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कितना खतरनाक है ‘कोरियन लवर’ गेम? जिसकी वजह से सुसाइड करने पर मजबूर हुईं 3 बच्चियां

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Korean Lover Game Suicide Case: दिल्ली-एनसीआर से सटे गाजियाबाद के लोनी इलाके में स्थित ‘भारत सिटी’ सोसाइटी में मंगलवार की रात तीन बहनों ने एक साथ सुसाइड कर लिया।

रात के करीब 2:30 बजे तीन नाबालिग बहनें निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) एक साथ टावर बी-1 के फ्लैट नंबर 907 की बालकनी पर खड़ी थीं।

कुछ ही पलों में उन्होंने एक-एक कर 9वीं मंजिल से नीचे छलांग लगा दी।

जमीन से टकराने की तेज आवाज और चीखों ने सन्नाटा चीर दिया।

जब तक लोग पहुंचे, तीनों बहनों की सांसें थम चुकी थीं।

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क्या है ‘कोरियन लवर’ गेम?

शुरुआती जांच और परिजनों के बयानों से पता चला है कि तीनों बहनें ‘कोरियन लवर’ (Korean Lover) नाम के एक ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम की बुरी तरह आदी हो चुकी थीं।

यह गेम ‘ब्लू व्हेल’ या ‘मोमो चैलेंज’ की तरह काम करता है।

इसमें खिलाड़ी को अलग-अलग टास्क दिए जाते हैं, जो धीरे-धीरे मानसिक रूप से उसे काबू में कर लेते हैं।

बताया जा रहा है कि इस गेम में कुल 50 टास्क थे। घटना वाली रात इन बच्चियों का आखिरी और 50वां टास्क था।

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इस गेम का जादू इन पर इस कदर सवार था कि वे गेम के किरदारों और कोरियन कल्चर (K-Culture) को अपनी असल जिंदगी से ज्यादा महत्व देने लगी थीं।

वे न केवल मोबाइल पर घंटों गेम खेलती थीं, बल्कि उनके रहन-सहन और सोच पर भी इसका गहरा असर था।

पिता का बयान 

बच्चियों के पिता चेतन कुमार के अनुसार, तीनों बहनें हर वक्त एक-दूसरे के साथ रहती थीं।

वे एक साथ सोती थीं, एक साथ खाना खाती थीं और यहां तक कि टॉयलेट और नहाने भी साथ ही जाती थीं।

पिता ने बताया कि उन्हें गेम की लत का अंदाजा था, इसलिए उन्होंने कुछ समय पहले उनका मोबाइल छीन लिया था और उन्हें गेम न खेलने की चेतावनी दी थी। शायद यही बंदिश बच्चियों को रास नहीं आई।

पिता ने की है दो शादियां

चेतन ने दो शादियां की थीं (दोनों पत्नियां सगी बहनें हैं)।

मृत बच्चियों में से दो दूसरी पत्नी की थीं और एक पहली पत्नी की। हालांकि, तीनों सगी बहनों की तरह ही रहती थीं।

हैरान करने वाली बात यह है कि मोबाइल गेम की सनक के कारण इन बच्चियों ने पिछले दो साल से स्कूल जाना भी छोड़ दिया था और वे घर पर ही रहती थीं।

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18 पन्नों का सुसाइड नोट 

पुलिस को मौके से एक डायरी मिली है, जिसमें 18 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा है।

इस नोट में जो बातें लिखी हैं, वे मोबाइल एडिक्शन के भयानक स्तर को दर्शाती हैं। बच्चियों ने लिखा:

“मम्मी-पापा सॉरी… हम गेम नहीं छोड़ पा रहे हैं। अब आपको अहसास होगा कि हम इस गेम से कितना प्यार करते थे, जिसे आप हमसे छुड़वाना चाहते थे।”

डायरी के पन्नों में यह भी लिखा था, “I am very very alone” (मैं बहुत अकेली हूं), लेकिन इसे बाद में पेन से काट दिया गया था।

उसके ऊपर लिखा था, “Make me a heart of broken”

सुसाइड नोट में बार-बार कोरियन कल्चर का जिक्र किया गया था, जो बताता है कि वे अपनी एक अलग ही काल्पनिक दुनिया बना चुकी थीं।

पुलिस की कार्रवाई 

एसीपी अतुल कुमार के मुताबिक, पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच (Digital Investigation) के लिए जब्त कर लिया है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:

  • यह गेम किस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध था?
  • क्या कोई बाहरी व्यक्ति या एडमिन उन्हें टास्क दे रहा था?
  • क्या यह गेम डार्क वेब के जरिए संचालित हो रहा था?

पुलिस का कहना है कि बच्चियां पढ़ाई में कमजोर थीं और स्कूल न जाने के कारण उनका सामाजिक संपर्क खत्म हो गया था। वे पूरी तरह से डिजिटल दुनिया पर निर्भर थीं।

अभिभावकों के लिए चेतावनी

गाजियाबाद की यह घटना महज एक सुसाइड केस नहीं है, बल्कि आज के डिजिटल युग में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मोबाइल की लत को लेकर एक बड़ा अलार्म है।

जब गेमिंग ‘मनोरंजन’ से ‘सनक’ बन जाती है, तो परिणाम ऐसे ही भयावह होते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, अकेले रहना और मोबाइल के प्रति अति-लगाव को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।

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