New Marriage Registration Rules: गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार ने राज्य में विवाह पंजीकरण (Marriage Registration) को लेकर एक बेहद सख्त कदम उठाया है।
अब राज्य में चोरी-छिपे या भागकर शादी करना आसान नहीं होगा।
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने विधानसभा में घोषणा की है कि शादी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में अब माता-पिता को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा और उन्हें इसकी सूचना दी जाएगी।

धोखाधड़ी और ‘लव जिहाद’ पर नकेल
सरकार का तर्क है कि कई मामलों में बेटियों को पहचान छिपाकर या बहला-फुसलाकर शादी के जाल में फंसाया जाता है।
बाद में जब हकीकत सामने आती है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
हर्ष संघवी ने साफ लहजे में कहा कि “सनातन परंपरा की रक्षा और बेटियों की इज्जत के लिए सरकार ढाल बनकर खड़ी है।”
यह नया नियम विशेष रूप से उन मामलों को रोकने के लिए लाया गया है जिन्हें अक्सर ‘लव जिहाद’ या पहचान छिपाकर की गई धोखाधड़ी कहा जाता है।

पंचमहाल का वो मामला, जिसने सरकार को चौंकाया
इस बड़े फैसले के पीछे राज्य के पंचमहाल जिले में सामने आई एक बड़ी गड़बड़ी भी है।
जांच में पाया गया कि कुछ ऐसे गांवों में, जहाँ न तो कोई मुस्लिम परिवार था और न ही कोई मस्जिद, वहां सैकड़ों की संख्या में निकाह सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए।
स्थानीय अधिकारियों (तलाटी-कम-मंत्री) की मिलीभगत से बने इन फर्जी दस्तावेजों पर सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया और अब पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है।

क्या हैं नए नियम और प्रक्रिया?
नए नियमों के अनुसार, अब शादी के पंजीकरण के लिए दूल्हा-दुल्हन के साथ दो गवाहों के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे।
आवेदन को कानूनी रूप से नोटरी कराना होगा।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि आवेदन में इस बात की घोषणा (Declaration) करनी होगी कि क्या दूल्हा-दुल्हन ने अपने माता-पिता को इस शादी की जानकारी दी है।

पंजीकरण की प्रक्रिया अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी।
असिस्टेंट रजिस्ट्रार आवेदन मिलने के 10 दिनों के भीतर दूल्हा-दुल्हन के माता-पिता को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (SMS/Email) या फिजिकल नोटिस के जरिए सूचित करेगा।
अगर रजिस्ट्रार पूरी प्रक्रिया से संतुष्ट होता है, तभी 30 दिनों के बाद शादी को आधिकारिक तौर पर रजिस्टर किया जाएगा।

दस्तावेजों की लंबी सूची
अब शादी के कार्ड और फोटो के साथ-साथ कई अन्य दस्तावेज भी ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने होंगे:
- दूल्हा-दुल्हन और गवाहों का आधार कार्ड।
- बर्थ सर्टिफिकेट या स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट।
- शादी की रस्म निभाते हुए फोटो।
- माता-पिता के पहचान पत्र।
जनता से मांगे गए सुझाव
कानून मंत्री कौशिक वेकारिया ने बताया कि यह फैसला करीब 30 सामाजिक संगठनों से चर्चा के बाद लिया गया है।
सरकार ने इन नए नियमों पर 30 दिनों तक जनता से सुझाव मांगे हैं।
अगर कोई बेहतर सुझाव आता है, तो उसे जोड़ा जाएगा, अन्यथा ये नियम स्थायी रूप से लागू कर दिए जाएंगे।


