारत के क्षेत्राधिकार से जुड़ा है, इसे अमेरिका में साबित करना जटिल है और यह विभाग की प्राथमिकता सूची में नहीं है।
  • 15 जुलाई 2026: अडाणी के कानूनी सलाहकारों ने अदालत के समक्ष यह स्पष्ट किया कि समूह ने अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया हुआ है।
  • 10 अगस्त 2026: जज निकोलस गारौफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग की याचिका को स्वीकार करते हुए गौतम अडाणी के खिलाफ दर्ज केस खारिज कर दिया।

अडाणी समूह और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इस फैसले के मायने

गौतम अडाणी ने महज 16 वर्ष की उम्र में अपना स्कूल छोड़कर कमोडिटी ट्रेडिंग के साथ अपने व्यावसायिक सफर की शुरुआत की थी।

1988 में स्थापित हुआ यह छोटा सा कारोबार आज बंदरगाह (Ports), हवाई अड्डे (Airports), खनन (Mining), बिजली उत्पादन, ग्रीन एनर्जी और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भारत का एक विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर साम्राज्य बन चुका है।

अमेरिकी अदालत द्वारा केस खारिज किए जाने से अडाणी समूह के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में पूंजी जुटाना और वैश्विक निवेशकों का विश्वास फिर से हासिल करना आसान हो जाएगा।

इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों और वैश्विक बैंकर्स के बीच अडाणी ग्रुप की साख मजबूत होगी, जिसका सीधा फायदा समूह की आगामी ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मिलेगा।

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