IAS Property Declaration: देश की सबसे ताकतवर सर्विस मानी जाने वाली भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अफसरों की कमाई और संपत्ति को लेकर हमेशा आम जनता में उत्सुकता रहती है।
हाल ही में केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय (DoPT) ने आईएएस अधिकारियों की अचल संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक किया है।
इस रिपोर्ट में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारियों यानी ‘मुख्य सचिवों’ (Chief Secretary) की संपत्ति के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है।

3 राज्यों के IAS की संपत्ति में जमीन-आसमान का अंतर
अगर तुलना की जाए, तो छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव ‘करोड़पति’ क्लब में शामिल हैं, जबकि राजस्थान के मुख्य सचिव इस मामले में काफी पीछे नजर आते हैं।
छत्तीसगढ़ के सीएस विकास शील
इस फेहरिस्त में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील सबसे अमीर हैं।
उनके पास कुल 4.93 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है।
उनकी प्रॉपर्टी में रायपुर का घर और देहरादून में करोड़ों की पैतृक जमीन शामिल है।

मध्यप्रदेश के सीएस अनुराग जैन
एमपी के मुख्य सचिव अनुराग जैन दूसरे नंबर पर हैं।
उनकी घोषित संपत्ति करीब 4.12 करोड़ रुपये है।
इसमें भोपाल में उनकी पत्नी के नाम जमीन और नोएडा में एक आलीशान फ्लैट शामिल है।

राजस्थान के सीएस वी श्रीनिवास
सबसे हैरान करने वाला आंकड़ा राजस्थान के मुख्य सचिव का है।
वी श्रीनिवास की कुल घोषित संपत्ति महज 10.30 लाख रुपये है।
उनके पास सिकंदराबाद में एक छोटा घर है और हैदराबाद का फ्लैट उनकी बेटी के नाम पर है।

मध्यप्रदेश के सबसे अमीर IAS कौन?
सिर्फ मुख्य सचिव ही नहीं, मध्यप्रदेश कैडर के अन्य अफसरों की संपत्ति की जानकारी भी सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यप्रदेश के सबसे अमीर आईएएस अधिकारी अपर मुख्य सचिव (ACS) मनु श्रीवास्तव हैं।
उनकी कुल संपत्ति 19.5 करोड़ रुपये बताई गई है।

वहीं, टी प्रतीक राव 10.5 करोड़ और प्रताप नारायण यादव 10.2 करोड़ की संपत्ति के साथ टॉप लिस्ट में शामिल हैं।
कलेक्टरों की बात करें, तो टीकमगढ़ के कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय इस मामले में सबसे आगे हैं, जिनके पास 6.2 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी है।
100 अफसरों के पास अपना घर तक नहीं
जहां कुछ अफसर करोड़ों की जमीन और घरों के मालिक हैं, वहीं एक चौंकाने वाला आंकड़ा यह भी है कि मध्यप्रदेश कैडर के 100 आईएएस अफसर ऐसे हैं जिनके पास न तो अपना कोई निजी मकान है और न ही कोई प्लॉट।
हालांकि, 231 अधिकारी ऐसे भी हैं जिनके पास अच्छी-खासी खेती की जमीन है।
पारदर्शिता के लिए जरूरी है खुलासा
केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक, हर आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी को हर साल 31 दिसंबर तक अपनी संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य होता है।
यह कदम प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है।

इसमें अधिकारी को अपनी खुद की, पत्नी की और बच्चों के नाम पर दर्ज सभी अचल संपत्तियों (जमीन, मकान, दुकान आदि) की जानकारी देनी होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन आंकड़ों में पैतृक संपत्ति (जो परिवार से विरासत में मिली हो) और खुद की कमाई से किए गए निवेश, दोनों शामिल होते हैं।
अक्सर अफसरों की संपत्ति में बड़ा हिस्सा उनकी पारिवारिक विरासत का होता है।
संपत्ति का पूरा हिसाब-किताब
| राज्य | मुख्य सचिव का नाम | कुल घोषित संपत्ति |
| छत्तीसगढ़ | विकास शील | ₹4,93,50,000 |
| मध्यप्रदेश | अनुराग जैन | ₹4,12,37,924 |
| राजस्थान | वी श्रीनिवास | ₹10,30,000 |
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