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IAS संतोष वर्मा को मिला नोटिस: सरकार ने 7 दिन में मांगा जवाब, ब्राह्मण बेटियों पर दिया था विवादित बयान

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

IAS Santosh Varma Notice: मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा को उनके एक विवादित बयान के लिए राज्य सरकार ने कठोर नोटिस जारी करते हुए ‘गंभीर कदाचरण’ का दोषी ठहराया है।

अजाक्स (AJAX) संगठन के प्रांताध्यक्ष के रूप में एक कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज की बेटियों पर दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तूफान खड़ा कर दिया है।

सरकार ने उनसे 7 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है और चेतावनी दी है कि जवाब न मिलने पर एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

23 नवंबर, 2025 को भोपाल के अंबेडकर मैदान में अजाक्स के एक प्रांतीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए आईएएस संतोष वर्मा ने आरक्षण को लेकर एक टिप्पणी की।

कथित तौर पर उन्होंने कहा, “एक परिवार में एक व्यक्ति को आरक्षण तब तक देना चाहिए, जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता।”

इस वीडियो के सामने आते ही यह बयान तेजी से वायरल हुआ और विभिन्न संगठनों, विशेषकर ब्राह्मण समाज के लोगों ने इसकी कड़ी निंदा की।

बयान को महिलाओं का अपमान और एक विशिष्ट जाति के प्रति घृणा फैलाने वाला बताया गया।

सरकार का नोटिस और कानूनी आधार

राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने बुधवार की देर रात जारी नोटिस में आरोप लगाया है कि श्री वर्मा का यह बयान भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी से अपेक्षित आचरण के अनुरूप नहीं है।

नोटिस में कहा गया है कि यह “अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता और गंभीर कदाचरण” की श्रेणी में आता है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि उन पर अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम, 1967 का उल्लंघन करने का आरोप है, जिसके आधार पर उनके खिलाफ अखिल भारतीय सेवा अनुशासन तथा अपील नियम, 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

नोटिस में सीधे तौर पर पूछा गया है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।

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सिविल सर्विस आचरण नियम क्या कहते हैं?

एक आईएएस अधिकारी पर लागू होने वाले आचरण नियमों के मुताबिक:

  • पद की गरिमा: अधिकारी का हर बयान और व्यवहार उसके पद की गरिमा के अनुरूप होना चाहिए। ऐसा कोई बयान नहीं दिया जा सकता जो समाज में तनाव, विभाजन या जातीय वैमनस्य पैदा करे।
  • समुदाय का अपमान नहीं: किसी भी जाति, समुदाय, विशेषकर महिलाओं के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी नियमों का स्पष्ट उल्लंघन मानी जाती है।
  • सार्वजनिक संयम: सार्वजनिक मंचों, भाषणों और सोशल मीडिया पर तटस्थता, संयम और संवैधानिक जिम्मेदारियों का पालन करना अनिवार्य है।
  • राजनीतिक/उत्तेजक टिप्पणी वर्जित: अधिकारी ऐसी कोई टिप्पणी नहीं कर सकते जो राजनीतिक लक्ष्य रखती हो या किसी वर्ग के बीच भड़काऊ प्रभाव डालती हो।
  • अनुचित प्रभाव: वह बयान न दें जो सरकार की छवि खराब करे, समुदायों के बीच खाई बढ़ाए या उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करे।

इन नियमों के उल्लंघन पर अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाता है, जांच की जाती है और अंततः चेतावनी, निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई तक हो सकती है।

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राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

  • भाजपा के प्रदेश मंत्री लोकेंद्र पाराशर ने इस बयान को ‘घिनौना’ और ‘निकृष्ट’ बताते हुए कहा कि ऐसा अधिकारी आईएएस के लायक नहीं है और उसे कानूनन सजा मिलनी चाहिए।
  • राष्ट्रीय सनातन सेना के अध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ल ने आईएएस वर्मा को ‘आतंकवादी’ तक कहा और उनका ‘मुंह काला’ करने वाले को 51 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की।
  • अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने एमपी नगर थाने के सामने जोरदार प्रदर्शन किया और फरसा लेकर नारेबाजी करते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की।
  • मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ ने भी उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।

अजाक्स संगठन में नेतृत्व का संकट

इस बीच, अजाक्स संगठन में अध्यक्ष पद को लेकर भी उथल-पुथल जारी है।

संगठन के एक धड़े के नेता मुकेश मौर्य ने दावा किया है कि उन्हें ही वैध अध्यक्ष चुना गया है और रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज के दफ्तर में उनके नाम का पंजीयन हो चुका है।

ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि सरकार जल्द ही अजाक्स के नए अध्यक्ष के रूप में मुकेश मौर्य को मान्यता दे सकती है।

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7 दिन में देना होगा जवाब

आईएएस संतोष वर्मा के पास अब सरकार को दिए गए 7 दिनों की अवधि में अपना पक्ष रखने का मौका है।

अगर उनका जवाब सरकार को संतोषजनक नहीं लगता है या वे जवाब देने में चूक करते हैं, तो सरकार उनके खिलाफ एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है, जिसमें सेवा में रहते हुए दंड से लेकर गंभीर मामलों में बर्खास्तगी तक के प्रावधान शामिल हैं।

यह मामला सिविल सेवकों की जिम्मेदारियों और उनके द्वारा सार्वजनिक टिप्पणियों पर फिर से चर्चा छेड़ देगा।

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