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इंदौर में 17 मौतों के बाद खौफ: 516 बोरिंग के पानी पर लगा प्रतिबंध, घरों में RO लगवाने की मची होड़

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Indore Boring Water Ban: इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद पूरे शहर में हड़कंप मचा हुआ है।

इसी बीच ये बड़ी खबर सामने आई है कि शहर में 516 बोरिंग का पानी भी दूषित निकला है।

शुरुआत में माना जा रहा था कि केवल नर्मदा की पाइपलाइन में लीकेज की वजह से पानी दूषित हुआ है, लेकिन जब प्रशासन ने जमीन के भीतर के पानी (बोरिंग) की जांच की, तो नतीजे डरावने निकले।

बोरिंग का पानी भी दूषित

शहर के विभिन्न हिस्सों से लिए गए सैंपल में से 35 बोरिंग के पानी की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई।

इसके तुरंत बाद, नगर निगम ने 516 बोरिंग के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

इनमें 400 निजी और 116 सरकारी बोरिंग शामिल हैं।

जिन बोरिंग का पानी दूषित मिला है, उन पर लाल निशान (Red Mark) लगा दिए गए हैं ताकि लोग भूलवश भी उनका उपयोग न करें।

बैक्टीरिया का हमला: जान पर बनी आफत

माइक्रोबायोलॉजी लैब की जांच में पानी के सैंपल्स में कोलिफार्म (Coliform), ई-कोलाई (E. coli) और शिगेला (Shigella) जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं।

ये बैक्टीरिया आमतौर पर सीवर का पानी पीने के पानी में मिलने के कारण पनपते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पानी शरीर में जाते ही अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से जानलेवा साबित हो रहा है।

आरओ (RO) बना मजबूरी

इलाके में डर का माहौल ऐसा है कि लोग अब सरकारी सप्लाई या टैंकरों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा भेजे जा रहे टैंकरों में भी मटमैला और बदबूदार पानी आ रहा है।

ऐसे में मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग भी कर्ज लेकर या किश्तों पर 10 से 12 हजार रुपये खर्च कर आरओ (RO) सिस्टम लगवा रहे हैं।

चाय की दुकानों और होटलों पर अब खाना बनाने और चाय के लिए केवल बोतलबंद पानी का ही उपयोग किया जा रहा है।

सिस्टम की नाकामी पर सवाल

इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद नगर निगम की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं।

रविवार को 112 और नए सैंपल लिए गए, लेकिन उन्हें निजी लैब भेजना पड़ा क्योंकि निगम की अपनी लैब में कर्मचारियों की भारी कमी है।

स्थानीय रहवासियों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है।

उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समय रहते कदम नहीं उठाए गए, जिसका खामियाजा मासूम लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।

फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग ओआरएस (ORS) के पैकेट और जिंक की गोलियां बांटकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन स्वच्छ पानी की उपलब्धता अब भी एक बड़ा सवाल बनी हुई है।

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