Homeन्यूजअमेरिका में अब 'जीरो टैक्स' पर बिकेंगे भारतीय फल, दवाइयां और हीरे,...

अमेरिका में अब ‘जीरो टैक्स’ पर बिकेंगे भारतीय फल, दवाइयां और हीरे, पीयूष गोयल ने किया ऐलान

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Piyush Goyal Zero Tariff: शनिवार, 7 फरवरी 2026 को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए भारत-अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) की पूरी जानकारी दी।

पीयूष गोयल ने साफ किया कि अब अमेरिका को निर्यात की जाने वाली कई प्रमुख भारतीय वस्तुओं पर जीरो प्रतिशत (0%) टैरिफ यानी कोई सीमा शुल्क नहीं लगेगा।

सबसे बड़ी बात यह है कि भारत के पड़ोसी देशों (जैसे चीन पर 35% और बांग्लादेश पर 20%) के मुकाबले भारत पर लगने वाला औसत टैरिफ घटाकर सिर्फ 18% कर दिया गया है।

साथ ही, रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर जो 25% का अतिरिक्त टैक्स लगाया गया था, उसे भी अब पूरी तरह हटा लिया गया है।

इन सामानों पर अब नहीं लगेगा कोई टैक्स (Zero Tariff List)

केंद्रीय मंत्री ने उन सामानों की लिस्ट दिखाई, जो अब बिना किसी रुकावट के अमेरिकी बाजार में पहुंचेंगे। इनमें शामिल हैं:

  1. रत्न और आभूषण: हीरा, जवाहरात और कीमती पत्थरों पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा। यह सूरत और मुंबई के हीरा व्यापारियों के लिए बड़ी राहत है।

  2. फार्मा सेक्टर: भारतीय जेनेरिक दवाएं, जो दुनिया भर में सस्ती और प्रभावी मानी जाती हैं, अब अमेरिका में जीरो टैरिफ पर बिकेंगी।

  3. कृषि उत्पाद: हमारे किसानों के लिए यह समझौता जैकपॉट जैसा है। अब भारत से चाय, मसाले, कॉफी, आम, काजू, नारियल तेल, वनस्पति मोम, सुपारी और ब्राजील नट्स बिना किसी टैक्स के अमेरिका भेजे जा सकेंगे।

  4. फल और सब्जियां: आम के अलावा केला, अनानास, मशरूम, एवोकाडो और कई प्रकार के खट्टे फलों के रस भी इस सूची में शामिल हैं।

  5. अन्य उत्पाद: स्मार्टफोन, विमान के पार्ट्स (Aircraft Parts), जौ, बेकरी उत्पाद, तिल और खसखस पर भी कोई रेसिप्रोकल टैरिफ नहीं लगेगा।

किसानों और मछुआरों को क्या होगा फायदा?

पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा कि इस समझौते का सीधा लाभ गांव-गांव तक पहुंचेगा।

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी वस्तुओं जैसे मसाले और जूट उत्पादों को जब अमेरिकी बाजार में जीरो ड्यूटी का लाभ मिलेगा, तो उनकी मांग बढ़ेगी।

इससे न केवल निर्यातकों की कमाई बढ़ेगी, बल्कि किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिलेगा।

विशेष रूप से, डेयरी सेक्टर और खेती से जुड़े संवेदनशील हितों की पूरी रक्षा की गई है।

सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत के घरेलू किसानों को नुकसान पहुंचाए बिना यह डील की जाए।

भारत की ओर से क्या वादा किया गया?

जहां अमेरिका ने भारतीय सामानों के लिए अपने दरवाजे खोले हैं, वहीं भारत ने भी अगले 5 वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर (लगभग 45 लाख करोड़ रुपये) के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है।

भारत मुख्य रूप से अमेरिका से ये चीजें खरीदेगा:

  1. ऊर्जा उत्पाद (Energy Products)
  2. कोकिंग कोल (स्टील निर्माण के लिए जरूरी)
  3. विमान और विमान के पुर्जे
  4. हाई-टेक टेक्नोलॉजी उत्पाद

सुरक्षा और शर्तें: नो जीएम फूड (No GM Food)

भारत ने अपनी नीतियों पर कड़ा रुख बरकरार रखा है।

पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि समझौते के बावजूद, जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) खाद्य पदार्थों को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है।

यह कदम भारत की खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का द्वार

अमेरिका वर्तमान में लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है।

पीयूष गोयल के अनुसार, भारतीय निर्यातकों के लिए अब यह विशाल बाजार ‘मोस्ट प्रीफर्ड’ (सबसे पसंदीदा) दर्जे के साथ खुल गया है।

इससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को जबरदस्त मजबूती मिलेगी और छोटे उद्योगों (MSMEs) के लिए विदेश में अपना माल बेचना आसान हो जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस समझौते को भारत और अमेरिका के लिए ‘खुशखबरी’ बताया है।

यह अंतरिम समझौता 2030 तक दोनों देशों के बीच 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में पहला बड़ा कदम है।

आने वाले समय में इसे एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) में बदलने के लिए 13 फरवरी 2025 से शुरू हुई बातचीत को और गति दी जाएगी।

- Advertisement -spot_img