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114 नए राफेल फाइटर जेट्स खरीदेगी भारत सरकार, अब चीन-पाकिस्तान की खैर नहीं

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

114 Rafale Deal India: भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना की घटती ताकत को बढ़ाने के लिए फ्रांस से 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।

करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की यह मेगा-डील न केवल हमारी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि भारत को दुनिया के सबसे शक्तिशाली हवाई बेड़ों में शामिल कर देगी।

अब यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा।

वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 17-20 फरवरी के 3 दिवसीय भारत दौरे पर सौदा हो सकता है।

क्यों पड़ी 114 राफेल की जरूरत?

भारतीय वायुसेना इस समय एक बड़े संकट से गुजर रही है वह है फाइटर स्क्वाड्रनों की कमी।

भारत को दो मोर्चों (चीन और पाकिस्तान) पर एक साथ निपटने के लिए 42 स्क्वाड्रनों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में यह संख्या घटकर केवल 29-30 रह गई है।

पुराने मिग विमान रिटायर हो रहे हैं, ऐसे में राफेल की यह नई खेप वायुसेना के लिए किसी ‘संजीवनी’ से कम नहीं है।

चीन-पाकिस्तान के लिए क्यों है खतरे की घंटी

राफेल सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि आसमान में चलता-फिरता एक कंप्यूटर और घातक युद्ध मशीन है।

इसकी कुछ खूबियां इसे पड़ोसियों के लिए सिरदर्द बनाती हैं:

  1. मिसाइलों की तिकड़ी: राफेल के पास ‘मेट्योर’ मिसाइल है, जो हवा से हवा में मार करने वाली दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मिसाइल मानी जाती है।

  2. इसके अलावा, ‘स्कैल्प’ मिसाइल दुश्मन के बंकरों को मीलों दूर से नेस्तनाबूद कर सकती है, जबकि ‘हैमर’ किसी भी मौसम में सटीक निशाना लगाने की गारंटी देता है।

  3. स्पेक्ट्रा तकनीक: इसमें लगा ‘स्पेक्ट्रा’ इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट इसे दुश्मन के रडार की नजरों से छिपाए रखता है। यानी दुश्मन को पता भी नहीं चलेगा और राफेल अपना काम करके निकल जाएगा।

  4. मल्टी-रोल क्षमता: यह एक ही मिशन के दौरान अपनी भूमिका बदल सकता है। यह जासूसी विमान से सीधे हमलावर विमान में तब्दील हो सकता है।

‘मेक इन इंडिया’ और टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर

इस बार की डील पिछली बार से अलग है। यह सौदा ‘मेक इन इंडिया’ के तहत होगा।

फ्रांस की कंपनी ‘डसॉल्ट एविएशन’ भारत में रिलायंस और अन्य कंपनियों के साथ मिलकर इन विमानों का निर्माण करेगी।

  • टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT): भारत को न केवल विमान मिलेंगे, बल्कि उन्हें बनाने की तकनीक भी मिलेगी।

  • स्वदेशी हथियार: इन राफेल जेट्स में भारतीय मिसाइलें और सेंसर लगाए जाएंगे, जिससे भविष्य में हम अपनी जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उम्मीद है कि इनमें 55 से 60 फीसदी हिस्सा भारतीय सामान का होगा।

फ्रांस पुराना दोस्त

जब दुनिया ने भारत पर प्रतिबंध लगाए, तब भी फ्रांस भारत के साथ खड़ा रहा।

1950 के दशक के ‘तूफानी’ विमानों से लेकर 1999 के कारगिल युद्ध में ‘मिराज-2000’ के पराक्रम तक, फ्रांसीसी विमानों ने हमेशा भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई है।

यही कारण है कि भारत एक बार फिर फ्रांस पर भरोसा जता रहा है।

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मैक्रों के दौरे पर लग सकती है अंतिम मुहर

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) से मंजूरी मिलने के बाद अब यह प्रस्ताव कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास जाएगा।

माना जा रहा है कि 17 से 20 फरवरी के बीच जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आएंगे, तब इस ऐतिहासिक सौदे पर अंतिम हस्ताक्षर हो सकते हैं।

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