Rahul Gandhi on US Tariff: अमेरिका के साथ हुई ‘ट्रेड डील’ को लेकर भारत की राजनीति में भूचाल आ गया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
विपक्ष का कहना है कि मोदी सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में आकर एक ऐसी डील की है, जिससे भारत के किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों का नुकसान होगा।
कांग्रेस नेताओं के तीखे बयान:
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि पीएम मोदी का ‘विश्वासघात’ अब सबके सामने है। उन्होंने एक बार फिर व्यापार समझौते के नाम पर आत्मसमर्पण कर दिया है।
अमेरिकियों को खुश करने के लिए हमारे किसानों की कुर्बानी क्यों दी गई?
अमेरिका को हमारे तेल आयात तय करने देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता क्यों किया गया?
बिना किसी पारस्परिक वादे के, हर साल $100 बिलियन का अमेरिकी आयात बढ़ाने पर सहमति क्यों दी गई?
मोदी जी ऐसा समझौता क्यों मानेंगे, जिसमें भारत इतना कुछ दे रहा और बदले में बहुत कम मिलता दिख रहा है?
व्यापार समझौते पर संसद में अपने भाषण में मैंने Jiu-Jitsu का उदाहरण क्यों इस्तेमाल किया?
अमेरिकियों को खुश करने के लिए हमारे किसानों की कुर्बानी क्यों दी गई?
अमेरिका को हमारे तेल आयात तय करने देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता क्यों किया गया?
बिना किसी पारस्परिक वादे के, हर… https://t.co/N3DS9BIEuU
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 20, 2026
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि आखिर किस मजबूरी में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का सौदा किया गया?
क्या 140 करोड़ भारतीयों के आत्मसम्मान की कोई कीमत नहीं है?
Clueless Foreign Policy or One-Sided Surrender?
Why did the Modi Govt not wait for the US Supreme Court judgement on tariffs before rushing to fall into a TRAP DEAL, which extracted huge concessions from India?
The Joint Statement spoke of zero tariffs on several American…
— Mallikarjun Kharge (@kharge) February 21, 2026
प्रियंका चतुर्वेदी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह डील पूरी तरह असंतुलित है।
हमारे निर्यात पर टैक्स है, जबकि उनके आयात पर लगभग जीरो। यह कैसी बराबरी है?
विपक्ष के गुस्से की वजह क्या है?
सारा विवाद अमेरिका के ‘टैरिफ’ (आयात शुल्क) को लेकर है।
दरअसल, अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर टैरिफ घटाकर 18% करने की बात कही थी।
लेकिन इसी बीच शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया।
कोर्ट ने ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को ‘अवैध’ घोषित कर दिया।
कोर्ट का कहना था कि टैक्स लगाने का अधिकार सिर्फ वहां की संसद (कांग्रेस) को है, राष्ट्रपति को नहीं।

मोदी सरकार ने इंतजार क्यों नहीं किया?
विपक्ष, खास तौर पर मल्लिकार्जुन खड़गे और जयराम रमेश का तर्क है कि जब अमेरिकी कोर्ट में मामला चल ही रहा था, तो मोदी सरकार ने 18 दिन का इंतजार क्यों नहीं किया?
अगर सरकार थोड़ा रुक जाती, तो शायद भारत को इतनी भारी रियायतें नहीं देनी पड़तीं।
खड़गे ने तो यहां तक पूछ लिया कि क्या पीएम मोदी पर ‘एप्सटीन फाइल्स’ जैसा कोई दबाव था?
‘अब अमेरिका टैरिफ नहीं देगा, लेकिन भारत हमें टैरिफ देगा’
– ये बात डोनाल्ड ट्रंंप ने कही है
साफ है-
इस ट्रेड डील का फायदा अमेरिका को होगा। पहले हम अमेरिका को सिर्फ 3% टैरिफ देते थे, जिसे मोदी ने 18% करवा दिया है।
आखिर नरेंद्र मोदी, ट्रंप से इतना डर क्यों रहे हैं, वो… pic.twitter.com/HavvHrS7H6
— Congress (@INCIndia) February 21, 2026
ट्रम्प का पलटवार और नई उलझन
सुप्रीम कोर्ट के झटके के महज 3 घंटे के भीतर डोनाल्ड ट्रम्प ने नया दांव खेल दिया।
उन्होंने फिर से पूरी दुनिया पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने के आदेश पर साइन कर दिए।
हालांकि, उन्होंने पीएम मोदी को अपना ‘अच्छा दोस्त’ बताया, लेकिन व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि भारत को भी अब 10% टैरिफ झेलना होगा।
विपक्ष का कहना है कि भारत ने जल्दबाजी में जो समझौता किया, उसमें अमेरिकी सामान पर ‘जीरो टैरिफ’ जैसी शर्तें मान लीं, जो भारत के हक में नहीं हैं।
The PM is compromised.
His betrayal now stands exposed.He can’t renegotiate.
He will surrender again.— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 21, 2026
अब आगे क्या?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, यह ‘अंतरिम व्यापार समझौता’ फरवरी के अंत तक फाइनल हो जाएगा।
लेकिन जिस तरह से अमेरिका में कानूनी और राजनीतिक उठापटक चल रही है, उसने भारत की घरेलू राजनीति को भी गरमा दिया है।
क्या यह डील वाकई भारत के लिए फायदेमंद साबित होगी या विपक्ष का ‘ट्रैप डील’ वाला आरोप सही निकलेगा, यह तो आने वाला वक्त और बाजार के आंकड़े ही बताएंगे।


