High Court Vijaypur Assembly Seat: ग्वालियर हाईकोर्ट ने विजयपुर विधानसभा सीट से जुड़ा एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
कोर्ट ने कांग्रेस के विधायक मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को ‘शून्य’ (Void) घोषित कर दिया है। यानी अब मुकेश मल्होत्रा विधायक नहीं रहे।
सिर्फ इतना ही नहीं, अदालत ने चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत को विजयपुर का नया विधायक घोषित कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?
इस कानूनी लड़ाई की जड़ें साल 2024 के विजयपुर उपचुनाव से जुड़ी हैं।
उस चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर मुकेश मल्होत्रा मैदान में थे और उनके सामने बीजेपी के कद्दावर नेता रामनिवास रावत थे।
चुनाव के नतीजे आए तो मुकेश मल्होत्रा ने रामनिवास रावत को 7,364 वोटों के अंतर से हरा दिया था।
इस जीत के बाद मल्होत्रा विधानसभा पहुंचे, लेकिन उनकी यह खुशी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाई।
रामनिवास रावत ने इस चुनाव परिणाम को ग्वालियर हाईकोर्ट में चुनौती दी।
उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि मुकेश मल्होत्रा ने चुनाव आयोग को दिए गए शपथ पत्र (Affidavit) में अपने आपराधिक रिकॉर्ड की सही जानकारी नहीं दी थी।
रावत का दावा था कि मल्होत्रा ने जानबूझकर अपने खिलाफ दर्ज 6 गंभीर आपराधिक मामलों को छिपाया, जो चुनाव नियमों का सीधा उल्लंघन है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी और फैसला
ग्वालियर हाईकोर्ट की बेंच के जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया ने इस मामले की गहन सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों और दस्तावेजों से यह साफ हो गया कि मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन भरते समय वाकई में अपने ऊपर दर्ज केसों की जानकारी छिपाई थी।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार के लिए पारदर्शी होना अनिवार्य है।
मतदाताओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके प्रतिनिधि का पिछला रिकॉर्ड क्या है।
चूंकि मल्होत्रा ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और जानकारी छिपाई, इसलिए उनका चुनाव अवैध माना गया।
कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं के तहत मल्होत्रा का निर्वाचन निरस्त कर दिया।

रामनिवास रावत को कैसे मिली विधायकी?
आमतौर पर जब किसी विधायक का चुनाव रद्द होता है, तो वहां दोबारा चुनाव (उपचुनाव) कराए जाते हैं। लेकिन इस मामले में पेंच अलग था।
रामनिवास रावत ने अपनी याचिका में मांग की थी कि चूंकि मल्होत्रा का नामांकन ही गलत था, इसलिए उनके बाद सबसे ज्यादा वोट पाने वाले उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए रामनिवास रावत को विजयपुर का विधायक घोषित कर दिया।

जीत के बाद क्या बोले रावत
इस फैसले के बाद रामनिवास रावत ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया है।
उन्होंने कहा कि राजनीति में सुचिता और ईमानदारी सबसे ऊपर होनी चाहिए।
झूठ बोलकर या जानकारी छिपाकर जनता का प्रतिनिधि नहीं बना जा सकता।
वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि उसने न केवल एक सीट गंवाई है, बल्कि उसके विधायक पर जानकारी छिपाने के गंभीर आरोप भी सिद्ध हुए हैं।

जीतू पटवारी बोले- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
चुनाव कैंसिल होने पर मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि एक साल पहले विजयपुर की जनता ने कांग्रेस को जनादेश दिया।
मुकेश मल्होत्रा को भारी वोटों से जिताया। फैसले के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
पटवार ने कहा- हमें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा। अगर चुनाव भी हुआ तो जितने वोटों से रामनिवास रावत को हराया था।
उससे दोगुना वोटों से फिर हराएंगे। विजयपुर की जनता रावत को और बीजेपी को हराने के लिए फिर तैयार बैठी है।

मध्य प्रदेश की राजनीति पर असर
विजयपुर की यह जंग शुरू से ही दिलचस्प रही थी।
रामनिवास रावत पहले खुद कांग्रेस में थे और इस सीट से कई बार विधायक रह चुके थे।
उनके बीजेपी में जाने के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने मुकेश मल्होत्रा को उतारा था।
उस वक्त रावत की हार को बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना गया था और रावत ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री पद से इस्तीफा भी दे दिया था।
अब हाईकोर्ट के इस फैसले ने वक्त का पहिया घुमा दिया है।

अब रामनिवास रावत एक बार फिर विधायक के रूप में विधानसभा में नजर आएंगे।
इस फैसले से अन्य नेताओं के लिए भी एक कड़ा संदेश गया है कि चुनाव आयोग को दी जाने वाली जानकारी में जरा सी भी हेराफेरी भारी पड़ सकती है।
अब देखना यह होगा कि मुकेश मल्होत्रा इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं या नहीं, लेकिन फिलहाल के लिए विजयपुर की कमान रामनिवास रावत के हाथों में आ गई है।
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