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14.2 किलो वाले सिलेंडर में सिर्फ 10kg गैस देने की योजना! जानें आपकी जेब और रसोई पर क्या होगा असर?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

14.2kg vs 10kg LPG Cylinder: भारत में सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने एलपीजी (LPG) सिलेंडर की किल्लत से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है।

खबर है कि अब घरों में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक 14.2 किलो के सिलेंडर में पूरी गैस नहीं भरी जाएगी।

इसके बजाय, कंपनियों का प्लान है कि इनमें सिर्फ 10 किलो गैस भरी जाए ताकि स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचाया जा सके।

क्यों लिया जा रहा है यह फैसला?

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह है ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रही जंग।

भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी विदेशों से आयात (Import) करता है, जिसमें से 90% हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।

युद्ध के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसा महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता लगभग बंद हो गया है।

क्या है सरकार का प्लान?

भारत के 6 बड़े गैस टैंकर फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं।

जब तक ये टैंकर भारत नहीं पहुंचते, तब तक देश में गैस की भारी कमी बनी रहेगी।

तेल कंपनियों का गणित सीधा है—एक औसत परिवार में 14.2 किलो का सिलेंडर 35 से 40 दिन चलता है।

अगर इसमें सिर्फ 10 किलो गैस दी जाए, तो भी परिवार का काम लगभग एक महीने चल जाएगा।

इससे जो 4 किलो गैस बचेगी, उसे उन परिवारों को दिया जा सकेगा जो फिलहाल खाली सिलेंडर लेकर बैठे हैं।

कीमतों में कितनी आएगी गिरावट?

आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या गैस कम मिलने पर पैसे उतने ही देने होंगे?

राहत की बात यह है कि गैस की मात्रा कम होने पर सिलेंडर के दाम भी उसी अनुपात में घटाए जाएंगे।

उदाहरण के तौर पर, अगर दिल्ली में 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत ₹913 है, तो 10 किलो गैस के लिए आपको लगभग ₹640 से ₹650 के आसपास चुकाने पड़ सकते हैं।

कंपनियों ने यह भी साफ किया है कि जनता में कोई भ्रम न फैले, इसके लिए इन ‘शॉर्ट-फिल’ सिलेंडरों पर एक विशेष स्टिकर लगाया जाएगा।

इस स्टिकर पर गैस की सही मात्रा और उसकी नई कीमत साफ-साफ लिखी होगी।

सप्लाई चैन और बॉटलिंग प्लांट्स की चुनौती

हालांकि, यह योजना जितनी सुनने में आसान लग रही है, उतनी है नहीं।

भारत के विभिन्न राज्यों में स्थित बॉटलिंग प्लांट्स में ऑटोमेटिक मशीनें 14.2 किलो के वजन पर सेट होती हैं।

अब इन मशीनों को 10 किलो के लिए ‘रीकैलिब्रेट’ (फिर से सेट) करना होगा।

इसके अलावा, अचानक वजन कम करने से जनता में नाराजगी या भ्रम पैदा हो सकता है, विशेषकर उन राज्यों में जहां चुनाव होने वाले हैं।

सरकार और कंपनियां इन सभी तकनीकी और राजनीतिक चुनौतियों पर विचार कर रही हैं।

संकट गहराने की दो मुख्य वजहें

  1. कतर का प्लांट बंद होना: ईरान के हमलों की वजह से कतर का ‘रास लफ्फान’ प्लांट फिलहाल बंद है। यह दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी (LNG) हब है। ग्लोबल सप्लाई का 20% यहीं से आता है। इसके बंद होने से दुनिया भर में गैस की सप्लाई चेन टूट गई है।
  2. होर्मुज जलमार्ग का खतरा: 167 किलोमीटर लंबा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ वह रास्ता है जहां से दुनिया का 20% पेट्रोलियम गुजरता है। भारत अपनी 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। युद्ध के कारण यह रूट असुरक्षित हो गया है और बीमा कंपनियों ने भी यहाँ से गुजरने वाले जहाजों का जोखिम लेने से मना कर दिया है।

सरकार द्वारा अब तक उठाए गए कड़े कदम

गैस की बर्बादी रोकने और समान वितरण के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने मार्च महीने में कई सख्त नियम लागू किए हैं:

  • बुकिंग पर पाबंदी: अब आप एक सिलेंडर लेने के बाद दूसरा सिलेंडर 21 से 25 दिन (शहरों में) और 45 दिन (गांवों में) से पहले बुक नहीं कर पाएंगे।

  • PNG यूजर्स पर सख्ती: जिन घरों में पाइप वाली गैस (PNG) का कनेक्शन है, उनके लिए एलपीजी सिलेंडर रखना अब गैर-कानूनी है। उन्हें अपने पुराने सिलेंडर तुरंत सरेंडर करने होंगे।

भारत इस समय ऊर्जा संकट के एक नाजुक दौर से गुजर रहा है।

10 किलो गैस का प्लान एक आपातकालीन समाधान है ताकि किसी भी घर का चूल्हा बंद न हो।

जनता को भी इस समय गैस का संयमित उपयोग करने की जरूरत है, क्योंकि खाड़ी देशों के हालात कब सामान्य होंगे, यह कहना फिलहाल मुश्किल है

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