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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 15वीं मौत, हाई कोर्ट में आज सुनवाई

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Indore Water Death: भारत के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव रखने वाले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1400 से अधिक लोग संक्रमण का शिकार होकर बीमार हैं।

प्रशासन हालांकि मौतों का आंकड़ा कम बता रहा है, लेकिन क्षेत्र की स्थिति और स्थानीय निवासियों का दर्द कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है।

लैब रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

हाल ही में आई मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट ने इस पूरी त्रासदी की वजह साफ कर दी है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी के अनुसार, भागीरथपुरा क्षेत्र में पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन में गंभीर लीकेज था।

जांच में पाया गया कि एक पुलिस चौकी के समीप स्थित सार्वजनिक शौचालय और उसके आसपास जमा गंदगी इस लीकेज के जरिए पाइपलाइन के भीतर चली गई।

यही दूषित पानी घरों तक पहुंचा, जिसे पीने से लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए।

शिकायतों को किया गया अनसुना

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्होंने पाइपलाइन में लीकेज और गंदगी की समस्या को लेकर कई बार पार्षद और नगर निगम के अधिकारियों से शिकायत की थी। लेकिन प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी।

न तो पुलिस चौकी के पास फैली गंदगी को हटाया गया और न ही जर्जर पाइपलाइन की मरम्मत की गई।

अधिकारियों की इसी अनदेखी ने आज कई परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं।

कोर्ट की सख्ती और सरकारी कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने कुछ संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया है।

वहीं, आज मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में इस मामले पर महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है।

जबलपुर की दो सदस्यीय पीठ ऑनलाइन माध्यम से इस मामले को सुनेगी और सरकार से अब तक की स्थिति और राहत कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट मांगेगी।

यह घटना न केवल इंदौर की स्वच्छता छवि पर सवाल उठाती है, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली की पोल भी खोलती है।

क्या स्मार्ट सिटी के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की इतनी बड़ी अनदेखी जायज है?

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