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मानसून पड़ा सुस्त: देश से 90% बादल गायब, MP के 31 जिलों में सूखा तो बिहार में बाढ़ का कहर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Weather Monsoon Update: मौसम विभाग (IMD) की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने वैज्ञानिकों और आम जनता चिंता में डाल दिया है।

देश के लगभग 90% हिस्से से बादल अचानक गायब नजर आ रहे हैं। खासकर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के आसमान में बादलों की बहुत कमी देखी जा रही है।

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह मानसून के कमजोर पड़ने का सीधा इशारा है।

हालांकि, मानसून की अधिकारिक वापसी अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन बादलों का इस तरह छंटना चिंताजनक है।

विशेषज्ञ इसे प्रशांत महासागर में अल नीनो के असर यानी समुद्र का तापमान बढ़ने से मौसम में आ रहे बड़े बदलावों से जोड़कर देख रहे हैं।

बिहार में उफान पर नदियां, महाराष्ट्र में रिकॉर्डतोड़ बारिश

एक तरफ जहां देश के बड़े हिस्से में बादल गायब हैं, वहीं कुछ राज्य प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं।

बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती नदियां रौद्र रूप में हैं।

नदियों के उफान के कारण राज्य के 13 जिलों में बाढ़ की भयानक स्थिति बन गई है।

लगभग 27 लाख लोग इस आपदा से सीधे प्रभावित हैं और अब तक 20 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

दूसरी ओर, महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में स्थित अंबोली ने इस बार बारिश के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

अंबोली में मेघालय के चेरापूंजी से भी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

IMD के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने तक ही यहां 250 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका था और सितंबर के अंत तक यहां 400 इंच तक बारिश होने का अनुमान है।

मध्य प्रदेश में बारिश का मिला-जुला गणित

मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां अब तक औसतन 31.1 इंच (790.8 मिमी) बारिश दर्ज हुई है, जो इस सीजन के कुल कोटे का करीब 83.5% है।

अगर समय के हिसाब से देखा जाए, तो अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश हो जानी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में सामान्य से 2 इंच (लगभग 6%) कम पानी गिरा है।

प्रदेश में बारिश का वितरण काफी असमान रहा है:

* सामान्य से ज्यादा बारिश वाले 12 जिले:

भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज और उमरिया में मानसून मेहरबान रहा है।

 * कोटे के करीब (90%+ बारिश):

उमरिया, अनूपपुर, आगर-मालवा, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, ग्वालियर, गुना, दतिया, खरगोन और बुरहानपुर।

 * सबसे ज्यादा और सबसे कम बारिश:

इस सीजन में मऊगंज जिले में सबसे ज्यादा 53 इंच पानी गिरा है, जबकि आलीराजपुर में सबसे कम महज 13.6 इंच बारिश दर्ज की गई है।

पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में बड़ा अंतर

राज्य के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच बारिश में बड़ा अंतर देखने को मिला है।

पूर्वी हिस्सों (जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल) में औसत से मात्र 1% ज्यादा पानी गिरा है, जबकि पश्चिमी हिस्सों (इंदौर-उज्जैन संभाग) में हालत चिंताजनक है, जहां बारिश सामान्य से 12% तक कम हुई है।

हाल ही के दिनों में पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बने, जिससे वहां का बारिश का आंकड़ा बेहतर होकर प्लस में आ गया।

लेकिन प्रदेश के 31 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से 3% से लेकर 54% तक कम बारिश हुई है।

पश्चिमी मध्य प्रदेश के धार, इंदौर, देवास, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन, विदिशा और नर्मदापुरम जैसे जिलों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है।

आगे कैसा रहेगा मौसम?

मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, 11 सितंबर तक प्रदेश के केवल रीवा और शहडोल संभाग में ही तेज बारिश की संभावना है। बाकी जिलों में हल्की फुल्की बौछारें ही पड़ेंगी।

लेकिन किसानों और आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि 12 सितंबर के बाद एक नया मानसूनी सिस्टम एक्टिव हो सकता है, जिसके बाद पूरे मध्य प्रदेश में एक बार फिर अच्छी बारिश का दौर लौटने की उम्मीद है।

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