LPG Production India: इस वक्त मिडिल ईस्ट सुलग रहा है।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चिंता में डाल दिया है।
भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है, इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।
किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने अब एक बड़ा और एहतियाती कदम उठाया है।

सरकार ने देश की दिग्गज तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे एलपीजी (रसोई गैस) का उत्पादन बढ़ाएं।
क्या है सरकार का नया आदेश?
हाल ही में जारी सरकारी निर्देशों के अनुसार, सभी रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल (प्लास्टिक या अन्य रसायन) बनाने के बजाय केवल एलपीजी बनाने के लिए करें।
सरल शब्दों में कहें तो, जिन गैसों का इस्तेमाल औद्योगिक कच्चा माल बनाने में होता था, अब उन्हें डायवर्ट करके रसोई गैस बनाने में लगाया जाएगा।

इतना ही नहीं, सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की इन कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि एलपीजी की बिक्री प्राथमिकता के आधार पर केवल घरेलू ग्राहकों को ही की जाए।
यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन बाधित होती है, तो भी आम आदमी के किचन पर इसका असर न पड़े।
मिडिल ईस्ट का तनाव और भारत की चिंता
भारत अपनी जरूरत का लगभग 40% कच्चा तेल ‘होर्मुज की खाड़ी’ (Strait of Hormuz) के रास्ते मंगवाता है।
ईरान और इजरायल के बीच लड़ाई अगर बढ़ती है, तो इस रास्ते से होने वाली सप्लाई ठप हो सकती है।

रॉयटर्स और एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 85 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं और जंग शुरू होने के बाद से इनमें 15% से ज्यादा का उछाल देखा गया है।
बैकअप प्लान: ‘स्टॉक’ और ‘सप्लायर’ दोनों पर नजर
हालांकि स्थिति चिंताजनक है, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक:
- पर्याप्त भंडार: भारत के पास रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) सहित लगभग 8 हफ्तों का कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है।
- नए सप्लायर्स: भारत केवल खाड़ी देशों के भरोसे नहीं है। सरकार रूस से भारी मात्रा में तेल आयात कर रही है। साथ ही, अमेरिका और यूएई (UAE) के साथ भी नए समझौते किए गए हैं ताकि सप्लाई के स्रोतों को विविधता दी जा सके।
- वैश्विक बातचीत: भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और ओपेक (OPEC) जैसे संगठनों के संपर्क में है।
- साथ ही, समुद्री जहाजों के इंश्योरेंस कवरेज को लेकर अमेरिका से भी बातचीत जारी है, ताकि युद्ध क्षेत्र के आसपास से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा मिल सके।

प्रोपेन और ब्यूटेन का गणित
आम जनता के लिए यह जानना जरूरी है कि हम जो एलपीजी इस्तेमाल करते हैं, वह असल में प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होती है।
रिफाइनिंग प्रक्रिया के दौरान ये गैसें निकलती हैं।
आमतौर पर कंपनियां इनका एक हिस्सा प्लास्टिक और केमिकल बनाने के लिए अलग रख देती हैं।
लेकिन अब सरकार ने कहा है कि “पेट्रोकेमिकल बाद में बनेंगे, पहले देश की रसोई चलनी चाहिए।”

रोजाना हो रही है मॉनिटरिंग
सरकारी सूत्रों का कहना है कि ऊर्जा मंत्रालय के उच्च अधिकारी दिन में दो बार देश की ऊर्जा स्थिति की समीक्षा (Review) कर रहे हैं।
अभी तक की रिपोर्ट के अनुसार, देश में इन्वेंट्री यानी स्टॉक की कोई कमी नहीं है और सप्लाई नियमित रूप से आ रही है।
सरकार का यह कदम ‘प्रोएक्टिव’ गवर्नेंस का एक उदाहरण है। संकट आने का इंतजार करने के बजाय, सरकार ने पहले ही घरेलू संसाधनों को सुरक्षित करना शुरू कर दिया है।
प्रोपेन और ब्यूटेन के उपयोग पर पाबंदी और एलपीजी उत्पादन पर जोर देने से यह सुनिश्चित होगा कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी भारतीय घरों में गैस सिलेंडर की कमी न हो।


