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टेक्सटाइल सेक्टर में बांग्लादेश को मिली बड़ी चुनौती, जानिए कैसे अब भारत बनेगा दुनिया का नया गारमेंट हब?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bangladesh Textile Crisis: हाल ही में पेश हुए बजट 2026 ने दक्षिण एशिया के कपड़ा बाजार में खलबली मचा दी है।

भारत के वित्त मंत्री ने टेक्सटाइल सेक्टर के लिए जो घोषणाएं की हैं, वे सीधे तौर पर हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी पर वार करती नजर आ रही हैं।

जहां एक तरफ बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की सरकार का भारत के प्रति रुख कड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ भारत ने आर्थिक मोर्चे पर अपनी घेराबंदी मजबूत कर ली है।

भारत कैसे मार रहा है बाजी?

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) गेम चेंजर साबित होने वाला है।

अभी तक स्थिति यह थी कि यूरोप के 263 अरब डॉलर के बड़े बाजार में बांग्लादेश को ‘ड्यूटी फ्री’ (बिना टैक्स) एंट्री मिलती थी, जबकि भारतीय कपड़ों पर 9 से 12 प्रतिशत तक का टैक्स लगता था।

इस टैक्स की वजह से हमारे कपड़े महंगे हो जाते थे और बांग्लादेश बाजी मार ले जाता था।

अब FTA के बाद भारत के लिए भी यह टैक्स जीरो हो जाएगा।

जब टैक्स बराबर होगा, तो भारत की बेहतर क्वालिटी और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता बांग्लादेश को कड़ी टक्कर देगी।

बजट 2026 में क्या है खास?

1 फरवरी 2026 को पेश हुए बजट में सरकार ने साफ कर दिया कि उसका लक्ष्य टेक्सटाइल निर्यात को 100 अरब डॉलर तक ले जाना है। इसके लिए कुछ प्रमुख कदम उठाए गए हैं:

* सिल्क और हैंडलूम को बढ़ावा: पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक मशीनों और ट्रेनिंग से जोड़ा जाएगा।

 * स्किल डेवलपमेंट: युवाओं को नई तकनीक सिखाई जाएगी ताकि कपड़ों की फिनिशिंग ग्लोबल स्टैंडर्ड की हो।

 * लेबर-इंटेंसिव पॉलिसी: ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने वाली फैक्ट्रियों को विशेष छूट दी जाएगी।

बांग्लादेश के लिए क्यों है यह खतरे की घंटी?

बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़े का निर्यातक है। उसकी पूरी इकोनॉमी गारमेंट इंडस्ट्री पर टिकी है।

लेकिन हाल के समय में वहां की राजनीतिक अस्थिरता और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों के बीच भारत ने खुद को एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में पेश किया है।

वर्तमान में बांग्लादेश के पास यूरोप के बाजार का 21-22% हिस्सा है, जबकि भारत के पास सिर्फ 5-6% है।

अब जब भारत को भी टैक्स छूट मिलेगी और सरकारी मदद से फैक्ट्रियां आधुनिक होंगी, तो विदेशी खरीदार भारत की ओर रुख करेंगे।

भारत का लक्ष्य 2030 तक अपने निर्यात को ढाई गुना बढ़ाना है, जो कि बांग्लादेश के लिए एक बड़ा आर्थिक संकट पैदा कर सकता है।

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